सान सल्वाडोर:सुनकर अजीब लगेगा पर एक देश ऐसा भी है जहां गर्भपात जैसी तकलीफ से गुजरने वाली महिलाएं आत्महत्या कर लेती है. गर्भपात होने पर महिलाओं द्वारा आत्महत्या करने के पीछे का कारण कोई परम्परा नहीं बल्कि कठोर कानून है.
यहां पर गर्भपात को घोर कानूनी अपराध माना जाता है, जिसके लिए महिलाओं को 50 साल तक की सजा भी हो सकती है. दुनिया में ऎसे कई देश हैं जहां पर इतनी कठोर सजा सिर्फ गर्भपात पर दी जाती है.
जहां आज गर्भपात हर देश में एक बड़ी समस्या के रूप में उभरा है वहीं कुछ देश ऎसे भी हैं जिन्होने इससें सख्ती से निपटने के लिए ऎसे कठोर कानून बना दिए कि निर्दोष को भी सजा होने कोई नहीं रोक सकता है. कानून तथा सजा इतनी कठोर है कि सजा के डर के मारे महिलाएं आत्महत्या कर लेना ही उचित समझती है.
ऎसे देश जिनमें गर्भपात पर 50 साल तक की सजा मिल सकती है उनमें से एक है अल सल्वाडोर. यहां भ्रूण हत्या करने पर 10 से लेकर 50 साल तक की कड़ी सजा दी जाती है. जबकि कई बार प्राकृतिक रूप से गर्भपात होने पर भी महिलाओं पर यहां कानून की गाज गिरे बिना नहीं रहती है.
उदाहरण के लिए हाल ही में 30 अक्टूबर को ग्लेंडा नाम की एक 19 वर्षीय युवती का प्राकृतिक रूप से गर्भपात होना बताया गया. लेकिन कानून ने उसकी दलीलों को ठुकराते हुए 10 साल की सजा दे दी.
गर्भपात पर कठोर सजा देने वाले देशों में निकारागुआ, चिली होंडुरास तथा डोमिनिकन रिपब्लिक शामिल है. यहां पर भी गर्भपात पात पूर्ण प्रतिबंध है. बलात्कार के कारण गर्भवती होने, भू्रण के विकृत होने या जीवन को खतरा होने के दशा में भी यहां की महिलाएं गर्भपात नहीं करा सकती है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक इन दशों में 2000 से 2011 के बीच 200 महिलाओं पर गर्भपात का आरोप लगा और 129 पर मुकदमा चला जिनमें से 49 को दोषी करार देकर सजा दी गई.
