झारखंड नरसंहारः तीन लोग हिरासत में, दारोगा सस्पेंड

पश्चिमी सिंहभूम जिले में रविवार की रात हुई सात आदिवासियों की हत्या के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया है. लापरवाही के आरोप में गुदड़ी के थाना प्रभारी निलंबित कर दिए गए हैं. इस पूरे मामले की जाँच के लिए बनायी गई स्पेशल इन्वेस्टीगेटिव टीम (एसआइटी) में शामिल अफ़सरों ने अपनी […]

<p>पश्चिमी सिंहभूम जिले में रविवार की रात हुई सात आदिवासियों की हत्या के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया है. लापरवाही के आरोप में गुदड़ी के थाना प्रभारी निलंबित कर दिए गए हैं. </p><p>इस पूरे मामले की जाँच के लिए बनायी गई स्पेशल इन्वेस्टीगेटिव टीम (एसआइटी) में शामिल अफ़सरों ने अपनी जाँच शुरू कर दी है. </p><p>झारखंड पुलिस के प्रवक्ता और अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) मुरारी लाल मीणा ने बीबीसी को यह जानकारी दी. </p><p>उन्होंने कहा, &quot;अभी हम यह कह पाने की स्थिति में नहीं हैं कि यह घटना पत्थलगड़ी समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़प का नतीजा है या नहीं. प्राइमाफेसी हमें गाँव के दो गुटों के बीच के विवाद की बातें पता चली हैं. हमें कुछ इनपुट्स मिले हैं, जो इस केस के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं. पुलिस इसकी बारीकी से जांच कर रही है. किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचते ही हमलोग इसकी जानकारी फिर से साझा करेंगे.&quot; </p><p>एडीजी मीणा ने यह भी कहा, &quot;जो लोग हिरासत में लिए गए हैं, उनसे भी पूछताछ की जा रही है. इस मामले में एक से अधिक पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है.&quot; </p><p>वहीं पश्चिमी सिंहभूम के एसपी इंद्रजीत महथा ने बीबीसी को बताया कि 20 जनवरी को ग्रामीणों ने कुछ लोगों को अगवा कर जंगल ले जाने की जानकारी गुदड़ी के थाना प्रभारी अशोक कुमार को दी थी. इसके बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की और बड़े अधिकारियों को इसकी सूचना नहीं दी. ऐसे में उन्हें फ़िलहाल निलंबित कर दिया गया है. </p><p>एसपी ने बताया कि गाँव वालों ने कुछ और लोगों के ग़ायब होने की बात बतायी है. पुलिस उनकी तलाश कर रही है. </p><p><strong>क्या है मामला?</strong></p><p>ग़ौरतलब है कि खूँटी और पश्चिमी सिंहभूम जिलों की सीमा पर स्थित गुदड़ी थाना क्षेत्र के बुरुगुलिकेरा गाँव में रविवार दोपहर हुए विवाद के बाद सात ग्रामीणों का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई थी.</p><p>चाईबासा स्थित पुलिस के आला अफ़सरों को यह सूचना मंगलवार की शाम मिली. इसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया. बुधवार सुबह में इनकी लाशें पास के जंगल से बरामद की गईं. </p><p>सर्च अभियान में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि सबके सिर उनके धड़ से अलग थे. इन सबका गला रेत दिया गया था. लिहाज़ा, पुलिस को इनकी पहचान में काफ़ी वक़्त लगा. इसके बाद उनकी पहचान करायी गई. </p><p>मारे जाने वाले लोगों में बुरुगुलिकेरा के उप मुखिया जेम्स बूढ़ भी शामिल थे. मारे गए लोग 20 से 30 साल के हैं. पुलिस ने इनमें से कुछ के परिजनों को अपनी सुरक्षा में रखा है. इस घटना के बाद गाँव में तनाव है. वहाँ अतिरिक्त पुलिस और पारा मिलिट्री बल की तैनाती की गई है. </p><p><strong>क्या ग्राम सभा ने सुनायी थी मौत की सजा?</strong></p><p>इस मुद्दे पर गाँव के लोगों ने अपनी ज़ुबान बंद कर ली है. जितनी मुँह उतनी बातें चर्चा में हैं, लेकिन कोई चश्मदीद यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि इतने बड़े नरसंहार की क्या वजह थी. लोगों का कहना है कि जो भी हुआ है, सभी गाँव वालों की सहमति से हुआ है. </p><p>हालांकि एक ग्रामीण जोर्डन बूढ़ (बदला हुआ नाम) ने बीबीसी को बताया कि इसकी पृष्ठभूमि काफ़ी पहले से तैयार की जा चुकी थी. दरअसल, गाँव में सरकारी लाभ लेने या नहीं लेने के मुद्दे पर दो गुटों में विरोध था. पिछले साल पत्थलगड़ी अभियान के दौरान अधिकतर गाँव वालों ने अपने राशन और आधारकार्ड ग्राम प्रधान के पास जमा करा दिए थे. जिन लोगों ने तब अपने सरकारी दस्तावेज़ जमा नहीं कराए, उनसे इसे जमा कराने के लिए कहा जा रहा था. ताज़ा विवाद इसी मुद्दे पर हुआ. </p><p>बक़ौल जोर्डन, यह बात ग्रामसभा की जानकारी में थी लेकिन किसी ने पुलिस से इसकी शिकायत नहीं की. लोग मानते हैं कि उनकी स्वशासन व्यवस्था में पुलिस की कोई भूमिका नहीं है. वे पाँचवी अनुसूची के तहत आने वाले इलाके के निवासी हैं. यहां बाहरी लोगों का प्रवेश ग्रामसभा की इजाज़त के बग़ैर नहीं हो सकता.</p><p>जोर्डन बूढ़ ने बीबीसी से कहा, &quot;मारे गए लोगों ने बीते 16 जनवरी को गांव के कुछ घरों में तोड़फोड़ की थी. इसके बाद 19 जनवरी की ग्रामसभा में तोड़फोड़ करने वालों से जवाब तलब किया गया. उपमुखिया जेम्स बूढ़ ने उनका बचाव करने की कोशिश की. इस कारण विवाद बढ़ गया. तब ग्रामसभा ने तोड़फोड़ करने वाले सभी दोषियों को सजा देने का ऐलान किया. इसके बाद से वे ग़ायब हो गए. बाद में पुलिस ने उनकी लाशें बरामद की.&quot; </p><p><strong>आदिवासियों का गाँव बुरुगुलिकेरा</strong></p><p>पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुदड़ी प्रखंड के बुरुगुलिकेरा गाँव में क़रीब 100 घर हैं. यहाँ 500 लोगों की आबादी निवास करती है. इनमें से आदिवासियों की संख्या अधिक है. </p><p><strong>मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात की</strong></p><p>इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार की दोपहर बुरुगुलिकेरा गाँव जाकर हालात का जायज़ा लिया. उन्होंने मृतकों के परिजनों और गाँव वालों से बात की. पुलिस अधिकारियों से मामले की जानकारी ली. </p><p>उन्होंने बाद में मीडिया से कहा कि उनकी सरकार ऐसे मामलों को बर्दाश्त नहीं करेगी और दोषी बख्शे नहीं जाएँगे. </p><p>मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कल भी पुलिस के आला अफ़सरों की मीटिंग में एसआइटी गठित करने का निर्देश दिया था. उन्होंने पाँच दिन के भीतर इसकी जाँच कर रिपोर्ट देने को कहा है. </p><p>मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व आइपीएस अधिकारी अरुण उराँव ने बताया कि बीजेपी ने इस मामले की जाँच के लिए एक कमेटी बनायी है. उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार बनने के बाद अपराधियों और नक्सलियों का मनोबल बढ़ा है. </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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By Prabhat khabar digital desk

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