वैलेंटाइंस डे आज : दुनियाभर में मशहूर है हीर-रांझा की कहानी

रांझा बचपन से ही अपने सपनों की शहजादी के बारे में सोचा करता था. एक दिन एक पीर ने उसे बताया कि तुम्हारे सपनों की शहजादी हीर है. यह सुन रांझा अपनी हीर की तलाश में निकल पड़ा. हीर जब मिली तो वह भी उस पर रीझ गयी और उसे अपने घर में नौकरी पर […]

रांझा बचपन से ही अपने सपनों की शहजादी के बारे में सोचा करता था. एक दिन एक पीर ने उसे बताया कि तुम्हारे सपनों की शहजादी हीर है. यह सुन रांझा अपनी हीर की तलाश में निकल पड़ा. हीर जब मिली तो वह भी उस पर रीझ गयी और उसे अपने घर में नौकरी पर रखवा दिया. हीर के चाचा को जब दोनों के इश्क की भनक लगी तो उसने हीर की शादी करवा दी.
गम में डूबा रांझा फकीर बन कर गांव-गांव घूमने लगा. एक दिन वह हीर के दरवाजे पर पहुंच गया. अब रांझा रोजाना उसके घर भीख मांगने पहुंच जाता. मगर जल्द हीर की भाभी को इनका राज पता चल गया. फिर रांझा गांव छोड़कर चला गया. उसकी जुदाई में हीर बीमार हो गयी. जब हकीमों से उसका इलाज न हुआ, तो हीर के ससुर ने रांझे को फकीर समझ बुलाया.
रांझा ने हीर के सिर पर हाथ रखा तो हीर की चेतना लौट आयी. मगर जल्द फकीर रांझा का राज खुल गया. गांव वालों ने रांझा को पीट कर भगा दिया. जब राजा को उसकी कहानी मालूम हुई तो उसने हीर के पिता को दोनों की शादी करा देने का आदेश दिया. राजा के डर से हीर का पिता राजी तो हो गया, लेकिन उसने चुपके से हीर को जहर दे दिया. जब रांझा को हीर के मरने की खबर मिली, तो उसने भी वहीं दम तोड़ दिया.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >