ट्रेड यूनियनों का दावा- हड़ताल में शामिल होंगे 25 करोड़ लोग

Getty Images केंद्र सरकार की ‘श्रमिक विरोधी नीतियों’ के खिलाफ़ बुधवार (8 जनवरी) को देशव्यापी हड़ताल की अपील करने वाली मजदूर यूनियनों ने दावा किया है कि हड़ताल में करीब 25 करोड़ लोग हिस्सा लेंगे.ट्रेड यूनियनों ने बीते गुरुवार को केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार से मुलाकात की […]

<figure> <img alt="प्रदर्शन" src="https://c.files.bbci.co.uk/12D2D/production/_110410177_54e912d5-f8e4-4a14-a0a4-a0d8641c6885.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>केंद्र सरकार की ‘श्रमिक विरोधी नीतियों’ के खिलाफ़ बुधवार (8 जनवरी) को देशव्यापी हड़ताल की अपील करने वाली मजदूर यूनियनों ने दावा किया है कि हड़ताल में करीब 25 करोड़ लोग हिस्सा लेंगे.</p><p>ट्रेड यूनियनों ने बीते गुरुवार को केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार से मुलाकात की थी. ट्रेड यूनियनों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री गंगवार ने यूनियन प्रतिनिधियों को बताया था कि सरकार श्रमिकों की भलाई के लिए सभी कदम उठा रही है और लेबर कोड से जुड़ा क़ानून भी इसका हिस्सा है. </p><p>लेकिन, इसके बाद 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने एक संयुक्त बयान जारी बताया था कि गंगवार ने उनकी ’14 सूत्रीय मांगों में से किसी के समाधान का भरोसा नहीं दिया.’ </p><figure> <img alt="प्रदर्शन" src="https://c.files.bbci.co.uk/17B4D/production/_110410179_d5dedc4d-e074-4cb3-9d74-585b75e873dc.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h3>क्या हैं मांगें</h3><p>संयुक्त बयान के मुताबिक ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगों में बेरोजगारी, न्यूनतम मजदूरी तय करना और सामाजिक सुरक्षा तय करना शामिल हैं. यूनियनें सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी 21 हज़ार रुपये प्रति महीने तय करने की मांग कर रही हैं. </p><p>ट्रेड यूनियनें नए इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड बिल को ‘मालिकों के पक्ष में और मजदूरों के ख़िलाफ़’ बता रही हैं. </p><p>भारतीय ट्रेड यूनियनों की फ़ेडरेशन सीटू के महासचिव तपन सेन ने <strong>बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद</strong> से बातचीत में केंद्र सरकार पर श्रमिक विरोधी होने का आरोप लगाया. </p><p>उन्होंने कहा, &quot;यह सरकार श्रमिकों को बंधुआ मज़दूर बनाना चाहती है, यह उद्योगपतियों की सरकार है और यह खुलकर ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस के नाम पर ऐसा कर रही है.&quot;</p><p>तपन सेन ने आगे कहा, &quot;सरकार कामयाब क्या होगी. फ़ैक्ट्रियां भी तो चलानी हैं. सारी ट्रेड यूनियन 8 जनवरी को हड़ताल पर जा रही हैं. तब आपको हमारी ताक़त का अंदाज़ा होगा.&quot;</p><figure> <img alt="नरेंद्र मोदी" src="https://c.files.bbci.co.uk/46B5/production/_110410181_fede2bb2-8882-4354-8943-cac4b180831a.jpg" height="549" width="976" /> <footer>EPA</footer> </figure><h3>भारतीय मजदूर संघ शामिल नहीं</h3><p>आरएसएस से जुड़ा भारतीय मज़दूर संघ बुधवार की हड़ताल में हिस्सा नहीं लेगा. </p><p>संघ के नेता विरजेश उपाध्याय ने कहा, &quot;ये कांग्रेस और वामपंथी दलों की एक राजनीतिक हड़ताल है.&quot; </p><p>वहीं, अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के सी.एच वेंकटचलम के अनुसार, &quot;केंद्र सरकार पूंजीपतियों के साथ है जिनका मक़सद बेईमानी करना है.&quot; </p><p>ट्रेड यूनियन नेताओं के मुताबिक बुधवार की हड़ताल में सरकारी कर्मचारी, बैंक और बीमा क्षेत्र के कर्मचारी शामिल रहेंगे. उन्होंने सिविल सोसाइटीज़ से भी समर्थन मांगा है. </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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