संयुक्त राष्ट्र : युद्धग्रस्त सीरिया से रासायनिक हथियारों का जखीरा नष्ट करने का अभियान मंगलवार से आरंभ होगा जो कि अब तक के सबसे बड़े और खतरनाक नि:शस्त्रीकरण अभियानों में से एक होगा.
सीरिया में 1000 टन से अधिक सरीन, जहरीली गैस और अन्य प्रतिबंधित खतरनाक रासायनिक हथियार हैं. संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक रासायनिक हथियारों पर नजर रखने वालों ने विशेषज्ञों से इस अभियान में शामिल होने की अत्यावश्यक अपील की है. इस में शामिल होने वालों को जान के खतरे का सामना करने और बेहद कम समय सीमा में लक्ष्य हासिल करने के लिए तैयार रहना होगा.
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने इस अभियान को ‘चुनौतीपूर्ण’ करार दिया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सीरिया के रासायनिक हथियारों के जखीरे को नष्ट करने का प्रस्ताव गत शुक्रवार को सर्वसम्मति से स्वीकार किया था. रासायनिक हथियार निषेध संगठन :ओपीसीडब्ल्यू: के इस अभियान के साथ साथ संयुक्त राष्ट्र अगस्त में दमिश्क में हुए सरीन गैस हमले और अन्य संदिग्ध हमलों की जांच भी करेगा.
इराक और लीबिया में रासायनिक हथियारों के खात्मे के अभियान शुरु किए गए हैं लेकिन कभी भी युद्ध के दौरान कोई अभियान नहीं चलाया गया. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि सीरिया में हुए संघर्षों में 1,00,000 से अधिक लोग पहले ही मारे जा चुके हैं.
विशेषज्ञों ने कहा कि ओपीसीडब्ल्यू को सीरियाई बल का सामना करने के लिए 200 निरीक्षकों की जरुरत होगी. ओपीसीडब्ल्यू के पास अभी आधे से भी कम लोग हैं और उनके पास पहले से ही काम का काफी बोझ है.
अमेरिका-रुस की योजना को 2014 के मध्य तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है लेकिन कुछ ही लोगों का मानना है कि इसे हासिल किया जा सकता है. लंदन में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फोर स्ट्रैटेजिक स्टीज की निरस्त्रीकरण विशेषज्ञ दीना एस्फानडायरी ने कहा, ‘‘ इतना बड़ा और युद्ध के बीच अभियान कभी शुरु नहीं किया गया. ’’
