मोदी सरकार ने अपने पांचवें बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और महिलाओं के लिए बड़ा एलान किया है. 10 करोड़ गरीब और कमजोर परिवारों के लिए पांच लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा कराने की घोषणा की गयी है. 24 नये सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल, 18 नये आइआइटी और एनआइआइटी खोले जायेंगे.
नयी दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना ‘आयुष्मान भारत’ का एलान किया. इस योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक गरीबऔर कमजोर परिवारों (करीब 50 करोड़ लोगों) के लिए सालाना पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कराया जायेगा.
यह योजना कैशलैस होगी और मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को नयी योजना का रूप दिया जायेगा. एक अप्रैल, 2018 से सरकार के पास इसके लिए 2000 करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे. मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना गरीब परिवारों को 30 हजार रुपये का वार्षिक कवरेज ही प्रदान करती है.
वित्त मंत्री ने कहा कि हम सब जानते हैं कि हमारे देश में लाखों परिवारों को अस्पतालों में इलाज कराने के लिए उधार लेना पड़ता है या संपत्तियां बेचनी पड़ती हैं. सरकार निर्धन और कमजोर परिवारों की इस स्थिति को लेकर अत्यधिक चिंतित है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति-2017 में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की नींव के रूप में स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्रों की परिकल्पना की गयी है. ये डेढ़ लाख केंद्र स्वास्थ्य देखरेख प्रणाली को लोगों के घरों के पास लायेंगे. इस कार्यक्रम के लिए इस बजट में 1200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.
जेटली ने कहा कि ‘आयुष्मान भारत’ विश्व का सबसे बड़ा सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य देखरेख कार्यक्रम होगा. इसके तहत ये दो दूरगामी पहलें 2022 तक एक नये भारत का निर्माण करेंगी. बजट में टीबी से पीड़ित सभी रोगियों को उपचार के दौरान 500 रुपये प्रतिमाह खाने-पीने के लिए दिये जायेंगे. इसके लिए 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि दी जायेगी.
वरिष्ठ नागरिक
बैंकों तथा डाकघरों में जमा राशि पर ब्याज आय में छूट की सीमा 10 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गयी है. धारा 80डी के तहत चिकित्सा व्यय पर कर कटौती सीमा को 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया गया है.
स्वास्थ्य
24 नये सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खुलेंगे. जिला अस्पतालों का उन्नयन किया जायेगा
500 रुपये प्रतिमाह टीबी रोगियों को खाने-पीने के लिए मिलेंगे. 600 करोड़ की अतिरिक्त राशि आवंटित
3000 से अधिक जन औषधि केंद्रों में 800 दवाइयां मुफ्त में मिलेंगी
2000 करोड़ रुपये ‘आयुष्मान भारत’ योजना के लिए आवंटित
330 रुपये सालाना प्रीमियम पर दो लाख रुपये का बीमा (प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा) 5.22 करोड़ लोगों ने अपनाया
12 रुपये सालाना प्रीमियम पर दो लाख रुपये की बीमा (प्रधानमंत्री दुर्घटना बीमा योजना) 13.25 करोड़ लोगों ने अपनाया
गृहिणी
सरकार ने घरेलू महिलाओं को ध्यान में रखा है. उज्ज्वला योजना के तहत आठ करोड़ गैस कनेक्शन मुफ्त देगी. गोल्ड पॉलिसी ला रही है, जिससे घर में रखे सोने को बैंक में जमा करने पर 2.25 से 2.5 फीसदी तक ब्याज मिलेगा.
महिला
08 करोड़ महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन
75,000 करोड़ रुपये महिला स्वयं सहायता समूहों को कर्ज के रूप में मार्च, 2019 तक दिया जायेगा
06 महीने की मातृत्व अवकाश मिलेगा. इन छुट्टियों में पूरी सैलरी
280 करोड़ रुपये बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के लिए
2400 करोड़ रुपये मातृत्व लाभ कार्यक्रम के लिए
19.75 करोड़ रुपये महिलाओं की सुरक्षा (निर्भया कोष) के लिए
28.8 करोड़ रुपये महिला हेल्पलाइन के लिए
24 करोड़ राष्ट्रीय महिला आयोग के लिए
किसे कितना धन
3,073
करोड़ रुपये विज्ञान और प्रौद्योगिकी
13,971.41
करोड़ रुपये परमाणु ऊर्जा विभाग
नौकरी-पेशा : युवा
आयकर छूट की सीमा में कोई परिवर्तन नहीं होने से नौकरी करने वाले युवाओं को निराशा हाथ लगी है. हालांकि, मुद्रा योजना के तहत तीन लाख करोड़ रुपये कर्ज देने का लक्ष्य रखा गया है. इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा.
नौकरी-पेशा : महिला
नयी नौकरी शुरू करने वाली महिलाओं को रोजगार के पहले तीन साल भविष्य निधि में अंशदान मौजूदा 12 प्रतिशत से घटाकर आठ प्रतिशत किया गया. इसमें नियोक्ता के अंशदान में कमी नहीं होगी.
खुले में शौच से मुक्ति की पहल दो करोड़ नये शौचालय बनेंगे
नयी दिल्ली : स्वच्छ भारत मिशन के तहत अगले वित्त वर्ष में देशभर में दो करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया जायेगा. देश को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए सरकार ने ठोस कचरा प्रबंधन के लिए गोबरधन नाम की नयी योजना शुरू की है.
जेटली ने कहा कि एसबीएम के तहत अगले वित्त वर्ष में और अधिक शौचालय बनाये जायेंगे. इस मिशन के तहत सरकार ने छह करोड़ से अधिक शौचालय बनाये गये हैं. इसका सकारात्मक असर महिलाओं के सम्मान, बालिका शिक्षा और परिवार के समग्र स्वास्थ्य पर देखा जा रहा है.
सोशल सेक्टर में समेकित योजना का अभाव
हेल्थ सेक्टर पर निजी क्षेत्र का प्रभाव बढ़ेगा, मौजूदा अस्पतालों को सुदृढ़ करने की जरूरत थी
डॉ शैबाल गुप्ता
अर्थशास्त्री
इस बजट को देखने से लगता है कि सरकार चुनाव की जल्दीबाजी में है. बहुत संभव है कि मार्च, 2019 के पहले ही चुनाव हो जाये. इसकी आहट बजट में सुनायी दे रही है. इस बजट को पॉपुलिस्ट (लोकलुभावन) कह सकते हैं. हालांकि, सरकार के नजरिये से यह सकारात्मक बजट है. सरकार कृषि और स्वास्थ्य के क्षेत्र में खास कदम उठायेगी. पर, इसका ठीक-ठीक प्रतिफल किस रूप में सामने आयेगा, इस बारे में ठोस आकलन नहीं कर सकते.
आप देखें कि कृषि और हेल्थ सेक्टर को लेकर बड़ी बातें कही गयी हैं. हेल्थ में पांच करोड़ परिवारों के लिए पांच-पांच लाख का बीमा लेकर आ रही है. जाहिर है इस सेक्टर में निजी क्षेत्र का प्रभाव बढ़ेगा, जबकि होना यह चाहिए था कि मौजूदा अस्पतालों को वह सुदृढ़ करती और सार्वजनिक क्षेत्र में अस्पतालों का निर्माण कराती. आम आदमी के लिए निजी अस्पताल उसकी पहुंच से बाहर है.
इसे ध्यान में रखते हुए पांच लाख के बीमा कवर की पॉलिसी लायी गयी है. इसके चलते ऐसा लगता है कि आनेवाले दिनों में निजी अस्पताल व्यापक रूप से खुलेंगे. हेल्थ सेक्टर में किये गये प्रस्तावों को देखने से लगता है कि सरकार इस क्षेत्र में निजी निवेश के प्रति आशावान है और इसीलिए उसने ऐसा रोडमैप तैयार किया है.
मेरी समझ से इस सेक्टर में निजी निवेश के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के तहत चीजों को मजबूत करने की जरूरत थी. दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि हेल्थ सेक्टर में जो आप काम करने जा रहे हैं, उसके लिए पैसा कहां से आयेगा.
बजट से ऐसा लगता है कि सोशल सेक्टर में सरकार टुकड़े-टुकड़े में सुधार की दिशा तलाश रही है. समेकित तौर पर इस क्षेत्र में सुधार के लिए कदम उठाने की जरूरत थी. ऐसा हम नहीं देख पा रहे हैं.
मसलन, आप कृषि की बात करें. सरकार 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का इरादा जाहिर कर रही है. पर, इस आमदनी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि क्षेत्र का ग्रोथ 12 फीसदी से भी ज्यादा होना चाहिए. मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह लक्ष्य असंभव-सा लगता है.
आखिर किसानों की आमदनी दोगुनी होगी कैसे? यह बड़ा सवाल है. इसके ठीक उलट, हम देख रहे हैं कि कॉरपोरेट सेक्टर को काफी उदारता के साथ रियायत दी गयी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कॉरपोरेट को छूट देने की जिस तरह नीति पर चल रहे हैं, ऐसा लगता है कि हम उनसे प्रतियोगिता कर रहे हैं. वे अगर 15 फीसदी छूट दे रहे हैं, तो हम 25 फीसदी. जहां तक बिहार की बात है तो ऐसा लगता है कि केंद्रीय बजट के मानसिक क्षितिज से बिहारगायब है.
04 प्रतिशत शिक्षा व स्वास्थ्य पर उपकर
सरकार ने तीन प्रतिशत शिक्षा उपकर की मौजूदा व्यवस्था के स्थान पर चार प्रतिशत स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर लगाने की घोषणा की है. यह उपकर व्यक्तिगत आयकर और कंपनी कर पर लगाया जाता है. सरकार को इससे 11,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा. सरकार का कहना है कि यह राशि गरीब और ग्रामीण परिवारों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च की जायेगी.
शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर
प्ले स्कूल से 12वीं कक्षा तक के लिए एक ही नियम होगा.
शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अगले चार वर्ष में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा.
प्राइम मिनिस्टर्स रिसर्च फेलोज के तहत हर साल 1000 बीटेक छात्रों का चयन. उन्हें फेलोशिप के साथ आइआइटी एवं आइआइएससी में पीएचडी की सुविधा.
2022 तक एसटी की 50 % आबादी और 20,000 आदिवासी वाले प्रत्येक ब्लॉक में एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल खुलेंगे. यह नवोदय जैसा होगा.
ब्लैक बोर्ड से डिजिटल बोर्ड पर शिक्षा. शिक्षकों के लिए एकीकृत बीएड कोर्स.
नगर नियोजन एवं वास्तुशिल्प के दो नये स्कूल. 18 नये आइआइटी और एनआइआइटी भी खुलेंगे.
‘मुद्रा’ के लिए तीन लाख करोड़
वित्त मंत्री ने छोटे उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए मुद्रा योजना के तहत बांटे जाने वाले कर्ज का लक्ष्य बढ़ाकर तीन लाख करोड़ रुपये किया है. ये कर्ज गैर-कृषि गतिविधियों के लिए 10 लाख रुपये तक का कर्ज उपलब्ध कराता है. मार्च 2015 में शुरू हुई मुद्रा योजना के तहत अब तक 10.38 लाभार्थियों को 4.6 लाख करोड़ का कर्ज दिया गया है. लाभार्थियों में 76 प्रतिशत महिलाएं हैं.
7148 करोड़ दिये जायेंगे कपड़ा क्षेत्र के लिए, जिससे नये रोजगार सृजित होंगे.
50 लाख युवाओं को 2020 तक ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है.
5,750 करोड़ दिये जायेंगे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार मिशन के तहत
70 लाख युवाओं को इस साल रोजगार मुहैया कराया जायेगा.
3494 करोड़ रुपये सूक्ष्म लघु एवं मझोले उद्योगों को आवंटित.
मोदी सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत 10 करोड़ गरीब और कमजोर वर्ग के परिवारों के लिए हर साल पांच लाख रुपये तक की मेडिकल रिइम्बर्समेंट की घोषणा की है, जिससे करीब 50 करोड़ लोगों को लाभ होगा.
जगत प्रकाश नड्डा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री
गोल्ड पॉलिसी योजना
घर में पड़े सोने को बैंक में रखें और ब्याज पाएं
सरकार स्वर्ण मौद्रिकरण योजना को पुनर्गठित करेगी और बहुमूल्य धातु पर वृहद योजना लेकर आयेगी. इस योजना को पुनर्गठित करने से लोग बिना किसी बाधा के स्वर्ण जमा खाते खोल सकेंगे. सरकार देश में नियमन वाले स्वर्ण एक्सचेंजों के लिए उपभोक्ता अनुकूल और व्यापार दक्ष प्रणाली स्थापित करेगी. साथ ही एक वृहद स्वर्ण नीति बनायेगी. इस योजना के तहत उपभोक्ता घर में बेकार पड़े सोने को निश्चित अवधि के लिए बैंकों के पास जमा करा सकते हैं. इस पर उन्हें 2.25 से 2.50 प्रतिशत का ब्याज मिलता है.
505 करोड़ की बढ़ोतरी
अल्पसंख्यकों का होगा सामाजिक आर्थिक व शैक्षणिक सशक्तीकरण
सरकार ने 2018-19 के लिए केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के बजट में 505 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है. जेटली ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को 4700 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं, जो 2017-18 में 4195 करोड़ रुपये और 2016-17 में 3800 करोड़ थे. जेटली ने कहा कि इस पहल से अल्पसंख्यक तबकों के ‘सम्मान के साथ सामाजिक-आर्थिक-शैक्षणिक सशक्तीकरण’ में मदद मिलेगी.
एससी-एसटी पर फोकस
56,619 करोड़ रुपये से होगा अनुसूचित जाति का विकास
बजट में अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के कल्याण व विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अनुसूचित जातियों के लिए 279 कार्यक्रमों के लिए 56,619 करोड़ रुपये दिया जा रहा है, जो पिछले वर्ष 34,334 करोड़ रुपये था. वहीं, अनुसूचित जनजाति कल्याण के लिए 305 कार्यक्रमों के लिए 32,508 करोड़ रुपये आवंटित किये जायेंगे, जो पिछले वर्ष 21,811 करोड़ रुपये थे.
निराशा
उम्मीदें… जो पूरी
नहीं हो सकीं
शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता समेत हर क्षेत्र का ध्यान रखा गया, लेकिन मिडिल क्लास को कोई राहत नहीं मिली है. उलटे कई चीजों पर टैक्स बढ़ाकर जेब से पैसे निकालने का काम हुआ है.
बजट से नौकरी पेशा वाले लोगों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन सरकार ने कोई खास योजना की घोषणा नहीं की.
महिलाएं घरेलू चीजों के सस्ते होने की उम्मीद लगायी हुई थीं, लेकिन कस्टम ड्यूटी के महंगे हो जाने से टीवी, मोबाइल और इलेक्ट्राॅनिक्स सामान महंगे हो जायेंगे.
महिला सशक्तीकरण की बात की जाती है, लेकिन महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कोई खास योजना की घोषणा नहीं की गयी.
कमेंट
बजट में देश के गरीबों, गांव, किसानों, बुजुर्गों को ध्यान में रखकर बेहतरीन योजनाएं हैं, पीएम का अभिनंदन और वित्त मंत्री को बधाई.
आदित्यनाथ योगी, मुख्यमंत्री, यूपी
यह कहना कि मिडिल व सैलरीड क्लास के लिए बजट में कुछ नहीं है, सही नहीं है. स्टैंडर्ड डिडक्शन के तहत 40,000 हजार की छूट सैलरीड क्लास के लिए ही है.
हसमुख अधिया, वित्त सचिव, भारत सरकार
बजट में मजबूत सामाजिक क्षेत्र पर जोर दिया गया है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों को स्वास्थ्य व शिक्षा की सुविधाएं देना शामिल है. बुनियादी ढांचे पर भी ध्यान दिया गया है.
राधिका राव, इकोनॉमिस्ट, डीबीएस बैंक सिंगापुर
वित्त मंत्री को 10 करोड़ गरीब परिवारों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना, एमएसएमई के लिए कॉरपोरेट टैक्स में कमी, एससी/एसटी छात्रों के लिए एकलव्य विद्यालयों की बढ़ोतरी के लिए बधाई.
रजत शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार
फ्लैश बैक
1991-92 के बजट में शिक्षा व शिक्षक जैसे शब्दों का 19 बार इस्तेमाल हुआ. 2017-18 महज 10 बार.
1988-89 के पहले बजट भाषण में स्वास्थ्य जैसे शब्द नहीं थे, लेकिन 2005-06 में इसका 20 बार इस्तेमाल हुआ. 2017-18 में महज आठ बार.
2013-14 में महिला जैसे शब्द का 24 बार, 2017-18 में 12 बार और 2018-19 में 10 बार इस्तेमाल हुआ.
