वाशिंगटन : डब्ल्यूडीओ के समझौते पर भारत द्वारा हस्ताक्षर नहीं किये जाने का अमेरिका में जबर्दस्त विरोध हो रहा है. अमेरिका के दो असरदार सांसदों ने व्यापार सुगमता समझौते (टीएफए) पर भारत के अडि़यल रुख की आलेचना की है और कहा है कि इससे भारत सरकार की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा हो गया है.
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की राजस्व संसाधन समिति के सभापति डेव कैंप ने कहा, भारत ने व्यापार सुगमता समझौते के क्रियान्वयन को कल रात रोक दिया. उसकी यह कार्रवाई अस्वीकार्य है और इससे एक जिम्मेदार व्यापारिक भागीदार के रुप में उसकी विश्वसनीयता में संदेह पैदा हो गया है. एक बयान में उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि व्यापार सुगमता समझौता बचा लिया जाएगा, चाहे इसमें भारत का सहयोग मिले अथवा नहीं.
समिति की व्यापार संबंधी उपसमिति के सभापति डेविन न्यूनेस ने भारत की आलोचना करते हुए कहा कि किसी देश का वार्ताओं में कडाई से बातचीत करना एक अलग बात है, लेकिन अपने व्यापारिक भागीदारों से समझौता करने के कुछ महीने बाद उससे अलग हट जाना बिल्कुल अलग बात है.
गौरतलब है कि विश्व व्यापार संगठन टीएफए समझौते को अपनाने के लिए 31 जुलाई 2014 तक की समय सीमा दी गयी थी, लेकिन भारत ने खाद्य सुरक्षा और कृषि सब्सिडी से जुडे मुद्दों का समाधान नहीं होने के कारण इस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया. जिसके कारण यह समझौता समय से लागू नहीं हो सका.
