जानें खुश रहने का राज

डॉ एनके बेरा एक शिष्य अपने गुरु के पास पहुंचा और बोला- लोगों को खुश रहने के लिए क्या चाहिए? तुम्हें क्या लगता है?- गुरु ने शिष्य से खुद इसका उत्तर देने के लिए कहा. शिष्य बोला- मुझे लगता है कि अगर किसी की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी हो रही हों, खाना-पीना मिल जाये, रहने के […]

डॉ एनके बेरा

एक शिष्य अपने गुरु के पास पहुंचा और बोला- लोगों को खुश रहने के लिए क्या चाहिए? तुम्हें क्या लगता है?- गुरु ने शिष्य से खुद इसका उत्तर देने के लिए कहा.

शिष्य बोला- मुझे लगता है कि अगर किसी की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी हो रही हों, खाना-पीना मिल जाये, रहने के लिए जगह हो, एक अच्छी-सी नौकरी या कोई काम हो, सुरक्षा हो, तो वह खुश रहेगा. यह सुन गुरु ने शिष्य को अपने पीछे आने का इशारा किया.

वह एक दरवाजे के पास जाकर रुके, जहां सामने मुर्गी का दड़बा था. वहां मुर्गियों और चूजों का ढेर लगा था. वे बड़े-बड़े पिंजड़ों में कैद थे.

आप मुझे ये क्यों दिखा रहे हैं. शिष्य ने पूछा. इस पर गुरु, शिष्य से ही प्रश्न-उत्तर करने लगे.

क्या इन मुर्गियों को खाना मिलता है?’

शिष्य – हां.

गुरु – इनके पास रहने को घर है?

शिष्य – हां, कह सकते हैं.

गुरु – क्या ये यहां कुत्ते-बिल्लियों से सुरक्षित हैं?

शिष्य – हम्म!

गुरु -क्या उनके पास कोई काम है?

शिष्य – हां, अंडा देना.

गुरु – क्या वे खुश हैं?

शिष्य सोचने लगा कि कैसे पता किया जाये कि कोई मुर्गी खुश है भी या नहीं? तभी गुरुजी उसे लेकर चलने लगे. एक मैदान के पास जा कर रुके. मैदान में ढेर सारे मुर्गियां और चूजे थे. वे न किसी पिंजड़े में कैद थे और न उन्हें कोई दाना डालनेवाला था. वे खुद ही ढूंढ़-ढूंढ़ कर दाना चुग रहे थे और खेल-कूद रहे थे.

क्या ये मुर्गियां खुश दिख रही हैं?- गुरु जी ने पूछा.

शिष्य सोचने लगा- यहां का माहौल अलग है और ये मुर्गियां प्राकृतिक तरीके से रह रही हैं. खा-पी रही हैं और ज्यादा स्वस्थ दिख रही हैं. शायद ये यहां खुश हैं.

बिल्कुल ये मुर्गियां खुश हैं, बेतुके मत बनो. गुरु जी बोले. पहली जगह पर जो मुर्गियों हैं, उनके पास वे सारी चीजें हैं जो तुमने खुश रहने के लिए जरूरी मानी थीं. उनकी मूलभूत आवश्यकताएं, खाना-पीना, रहना सबकुछ है. करने के लिए काम भी है, सुरक्षा भी है, पर क्या वे खुश हैं?

वहीं मैदानों में घूम रही मुर्गियों को खुद अपना भोजन ढूंढ़ना है. रहने का इंतजाम करना है. अपनी और अपने चूजों की सुरक्षा करनी है, पर फिर भी वे खुश हैं.

गुरु जी गंभीर होते हुए बोले- हम सभी को एक चुनाव करना है, या तो हम दड़बे की मुर्गियों की तरह एक पिंजड़े में रह कर जी सकते हैं, एक ऐसा जीवन जहां हमारा कोई अस्तित्व नहीं होगा. या हम मैदान की उन मुर्गियों की तरह जोखिम उठा कर एक आजाद जीवन जी सकते हैं और अपने अंदर समाहित अनंत संभावनाओं को टटोल सकते हैं.

तुमने खुश रहने के बारे में पूछा था न, तो यही मेरा जवाब है. सिर्फ सांस लेकर तुम खुश नहीं रह सकते. खुश रहने के लिए तुम्हारे अंदर जीवन को सचमुच जीने की हिम्मत होनी चाहिए. इसलिए खुश रहना है तो दड़बे की मुर्गी मत बनो.

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