30 से 40 देश कोरोना वैक्सीन की दूसरी खुराक देने में असमर्थ, कई देशों ने रोलआउट को किया निलंबित

Corona vaccine, Second dose, AstraZeneca : नयी दिल्ली : कोरोना वायरस के खिलाफ जारी लड़ाई में पूरी दुनिया में वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है. इसी बीच, डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने कहा है कि 30 से 40 देश कोरोना वैक्सीन की दूसरी खुराक देने में असमर्थ हैं. खासकर, जो एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की खुराक लेना चाहते हैं.

नयी दिल्ली : कोरोना वायरस के खिलाफ जारी लड़ाई में पूरी दुनिया में वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है. इसी बीच, डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने कहा है कि 30 से 40 देश कोरोना वैक्सीन की दूसरी खुराक देने में असमर्थ हैं. खासकर, जो एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की खुराक लेना चाहते हैं.

ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक के वरिष्ठ सलाहकार ब्रूस आयलवर्ड ने शुक्रवार को कहा कि कई देशों को कोरोना वैक्सीन की दूसरी खुराक के रोलआउट को निलंबित करना पड़ा, क्योंकि वे खत्म हो गये हैं. उन्होंने कहा कि जब कमजोर सिस्टमवाले देशों को अपने कार्यक्रमों को बाधित करने, पुनर्गठित करने, पुनर्निर्देशित करने के लिए मजबूर किया जाता है, तो उन्हें वास्तविक परेशानी होनेवाली है.

साथ ही उन्होंने कहा है कि राजनेता कोविड-19 के वैक्सीन लगवाने के लिए अपनी आबादी को एकत्रित करने के लिए उत्सुक है. कोरोना वैक्सीन के बाधित और धीमी गति के कारण रोलआउट किये जाने पर डॉ ब्रूस आयलवर्ड ने कहा है कि वे खुराक, आपूर्तिकर्ता और अनुवर्ती कार्रवाई के कारण चिंतित हैं कि उन्हें समय से पूर्व ऐसा करना पड़ रहा है.

मालूम हो कि डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस ने शुक्रवार को कहा था कि वैक्सीन को समान रूप से साझा करने में वैश्विक विफलता दो-ट्रैक के कोरोना महामारी को बढ़ावा दे रही है. अब दुनिया के कुछ सबसे गरीब और सबसे कमजोर लोगों पर अपना असर डाल रही है.

साथ ही उन्होंने कहा था कि हमारा वैश्विक लक्ष्य सितंबर तक हर देश की आबादी का 10 फीसदी, साल के अंत तक 40 फीसदी और अगले साल के मध्य तक 70 फीसदी तक वैक्सीनेशन करना है. ये मील का पत्थर है, इसके बावजूद हमें कोरोना महामारी को खत्म करने के लिए इस आंकड़े तक पहुंचना चाहिए.

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