रांची : रांची झारखंड की राजधानी व एक बी क्लास शहर है. इस नाते रांची विधानसभा क्षेत्र महत्वपूर्ण है. इसी शहर से सूबे की भी छवि बनती-बिगड़ती है, पर अफसोस, रांची शहर विकास व जन सुविधाओं के नाम पर देश के किसी भी दूसरे बी क्लास शहर से काफी पीछे है.
विजयवाड़ा शहर की आबादी व नगर निगम का क्षेत्र रांची के समतुल्य है, पर ईश्वर के दिये खुशगवार मौसम को छोड़ दें, तो इन दोनों शहर की तुलना करने पर रांची कहीं नहीं ठहरती. मोटे तौर पर रांची में मॉल, मार्केट व अपार्टमेंट जैसे निजी क्षेत्रों में काम हुए, जिससे शहर को एक अलग लुक मिला, पर सरकार अपने प्रयास में शहर को सजाने-संवारने व नागरिक सुविधाएं बहाल करने के मामले में अब तक सुस्त है. शहर में पार्क, खैल मैदान व दूसरी खुली जगह धीरे-धीरे खत्म हो रही है. नदी-तालाब को भर कर जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है. फुटपाथ व अन्य जगहों पर अतिक्रमण आम बात है.
वैसे तो शहर का हर चौक-चौराहों पर रोजाना जाम की स्थिति रहती है, पर रातू रोड चौक, किशोरी सिंह यादव चौक व कांटा टोली चौक जैसे चौराहों का ट्रैफिक सिस्टम सुधारने में सरकार नाकाम रही. हरमू बाई पास रोड व कांटा टोली-स्टेशन रोड सहित कुछ अन्य सड़कों को छोड़, शहर की अन्य सड़कें संकरी व जजर्र हैं. इनकी देखभाल व मरम्मत की स्थिति यह है कि छह माह-साल भर तक सड़कें टूटी रहती हैं. अभी बरियातू रोड की हालत कुछ ऐसी ही है.
राज्य बनने के 14 वर्षो बाद भी यहां न तो बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम बहाल हो पायी और न ही कूड़े-कचरे का निष्पादन हो पाया. मेडिकल व इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट ट्रीटमेंट की बात तो छोड़ दें, यहां घरेलू कूड़े-कचरे का वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट तक नहीं है. सड़क के अलावा रांची में पेयजल आपूर्ति सिस्टम व सिवरेज (नाली व गंदा पानी निकासी) सिस्टम भी बदतर है. कुल मिला कर यह वह शहर नहीं, जिसकी झारखंडियों व शहरवासियों को तमन्ना थी.