हर मास की कृष्ण व शुक्ल पक्ष को मिलाकर दो एकादशियां आती हैं. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. कम लोग जानते हैं कि एकादशी एक देवी थी, जिनका जन्म भगवान विष्णु से हुआ था. एकादशी मार्गशीर्ष मास की कृष्ण एकादशी को प्रकट हुई थी, जिसके कारण इस एकादशी का नाम उत्पन्ना एकादशी पड़ा. इसी दिन से एकादशी व्रत शुरू हुआ था.
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत अधिक महत्व माना जाता है. जो व्रती एकादशी के उपवास को नहीं रखते हैं और इस उपवास को लगातार रखने का मन बना रहे हैं, तो उन्हें मार्गशीर्ष मास की कृष्ण एकादशी अर्थात् उत्पन्ना एकादशी से इसका आरंभ करना चाहिए, क्योंकि सर्वप्रथम हेमंत ऋतु में इसी एकादशी से इस व्रत का प्रारंभ हुआ माना जाता है. चूंकि हिंदू मान्यताओं के अनुसार तिथि सूर्योदय के पश्चात मानी जाती है, इसलिए एकादशी तिथि 13 व 14 नवंबर को रहेगी, लेकिन एकादशी का उपवास 14 नवंबर को ही रखा जायेगा व पारण 15 नवंबर को होगा. द्वादशी के दिन प्रात:काल ब्राह्मण या किसी गरीब को भोजन करवाकर उचित दान दक्षिणा देकर फिर अपने व्रत का पारण करना चाहिए. इस विधि से किया गया उपवास बहुत ही फलदायी होता है.
