इंसान की मौत के बाद भी काम करता है स्पर्म: रिसर्च

Getty Images एक अध्ययन के दौरान मिले साक्ष्यों को आधार मानते हुए वैज्ञानिकों की एक टीम ने यह दावा किया है कि ‘इंसान की मौत के 48 घंटे बाद तक उसके शुक्राणु (स्पर्म) गर्भधारण के लिए इस्तेमाल किये जा सकते हैं और उससे स्वस्थ बच्चे पैदा हो सकते […]

<figure> <img alt="Sperm" src="https://c.files.bbci.co.uk/14D1/production/_110592350_add99d1c-4c52-4695-804c-1d6897c7b1b0.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>एक अध्ययन के दौरान मिले साक्ष्यों को आधार मानते हुए वैज्ञानिकों की एक टीम ने यह दावा किया है कि ‘इंसान की मौत के 48 घंटे बाद तक उसके शुक्राणु (स्पर्म) गर्भधारण के लिए इस्तेमाल किये जा सकते हैं और उससे स्वस्थ बच्चे पैदा हो सकते हैं’.</p><p>यह अध्ययन ‘जर्नल ऑफ़ मेडिकल एथिक्स’ में प्रकाशित हुआ है जिसमें दावा किया गया है कि ‘इंसान की मौत के बाद उसके शुक्राणुओं को स्पर्म बैंक में जमा भी किया जा सकता है’.</p><p>अध्ययनकर्ताओं ने लिखा है कि ‘इस विधि को ‘नैतिक रूप से’ स्वीकार कर लेना चाहिए ताकि स्पर्म बैंकों में जमा शुक्राणुओं की मात्रा को बढ़ाया जा सके’.</p><p>अध्ययन में कहा गया है कि ‘मरने के बाद पुरुषों से लिए गए शुक्राणु दान करने की अनुमति भी दी जानी चाहिए’.</p><p>इस अध्ययन को उन देशों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है जहाँ ‘स्पर्म डोनेशन’ से जुड़े क़ानून सख़्त होने के कारण स्पर्म बैंकों में शुक्राणुओं की मात्रा घटती जा रही है.</p><p>वैज्ञानिकों का कहना है कि मौत होने के 48 घंटे के भीतर दो तरीक़ों से शव के शुक्राणु निकाले जा सकते हैं जिनमें सर्जरी की मदद से शव के शुक्राणु निकालना शामिल है. बाद में इसे फ़्रिज में प्रिज़र्व करके रखा जा सकता है.</p><figure> <img alt="शुक्राणु" src="https://c.files.bbci.co.uk/62F1/production/_110592352_2385e176-3a9c-446c-b320-b2100dcf8537.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h3>कुछ ज़रूरी सवाल</h3><p>इस अध्ययन में ब्रिटेन की लेस्टर यूनिवर्सिटी के डॉक्टर नाथन हॉडसन और मैनचेस्टर स्थित एक सरकारी अस्पताल के डॉक्टर जोशुआ पार्कर यह तर्क देते हैं कि इस तरह से शुक्राणुओं को एकत्र करने की विधि को अंग दान के समान ही समझा जाना चाहिए.</p><p>वे कहते हैं, &quot;अगर यह नैतिक रूप से स्वीकार्य है कि कोई व्यक्ति बीमारियों से लड़ रहे किसी दूसरे शख़्स की पीड़ा दूर करने के लिए ‘जीवन-रक्षक प्रत्यारोपण’ करवाए और अपने अंगों को दान करे. तो इनफ़र्टिलिटी से लड़ रहे किसी परिवार की मदद करने के लिए वे क्यों इस तरह का डोनेशन नहीं कर सकते.&quot;</p><p>हालांकि दोनों ही मानते हैं कि इससे कुछ चिंताएं भी खड़ी होंगी, जैसे कि डोनर की सहमति का क्या होगा, परिवार की अनुमति कैसे ली जाएगी और शुक्राणुदाता की पहचान कैसे गुप्त रखी जाएगी?</p><p>इस बारे में बीबीसी ने शुक्राणु दान करने वाले कुछ लोगों से भी बात की.</p><p>लंदन में रहने वाले जेफ़री इन्गोल्ड नाम के एक स्पर्म डोनर ने कहा कि ‘उन्हें लगता है इससे और अधिक पुरुष स्पर्म डोनेशन के बारे में विचार करेंगे’.</p><p>वे कहते हैं कि ‘स्पर्म डोनेशन को अगर अंग दान करने की तरह समझा जाने लगे तो इसमें कुछ भी बुराई नहीं है’.</p><hr /> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/science-43137363?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">स्पर्म असरदार रखना है तो ये काम बंद करें</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/science-45167756?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">दूसरों के स्पर्म से मां क्यों बन रही हैं महिलाएं? </a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-45838499?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">#HisChoice: ‘हां, मैं स्पर्म बेचता हूं पर यह कोई गुनाह नहीं'</a></li> </ul><figure> <img alt="जेफ़री इन्गोल्ड" src="https://c.files.bbci.co.uk/B111/production/_110592354_559b6b14-0c8b-4d0f-8981-20dd7c5ee2d4.jpg" height="949" width="976" /> <footer>BBC</footer> <figcaption>जेफ़री इन्गोल्ड</figcaption> </figure><h3>’रूढ़िवादी विचारों को चुनौती'</h3><p>जेफ़री कहते हैं कि ‘शुक्राणु दान करते हुए उन्होंने कभी नहीं सोचा कि उनका मक़सद अपने वंशाणुओं को फ़ैलाना है, बल्कि वे हमेशा यह सोचते हैं कि इससे किसी ना किसी परिवार की मदद होगी’.</p><p>एक अन्य स्पर्म डोनर ने अपनी पहचान गुप्त रखते हुए कहा कि ‘मुझे लगता है कि इस तरह की प्रक्रिया शुरू होने से स्पर्म डोनेशन से जुड़े कलंकों को चुनौती मिलेगी. लोगों को पूर्वधारणा वाले विचार बदलेंगे’.</p><p>वे कहते हैं कि ‘अगर लोगों को इसके बारे में ज़्यादा जानकारी होगी, लोग इसपर खुलकर बात करेंगे, तो वे इस बारे में ज़्यादा बेहतर फ़ैसले कर पाएंगे. मुझे लगता है कि इससे स्पर्म दान करने वालों की संख्या बढ़ेगी’.</p><p>लेकिन शेफ़ील्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर एलन पेसी कहते हैं कि मृत्यु के बाद शुक्राणु लेने की प्रक्रिया स्पर्म डोनेशन की दुनिया में एक क़दम पीछे हटने जैसी बात होगी.</p><p>वे कहते हैं, &quot;हमें अपनी ताक़त नौजवान, ऊर्जावान, स्वस्थ और स्वेच्छा से शुक्राणु दान करने वाले लोगों को ढूंढने में लगानी चाहिए.&quot;</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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By Prabhat khabar digital desk

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