वाशिंगटन : भारत और अमेरिका के रक्षा संबंध बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाले अमेरिका के उप रक्षा मंत्री एवं पेंटागन में नम्बर दो का स्थान रखने वाले एशटन कार्टर ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है.
अमेरिकी रक्षा सचिव चक हेगल ने कल कहा, ‘‘आज दिन में मैंने एशटन कार्टर से मुलाकात की और उप रक्षा मंत्री का पद चार दिसम्बर से छोड़ने के उनका निर्णय को अनिच्छा से स्वीकार कर दिया. उन्होंने लगातार साढ़े चार वर्ष से अधिक समय तक रक्षा मंत्रलय को अपनी सेवा दी.’’ 59 वर्षीय कार्टर ने अक्तूबर 2011 में पूर्व रक्षा मंत्री लियोन पनेटा के नेतृत्व में उप रक्षा मंत्री के तौर पर अपनी सेवा शुरु की. पेंटागन ने उनके त्यागपत्र के लिए कोई कारण नहीं बताया.
पेंटागन के प्रेस सचिव जॉर्ज लिटिल ने कहा, ‘‘इस वर्ष के अंत में पेंटागन छोड़ने का निर्णय उनका स्वयं का निर्णय है. रक्षा मंत्री उनकी कमी महसूस करेंगे. दोनों के बीच मजबूत और प्रभावी कार्य संबंध और मित्रता थी जो अगले दो महीने और आगे भी जारी रहेगी.’’ यह घोषणा पेंटागन के वरिष्ठ कर्मचारी नेतृत्व की बैठक में किया गया जहां हेगल ने और अन्य व्यक्तियों ने कार्टर का खड़े होकर अभिवादन किया.
हेगल ने कहा, ‘‘उनके पास अमेरिका के रक्षा उद्यम की जो जानकारी है वह अद्वितीय है तथा उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सात रक्षा मंत्रियों के साथ काम किया.’’कार्टर ने सितम्बर में भारत की यात्र की और कार्टर.मेनन पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी जिसके तहत दोनों देशों ने उच्च प्रौद्योगिकी के रक्षा उपकरणों को संयुक्त रुप से विकसित करने और निर्माण का निर्णय किया.
हावर्ड के पूर्व प्रोफेसर एवं रोड्स के छात्र रहे कार्टर ने आक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी से सैद्धांतिक भौतिकी में डाक्टरेट किया. उन्होंने अपने त्यागपत्र में कहा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल को चार दिसम्बर को समाप्त करने का निर्णय बहुत पहले कर लिया था लेकिन वित्तीय अस्थिरता के चलते इसकी घोषणा नहीं की.
