आसियान सम्मेलन में नालंदा विश्वविद्यालय को मिला समर्थन

ब्रुनेई : भारत की महत्वाकांक्षी नालंदा विश्वविद्यालय परियोजना के लिए समर्थन देते हुए छह देशों ने इस अकादमिक संस्थान के लिए अपनी प्रतिबद्धता जतायी और अंतर-सरकारी सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया शुरु की. इन सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर पूर्वी एशियाई सम्मेलन में किए जा रहे हैं और सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन […]

ब्रुनेई : भारत की महत्वाकांक्षी नालंदा विश्वविद्यालय परियोजना के लिए समर्थन देते हुए छह देशों ने इस अकादमिक संस्थान के लिए अपनी प्रतिबद्धता जतायी और अंतर-सरकारी सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया शुरु की.

इन सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर पूर्वी एशियाई सम्मेलन में किए जा रहे हैं और सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परियोजना को समर्थन के लिए देशों के प्रति आभार भी व्यक्त किया.

उन्होंने कहा उत्कृष्टता के अंतरराष्ट्रीय संस्थान के तौर पर नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना के उद्देश्य से सहयोग के लिए पूर्वी एशियाई सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों का मैं आभार व्यक्त करता हूं. सिंह ने कहा मुझे खुशी है कि नालंदा विश्वविद्यालय पर अंतर-सरकारी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया शुरु हो गयी. इस विश्वविद्यालय में अगले साल अकादमिक सत्र शुरु हो जायेंगे.

मुझे उम्मीद है कि पूर्वी एशियाई सम्मेलन (ईएएस) देशों के छात्र और संकाय इसमें भागीदार होंगे. सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, कंबोडिया, सिंगापुर, ब्रुनेई, न्यूजीलैंड और लाओ पीडीआर शामिल हैं. अंतरराष्ट्रीय ख्याति के संस्थान के तौर पर नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना करने की भारत की योजना के लिए ये सहमति पत्र महत्वपूर्ण हैं.

आसियान-भारत शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशियाई सम्मेलन (ईएएस) में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री कल यहां पहुंचे. ईएएस क्षेत्र के विभिन्न देशों के आसियान के साथ सहयोग के लिए एक मंच है जिसमें ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया गणराज्य, न्यूजीलैंड, रुस और अमेरिका के अलावा दस आसियान (दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों का संघ-एएसईएएन) देश भी शामिल हैं.ये दस आसियान देश ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यामां, लाओस, फिलिपीन, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम हैं.

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