II पवन प्रत्यय II
पटना : प्रेम की अनेक कहानियां हैं. हर समाज में. और हर समाज-समूह के अपने-अपने मूल्य बोध हैं. पर प्रेम है कि सामाजिक स्तर पर बनाये गये बंदिशों-पाबंदियों को नहीं मानता. मनुष्य निर्मित जाति, धार्मिक व भाषायी बंधनों को वह तोड़कर कुछ नया गढ़ता है. आज की यह वास्तविकता बनती जा रही है कि युवा पीढ़ी का एक अच्छा-खासा हिस्सा अपनी पसंद के हमसफर को चुन रहा है.
अंतरजातीय विवाह में पहले की तुलना में अब अचड़नें भी कम आ रही हैं. पारिवारिक सहमति से अलग-अलग जातियों के युवक-युवती की शादियों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है.
यह हमारे वक्त की तल्ख सच्चाई है. इस क्रम में सरकार की ओर से जाति तोड़कर शादी करनेवालों को मिलनेवाली प्रोत्साहन राशि को आधार बनाया, तो हैरान करनेवाले तथ्य मिले. हालांकि जानकारों का कहना है कि जाति के बंधन को तोड़नेवाले बहुतेरे जोड़ों ने प्रोत्साहन राशि लेना मुनासिब नहीं समझा. मगर अच्छी बात है कि सामाजिक वर्जनाएं टूट रही हैं.
मुंगेर : जिले में अबतक हुए अंतरजातीय विवाह के आंकड़ों ने अपना अर्धशतक पूरा कर लिया है. हालांकि 1 जनवरी, 2017 से 1 जनवरी, 2018 तक जिले में कुल 26 जोड़े विवाह बंधन में बंधे.
ऐसे ही जोड़ों में शहर के छोटी केलाबाड़ी निवासी सुरेश कुमार मंडल के पुत्र अंकित कुमार तथा अंशु कुमार भी हैं. अंशु ने 23 नवंबर, 2016 को स्थानीय रवींद्र प्रसाद सिन्हा की पुत्री अपूर्वा श्री से विवाह रचाया तथा अंकित ने भी 11 दिसंबर, 2016 को शहर के पुरानीगंज के भगवान शर्मा की पुत्री अंकिता शर्मा से विवाह किया़. इस विवाह का हर किसी ने भव्य स्वागत किया़.
अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि में मुंगेर आगे : समाज कल्याण विभाग के आंकड़े के अनुसार अन्य जिलों की तुलना में मुंगेर जिले के प्रेमी जोड़ों ने सबसे अधिक प्रोत्साहन राशि का लाभ लिया है. वित्तीय वर्ष 2017-2018 में पांच फरवरी, 2018 तक इस जिले में अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि के रूप में 20.50 लाख रुपये खर्च किये जा चुके हैं. इस जिले को 25 लाख की राशि दी गयी है.
38 में से 19 जिलों में योजना का लाभ नहीं : जरूरी नहीं कि सूबे के 19 जिलों में अंतरजातीय विवाह की संख्या शून्य होगी या कम होगी. लेकिन, आंकड़े में पांच फरवरी, 2018 तक राजधानी पटना समेत 38 में से 19 जिलों में अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि पर कोई खर्च नहीं किया गया है.
यानी यहां जाति मुक्त शादी करनेवालों ने पैसे के लिए क्लेम नहीं किया. बहरहाल, सबसे कम एक लाख रुपये सुपौल जिले में खर्च किये गये हैं, जबकि आवंटित राशि 10 लाख है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा के लिए वित्तीय वर्ष 2017-2018 के लिए 10 लाख राशि आवंटित है. लेकिन, ऐसे किसी जोड़े ने लाभ नहीं लिया है.
सीमांचल में टूट रहीं सामाजिक वर्जनाएं : 2017-2018 के लिए सूबे में सबसे अधिक पूर्णिया जिले को प्रोत्साहन राशि के रूप में खर्च के लिए 30 लाख रुपये दिये गये हैं. अब तक 15.75 लाख राशि खर्च की जा चुकी है. पड़ोसी जिले अररिया, किशनगंज, कटिहार व मधेपुरा में से कटिहार के लिए आवंटित पूरी राशि पांच लाख रुपये खर्च किये जा चुके हैं.
2017-2018 में सात करोड़ का बजट
2017-2018 वित्तीय वर्ष के लिए समाज कल्याण विभाग की ओर से अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन के लिए सात करोड़ की राशि आवंटित है. 12 फरवरी, 2018 तक इसमें 108.75 लाख रुपये खर्च किये जा चुके हैं. विभाग के प्रधान सचिव अतुल प्रसाद कहते हैं कि शिक्षा के कारण समाज में बदलाव की किरण निकली है. लोग रूढ़ीवादी सोच को छोड़ कर इस तरह की शादियों में हामी भर रहे हैं. सरकार की प्रोत्साहन राशि इस तरह की शादी करनेवाले जोड़ों को आर्थिक मदद व समाज को जागरूक करने का अच्छा माध्यम है.
अंतरजातीय विवाह समाज के विकास के लिए जरूरी है. जात-पात से ऊपर उठ कर सूबे की युवा पीढ़ी अपनी मर्जी से अलग-अलग जातियों में शादी कर रहे हैं. यह शिक्षित समाज का अच्छा संकेत है. अब परंपरागत सोच रखनेवाले अभिभावक भी इस मामले में अपने बच्चों के साथ खड़े हो रहे हैं. सरकार की प्रोत्साहन राशि नकारात्मक फैक्टर को कम करने में सहयोग करती है.
अतुल प्रसाद, प्रधान सचिव, समाज कल्याण विभाग, बिहार
