-ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल बीजिंग से हरिवंश-
तकरीबन 60 बरस के बाद भारत और चीन के प्रधानमंत्री के बीच एक वर्ष में दूसरी मुलाकात सार्थक सिद्ध हुई. इस दौरान दोनों देशों ने परस्पर हित के कुल नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किये, हालांकि वीजा नियमों को सरल बनाने संबंधी समझौते पर सहमति नहीं बन पायी. दोनों देश आपसी विश्वास बनाने व पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में सहमत हुए.
भारत व चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सेना के बीच टकराव व सीमा पर तनाव को टालने के लिए बुधवार को एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किये. दोनों पक्षों ने फैसला किया कि कोई भी पक्ष हमला करने के लिए न सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल करेगा और न ही सीमा पर गश्ती दलों का पीछा. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीनी प्रधानमंत्री ली क्विंग के बीच तीन घंटे तक ग्रेट हॉल ऑफ दी पीपुल में हुई गहन वार्ता के बाद रक्षा सहयोग समझौते पर दस्तखत किये. दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के बाद कुल नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किये, जिसमें सीमा पारीय नदियों संबंधी समझौता भी शामिल है. लेकिन वीजा व्यवस्था का उदारीकरण किये जाने पर कोई समझौता नहीं हुआ.
मैत्रिपूर्ण संबंध रखने का संकल्प: प्रधानमंत्री डॉ सिंह ने कहा, तेजी से उभरते दो विशाल देशों के नेता होने के नाते बदलते व अनिश्चित वैश्विक वातावरण के बीच हमने अपनी सहभागिता का वादा और मैत्रिपूर्ण संबंध बरकरार रखने का संकल्प किया है. दोनों नेताओं ने माना कि एक ही कैलेंडर वर्ष में उनकी दूसरी मुलाकात मायने रखती है. इससे पहले 1954 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और चाउ एन लाइ के बीच इस तरह की मुलाकात हुई थी.
सरहद पर शांति ही संबंधों की बुनियाद : प्रधानमंत्री ने कहा, हम इस बात पर सहमत हैं कि सीमाओं पर शांति, संबंधों में विकास की बुनियाद है. हम सीमा के प्रश्न पर निष्पक्ष, वाजिब व परस्पर स्वीकार्य समझौते के लिए बातचीत कर रहे हैं. सीमा पर रक्षा संबंधी सहयोग के संदर्भ में हुए समझौते का जिक्र करते हुए कहा- यह समझौता हमारी सीमाओं पर शांति, स्थायित्व सुनिश्चित करने के वर्तमान माध्यमों में से एक साबित होगा. दोनों देशों ने सशस्त्र बलों के बीच व्यापक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने और उसे संस्थागत रूप देने का फैसला किया.
ली को भारत आने का न्योता दिया
डॉ सिंह ने चीनी सरकार द्वारा गर्मजोशी से किये गये स्वागत-सत्कार पर प्रसन्नता जतायी. चीनी प्रधानमंत्री ली को परस्पर सुविधानुसार किसी समय पर भारत आने का न्योता दिया. संवाददाताओं से कहा- मैं प्रधानमंत्री ली के निमंत्रण पर एक बार फिर बीजिंग आकर खुश हूं. मैं चीन की सरकार और लोगों के गर्मजोशी से किये गये स्वागत और सत्कार से अभिभूत हूं.
मील का पत्थर है यह यात्रा : ली
चीनी प्रधानमंत्री ली ने डॉ सिंह की यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों में ‘ मील का पत्थर’ बताते हुए कहा, यह संबंधों में नयी जान डालेगा. उन्होंने व्यापार पर भारत की चिंताओं के संदर्भ में कहा कि ढांचागत निर्माण के लिए हम भारत के साथ काम करने को तैयार है. दक्षिण पश्चिमी चीन में आतंकवाद विरोधी संयुक्त अभ्यास और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय इलाकों में नौवहन सहयोग आतंकवाद से निबटने की दिशा में उठाये गये दो अच्छे कदम हैं. ली ने भारत में आये विनाशकारी चक्रवाती तूफान के पीड़ितों और प्रभावितों के परिजनों के प्रति संवेदना और सहानुभूति जतायी.
‘ ‘ यह बातचीत भारत और चीन की ढाई अरब जनता की समृद्धि, एशिया के पुनरुत्थान व वैश्विक समृद्धि और स्थायित्व का एक महत्वपूर्ण कारक होगी. आज हुए समझौते संबंधों को नया आयाम देंगे.
डॉ मनमोहन सिंह
‘ ‘ कुछ समझौते होंगे और कुछ मतभेद भी, तथ्य यह है कि हम दो पुरानी सभ्यताएं हैं और सरकार तथा जनता के पास सीमा पर मतभेदों को सुलझाने और संबंधों को जारी रखने का विवेक है.
ली क्विंग
