इस्लामाबाद : पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा कि वह पाकिस्तान के ऐसे पहले प्रधानमंत्री थे, जिसने सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई को संसद के प्रति जवाबदेह बनाया.इसके साथ ही गिलानी ने यह भी कहा कि जनरल परवेज मुशर्रफ द्वारा अपदस्थ किए गए उच्चतर न्यायालयों के न्यायाधीशों को दोबारा बहाल करने के अपने फैसले पर उन्हें कोई मलाल नहीं है.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और उन्होंने कयानी को बताया कि सरकार अपदस्थ न्यायाधीशों को दोबारा बहाल करना चाहती है. जियो न्यूज से बात करते हुए गिलानी ने कहा कि वह पाकिस्तान के ऐसे पहले प्रधानमंत्री थे, जिसने सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई को संसद के प्रति जवाबदेह बनाया.
उन्होंने कहा कि ओबामा प्रशासन को यह गलतफहमी थी कि पाकिस्तानी सेना यहां की लोकतांत्रिक सरकार का समर्थन नहीं करती. पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हालांकि, मैंने (अमेरिकी) राष्ट्रपति (बराक) ओबामा को यह एहसास दिलाया कि आईएसआई और सीआईए के बीच निकट सहयोग की ही वजह से ही पाकिस्तान में सभी शीर्ष आतंकी पकड़े गए हैं.’’ पाकिस्तान के एबटाबाद में ओबामा बिन लादेन के खिलाफ की गई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बार में गिलानी का कहना था कि वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की नाकामी थी.
उन्होंने कहा कि इस अभियान वाली रात को जनरल कयानी ने उन्हें बताया कि अमेरिकियों ने पाकिस्तानी क्षेत्र में घुसपैठ की है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘फिर मैंने विदेश मंत्री को बुलाकर उन्हें इस मुद्दे पर सख्त विरोध दर्ज कराने का निर्देश किया. उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान असल में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है और इसी वजह से पाकिस्तानी क्षेत्र में अमेरिकियों के प्रवेश का पता नहीं चल पाया था.’’
