यूपी सरकार के कार्यक्रम में ‘कव्वाली नहीं चलेगी’ कहकर म्यूज़िक बंद कराया गया

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में कथक नृत्यांगना मंजरी चतुर्वेदी को इसलिए नृत्य करने से रोक दिया गया क्योंकि वो एक कव्वाली की धुन पर यह नृत्य कर रही थीं. हालांकि उससे पहले उन्होंने उसी मंच पर दो अन्य कार्यक्रम पेश किए थे.मंजरी चतुर्वेदी लखनऊ में आयोजित सातवें कॉमनवेल्थ […]

<p>उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में कथक नृत्यांगना मंजरी चतुर्वेदी को इसलिए नृत्य करने से रोक दिया गया क्योंकि वो एक कव्वाली की धुन पर यह नृत्य कर रही थीं. हालांकि उससे पहले उन्होंने उसी मंच पर दो अन्य कार्यक्रम पेश किए थे.</p><p>मंजरी चतुर्वेदी लखनऊ में आयोजित सातवें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन इंडिया रीजन कॉन्फ्रेंस के सांस्कृतिक कार्यक्रम में परफ़ॉर्म करने दिल्ली से आईं थीं. कार्यक्रम का आयोजन यूपी विधानसभा अध्यक्ष की ओर से दिए गए रात्रिभोज के मौक़े पर किया गया था. </p><p>गुरुवार रात को यह कार्यक्रम हो रहा था और इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई मंत्रियों और अधिकारियों को आना था. मंजरी चतुर्वेदी जिस वक़्त कार्यक्रम पेश कर रही थीं, उस वक़्त विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित भी वहां मौजूद थे.</p><p>बीबीसी से बातचीत में मंजरी चतुर्वेदी बताती हैं, &quot;मुझे 45 मिनट का समय दिया गया था और मेरे कार्यक्रम का नाम था रंग-ए-इश्क़. राधा-कृष्ण पर आधारित एक नृत्य और गौहरजान की कहानी पेश करने के बाद एक कव्वाली पर मैं परफ़ॉर्म कर रही थी. कव्वाली शुरू ही हुई थी कि म्यूज़िक अचानक बंद कर दिया गया. मैं स्टेज पर खड़ी हो गई और कुछ समझ पाती तभी स्टेज पर खड़े कुछ अधिकारियों ने बोलना शुरू कर दिया कि यहां कव्वाली नहीं चलेगी. ये सरकारी कार्यक्रम है.&quot;</p><figure> <img alt="यूपी विधानसभा" src="https://c.files.bbci.co.uk/8EF3/production/_110559563_yogiaditynath.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>मंजरी कहती हैं कि यह सुनने के बाद वह चुप नहीं रहीं और अपनी पीड़ा और शिकायत मंच से ही दर्ज कराया. वो कहती हैं, &quot;मैंने मंच से ही कहा कि मैं 25 वर्षों से कार्यक्रम दे रही हूं और अब तक 35 देशों में मेरे कार्यक्रम हो चुके हैं लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ. मैं गंगा जमुनी तहजीब की बात करती हूं. इश्क, प्यार और मोहब्बत की बात करती हूं.&quot; </p><p>&quot;आप यहां रोक देंगे तो कोई बात नहीं. मैं कहीं और करूंगी. पर मैं ये बात करूंगी ज़रूर. इसके बाद मैं नमस्ते करके चली आई. इसके आगे न तो मैंने कुछ बोला और न ही किसी ने मुझे रोकने की कोशिश की. अगले दिन मैं हैदराबाद प्रोग्राम देने चली आई.&quot;</p><p>मंजरी चतुर्वेदी का कहना था कि उनका कार्यक्रम और उसके तहत उन्हें क्या परफ़ॉर्म करना है, ये सब पहले से तय था. यह सारी बातें उस आमंत्रण पत्र में भी लिखी थीं जो लोगों को बाँटी गई थीं. </p><p><strong>समय की कमी </strong><strong>का हवाला</strong></p><p>बावजूद इसके, ऐन मौक़े पर कव्वाली गायन पर नृत्य पेश करते वक़्त उन्हें रोक दिया गया. मंजरी चतुर्वेदी ने अपनी यह पीड़ा फ़ेसबुक पर भी जताई और लिखा कि उन्हें इस बात से तकलीफ़ हो रही है कि ऐसा उनके गृहनगर में किया गया.</p><p>कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति मंत्रालय की ओर से किया गया था. संस्कृति मंत्रालय के अधिकारी इस मुद्दे पर आधिकारिक तौर से कुछ भी कहने से बच रहे हैं लेकिन मीडिया में छपी ख़बरों के मुताबिक, मंजरी चतुर्वेदी को कव्वाली की वजह से नहीं बल्कि समय की कमी के चलते रोका गया. एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, &quot;बारिश की वजह से वैसे ही सारे कार्यक्रम छोटे करने पड़े थे, ऐसे में उन्हें भी कम समय दिया गया. समय ज़्यादा हो रहा था और कुछेक कलाकारों के कार्यक्रम अभी बचे थे, इसलिए उन्हें रोक दिया गया.&quot;</p><p>मंजरी चतुर्वेदी मशहूर सूफ़ी-कथक नृत्यांगना हैं और देश-विदेश में कई जगह कथक की प्रस्तुति दे चुकी हैं. उनका कहना है कि जिस कव्वाली पर उनकी प्रस्तुति को रोका गया, उसमें किसी प्रकार का धार्मिक तत्व भी नहीं था. उनके मुताबिक, ये कव्वाली ‘ऐसा बनना सँवरना मुबारक तुझे’ एक नायिका के श्रृंगार की कहानी है और बहुत ही मशहूर कव्वाली है.</p><p>मंजरी चतुर्वेदी कहती हैं कि उन्हें उस वक़्त तो किसी ने रोका नहीं लेकिन बाद में उनके पास संस्कृति विभाग की ओर से फ़ोन आया कि एक हफ़्ते बाद होने वाले यूपी महोत्सव कार्यक्रम में आपको बुलाया जाएगा. हालांकि संस्कृति मंत्रालय की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है कि उन्हें यूपी महोत्सव कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है या नहीं.</p><p>वहीं दूसरी, ओर इस मामले में विधानसभा सचिवालय और संस्कृति मंत्रालय के बीच द्वंद्व भी देखने को मिला. संस्कृति मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना था, &quot;किसी भी कलाकार को बुलाना या न बुलाना या फिर वो कौन सा कार्यक्रम करेंगे, जैसी बातें आयोजक पर निर्भर करती हैं और आयोजन विधानसभा सचिवालय की ओर से किया गया था. संस्कृति मंत्रालय की भूमिका सिर्फ़ मदद करने की थी.&quot;</p><p>लेकिन विधानसभा सचिवालय की ओर से इस मामले में किसी भी तरह की कोई टिप्पणी नहीं की गई है.</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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By Prabhat khabar digital desk

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