नयी दिल्ली : अमेरिका के रक्षामंत्री चक हेगल ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. हेगल के साथ एक प्रतिनिधिमंडल भी नरेंद्र मोदी से मिला. मुलाकात के दौरान इराक में बिगड़ते हालात पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि वह राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ अपनी शिखरवार्ता को लेकर आशान्वित हैं जिसमें इस बात पर चर्चा की जाएगी कि भारत और अमेरिका दुनिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए साझेदारी कैसे बना सकते हैं.
मोदी ने भारत यात्रा पर आये अमेरिकी रक्षा मंत्री चक हैगल से यह बात कही. हैगल ने यहां मोदी से मुलाकात की. इस दौरान प्रधानमंत्री को इराक में हालात से निपटने के लिए अमेरिका के कदमों के बारे में ओबामा द्वारा की गयी घोषणाओं की जानकारी दी गयी.
प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने इराक में बिगडते हालात पर और इससे क्षेत्र में पडने वाले प्रभाव पर चिंता जताई.
अमेरिका ने अमेरिकी सेना के जवानों को बचाने के लिए इस्लामी उग्रवादियों के खिलाफ हवाई हमलों की अनुमति दे दी है और उत्तर पश्चिम इराक में एक पहाड की चोटी पर फंस गये हजारों धार्मिक अल्पसंख्यकों को पानी और भोजन हवाई मार्ग से पहुंचाने को हरी झंडी दे दी है. प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय मोर्चे पर यहां नई सरकार के साथ अमेरिका द्वारा लगातार उच्चस्तरीय साझेदारी का स्वागत किया.
वक्तव्य के मुताबिक मोदी ने हैगल से कहा कि वह अमेरिका की अपनी यात्रा को न केवल इस दृष्टि से देखते हैं कि दोनों देश एक दूसरे के लिए क्या कर सकते हैं, बल्कि इस मौके के तौर पर भी देखते हैं कि दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र और दुनिया का सबसे बडा लोकतंत्र किस तरह दुनिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए साझेदारी कर सकते हैं. ओबामा के साथ पहली शिखरवार्ता के लिए मोदी अगले महीने के आखिर में वाशिंगटन यात्रा पर जा सकते हैं.
भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर कल रात हेगल भारत पहुंचे हैं. हेगल की भारत यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाना है, विशेषकर रक्षा के क्षेत्र में. हेगल ने आज विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से भी भेंट की. हेगल की यह पहली भारत यात्रा है.
अमेरिकी रक्षा मंत्री चक हेगल ने भारत यात्रा से पूर्व वाशिंगटन में कहा कि भारत को समय दिया जाना चाहिए ताकि वह अमेरिका के साथ अपने संबंधों की प्रकृति को परिभाषित कर सके. ऐसा कह कर हेगल ने संकेत दिये हैं कि नयी सरकार कौन सा रुख अपनाने का फैसला करती है, इसके लिए ओबामा प्रशासन धैर्यपूर्वक इंतजार करने के लिए तैयार है.
