सेंट पीटर्सबर्ग : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आठवें जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आज यहां पहुंचे. जी-20 शिखर बैठक में प्रधानमंत्री सिंह अमेरिकी में मौद्रिक प्रोत्साहन वापस लिए से भारत और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामाने किसी भी तरह की कठिनाई का सामना करने के लिए समन्वित योजना पर जोर दे सकते हैं.
रुस के सेंट पीटर्सबर्ग में कल से आयोजित दो दिन के शिखर सम्मेलन पर सीरिया की स्थिति को लेकर रुस और अमेरिका में विवाद की छाया भी पड़ सकती है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बांड खरीद कार्यक्रम को धीरे-धीरे समाप्त करने के मामले में र उभरती अर्थव्यवस्थाओं तथा अमेरिका में मतभेद विवाद, भारत और अन्य चार ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रुस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) में वृद्धि दर में गिरावट का मुद्दा भी चर्चा में रहने की उम्मीद है.
ब्रिक्स को वैकल्पिक आर्थिक ताकत माना जाता है. ये सभी देश धीमी वृद्धि दर, मुद्राओं में गिरावट और पूंजी के भारी बाह्य प्रवाह जैसी समस्याओं का सामना करते हुए इस बैठक में शामिल होने जा रहे हैं.
शिखर सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले सिंह ने बयान में विकसित देशों की ‘गैर परंपरागत मौद्रिक नीति’ से उचित तरीके से बाहर निकलने पर जोर दिया. वर्ष 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के बाद से विकसित दुनिया द्वारा इस तरह की गैर परम्परागत नीतियां अपनाई जा रही हैं. वाशिंगटन में 2008 में पहली जी-20 शिखर बैठक हुई थी. प्रधानमंत्री सभी बैठकों में शामिल हुए हैं. वह शनिवार रात को स्वदेश लौटेंगे.
