काठमांडूःसावन की आखिरी सोमवारी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक किया. भगवान शिव के मंदिर में मोदी करीब 45 मिनट तक रहे. मोदी ने पशुपतिनाथ मंदिर में श्रावण महीने के सोमवार के दिन दर्शन किए जिसका धार्मिक तौर पर काफी महत्व है. उन्होंने पशुपतिनाथ मंदिर ट्रस्ट को 2500 किलोग्राम चंदन दान किया.
यह हिंदू मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडो के तीन किलोमीटर उत्तर पश्चिम में देवपाटन गांव में बागमती नदी के तट पर स्थित है. यह मंदिर भगवान शिव के पशुपति स्वरुप को समर्पित है. हर साल हजारों लोग इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं जिनमें से अधिकतर संख्या भारत के लोगों की होती है.
मंदिर में भारतीय पुजारियों की काफी संख्या है. सदियों से यह परंपरा रही है कि मंदिर में चार पुजारी और एक मुख्य पुजारी दक्षिण भारत के ब्राह्मणों में से रखे जाते हैं.किंवदंतियों के अनुसार मंदिर का निर्माण सोमदेव राजवंश के पशुप्रेक्ष ने तीसरी सदी ईसा पूर्व में कराया था लेकिन पहले ऐतिहासिक रिकार्ड 13वीं शताब्दी के हैं. पाशुपत सम्प्रदाय संभवत: इसकी स्थापना से जुडा है.
Felt extremely blessed on offering prayers at the Pashupatinath Temple this morningpic.twitter.com/t4EK1Yo6AV
पशुपति काठमांडो घाटी के प्राचीन शासकों के अधिष्ठाता देवता रहे हैं. 605 ईसवीं में अमशुवर्मन भगवान के चरण छूकर अपने को अनुग्रहीत मानते थे.बाद में मध्य युग तक मंदिर की कई नकलों का निर्माण कर लिया गया. ऐसे मंदिरों में भक्तपुर (1480), ललितपुर (1566) और बनारस (19वीं शताब्दी के प्रारंभ में) शामिल हैं. मूल मंदिर कई बार नष्ट हुआ. इसे वर्तमान स्वरुप नरेश भूपलेंद्र मल्ला ने 1697 में प्रदान किया.
स्थानीय किंवदंती विशेष तौर पर नेपालमहात्म्य और हिमवतखंड के अनुसार भगवान शिव एक बार वाराणसी के अन्य देवताओं को छोडकर बागमती नदी के किनारे स्थित मृगस्थली चले गए.भगवान शिव वहां पर चिंकारे का रुप धारण कर निद्रा में चले गए. जब देवों ने उन्हें खोजा और उन्हें वाराणसी वापस लाने का प्रयास किया तो उन्होंने नदी के दूसरे किनारे पर छलांग लगा दी. इस दौरान उनका सींग चार टुकडों में टूट गया. इसके बाद भगवान पशुपति चतुर्मुख लिंग के रुप में प्रकट हुए. मोदी ने ट्वीट करके पूजा के बाद अपने अनुभव को साझा किया.
