वाशिंगटन:अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सीरिया के रासायनिक हथियारों को अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में लेने को लेकर रुस के साथ हुए समझौते का स्वागत किया, लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर बशर अल असद शासन इस समझौते का पारदर्शी रुप से पालन नहीं करता है तो इसके परिणाम होंगे.
अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी और उनके रुसी समकक्ष सर्गई लावारोव ने जिनीवा में बातचीत के बाद इस समझौते पर पहुंचे कि सीरिया के रासायनिक हथियार को अंतरराष्ट्रीय कब्जे में लिया जाएगा. 2014 के मध्य तक इन हथियारों को नष्ट करने पर भी सहमति बनी है.ओबामा ने कहा कि अंतराष्ट्रीय समुदाय सीरिया से सार्वजनिक रुप से की गई प्रतिबद्धता को पूरा करने की उम्मीद करता है. उन्होंने कल एक बयान में कहा, ‘‘हमने महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. रुस, फ्रांस, संयुक्त राष्ट्र तथा दूसरों के साथ अमेरिका काम करना जारी रखेगा ताकि प्रक्रिया को परखने योग्य बनाना सुनिश्चित किया जा सके. अगर असद शासन समझौते का पालन नहीं करता है तो इसके प्रतिकूल परिणाम होंगे.’’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘अगर कूटनीति विफल होती है तो अमेरिका कार्रवाई करने के लिए तैयार रहेगा.’’ ओबामा ने कहा कि उन्होंने कथित रासायनिक हमले के बाद सीरिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का फैसला कर लिया था. रुस की ओर से समझौते की पहल के बाद उन्होंने इस योजना को फिलहाल के लिए टाल दिया. अमेरिका का आरोप है कि असद शासन ने रासायनिक हमला करके 1,400 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया था. असद शासन इस आरोप को खारिज करता है.अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि रुस और अमेरिका की ओर से की गई प्रगति महत्वपूर्ण है और इससे सीरिया के परमाणु हथियार अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में आ सकेंगे जिन्हें फिर नष्ट किया जा सकेगा. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी कल रुस और अमेरिका के बीच हुए समझौते का स्वागत किया था.
