प.बंगाल: तल्ख होते सरकार और राज्यपाल के रिश्ते

<p>पश्चिम बंगाल के राजभवन और सचिवालय में यूं तो काफी दूरी है. राजभवन जहां कोलकाता के बीचोंबीच धर्मतल्ला इलाके में है, वहीं राज्य सचिवालय नवान्न हुगली पार हावड़ा जिले में. लेकिन बीते लगभग दो महीने से कानून-व्यवस्था और हिंसा के मुद्दे पर दोनों आमने-सामने हैं.</p><p>राज्यपाल जगदीप धनकड़ को कार्यभार संभाले अभी दो महीने से कुछ […]

<p>पश्चिम बंगाल के राजभवन और सचिवालय में यूं तो काफी दूरी है. राजभवन जहां कोलकाता के बीचोंबीच धर्मतल्ला इलाके में है, वहीं राज्य सचिवालय नवान्न हुगली पार हावड़ा जिले में. लेकिन बीते लगभग दो महीने से कानून-व्यवस्था और हिंसा के मुद्दे पर दोनों आमने-सामने हैं.</p><p>राज्यपाल जगदीप धनकड़ को कार्यभार संभाले अभी दो महीने से कुछ ही ज्यादा समय हुआ है, लेकिन अब तक राज्य सरकार से विभिन्न मुद्दों पर कई बार उनका टकराव हो चुका है. फिर वह चाहे कानून और व्यवस्था पर उनकी टिप्पणी का मामला हो या फिर जादवपुर विश्वविद्यालय में केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को साथ मारपीट का. अब ताजा मामले में मुर्शिदाबाद जिले के तिहरे हत्याकांड पर राजभवन और सरकार एक बार फिर टकराव की मुद्रा में हैं.</p><p>तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और संसदीय कार्यमंत्री पार्थ चटर्जी कई बार धनकड़ पर संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करने का आरोप लगा चुके हैं. धनकड़ ने भी उनके आरोपों पर पलटवार करते हुए अपनी टिप्पणियों को सही ठहराया है.</p><p>कानून और व्यवस्था के मुद्दे पर राज्यपाल जगदीप धनकड़ और तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई वाली ममता बनर्जी सरकार के बीच टकराव लगातार तेज हो रहा है. वैसे पिछले राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी के कार्यकाल के आखिरी दिनों में सरकार के साथ उनके रिश्ते काफी तल्ख हो गए थे.</p><p>हालांकि नए राज्यपाल के साथ तो उनके शपथ लेने के महीने भर बाद से ही टकराव शुरू हो गया है. उन्होंने 30 जुलाई को राज्यपाल के तौर पर शपथ ली थी. उस शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल के बीच काफी सद्भाव नजर आया था. </p><p>वही पहला और अब तक का आखिरी मौका था जब वे साथ नजर आए थे. उसके बाद वे दोनों एक साथ सार्वजनिक मंच पर नजर नहीं आए हैं. यह जरूर है कि उन्होंने एक-दूसरे के खिलाफ अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है.</p><p><strong>टकराव की शुरुआत</strong></p><p>राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव की शुरुआत बीते महीने के पहले सप्ताह में हुई. उस समय पुलिस के साथ झड़प में उत्तर 24-परगना जिले के बैरकपुर में बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह के घायल होने के बाद दिल्ली दौरे पर गए राज्यपाल बीच में ही लौट आए थे.</p><p>अस्पताल में सांसद से मुलाकात के बाद पहली बार उन्होंने राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाया था.</p><p>धनकड़ ने कहा था, &quot;यह (सांसद पर हमला) एक गंभीर घटना है. पश्चिम बंगाल को शांत माहौल की जरूरत है, हिंसा की नहीं. राज्य को विकास की राह पर चलना चाहिए.&quot; </p><p>उन्होंने कहा था कि हमारे पास एक ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जहां सब लोग बिना हिंसा के अनुशासित तरीके से काम करें. राज्यपाल ने अगले दिन राज्य के पुलिस महानिदेशक वीरेंद्र को राजभवन तलब कर उनसे राज्य में होने वाली हिंसा पर रिपोर्ट भी मांगी थी.</p><p>राज्यपाल की इस टिप्पणी पर तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत राय ने कहा था, &quot;मैं नहीं जानता कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा. लेकिन उनको राजनीतिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी.&quot;</p><p>उसके कुछ दिनों बाद ही राज्यपाल ने उत्तर बंगाल के दौरे की योजना बनाई. वहां सांसद से लेकर विधायक और पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की एक बैठक बुलाई. हालांकि तृणमूल कांग्रेस के मंत्री, सांसद और विधायक ने उस बैठक में हिस्सा नहीं लिया. </p><h1>आरोप-प्रत्यारोप</h1><p>इस दौरे पर सरकार और प्रशासन के कथित उदासीन रवैए के लिए राज्यपाल ने उनकी आलोचना करते हुए कहा था, &quot;यह बंगाल की संस्कृति के अनुकूल नहीं है. पहली बार दौरे पर आने वाले राज्यपाल का स्वागत इस तरह ठंडे तरीके से नहीं किया जाता.&quot; </p><p>धनकड़ का कहना था कि वह राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं और उनके पद का सम्मान किया जाना चाहिए.</p><p>उसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने राज्यपाल पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि वे सरकारी अधिकारियों के खिलाफ राजनीतिक बयान दे रहे हैं. </p><p>तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा था, &quot;राज्यपाल को बंगाल के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद उठाना चाहिए. संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति की बेवजह अति-सक्रियता और सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप उचित नहीं है.&quot;</p><p>हालांकि, जादवपुर विश्वविद्लाय में केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के वामपंथी छात्र संगठनों की ओर से घेराव और उसके बाद उनको बचाने के लिए राज्यपाल के मौके पर जाने के बाद यह टकराव चरम पर पहुंच गया.</p><p>तृणमूल कांग्रेस ने तब दावा किया था कि राज्यपाल पुलिस और सरकार को सूचित किए बिना ही विश्वविद्यालय चले गए थे. </p><p>लेकिन राजभवन से जारी बयान में कहा गया था कि राज्यपाल ने चांसलर के तौर पर वहां जाने का फैसला किया. राज्यपाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी कई बार बात की थी.</p><p>तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी ने दावा किया था कि ममता बनर्जी के मना करने के बावजूद राज्यपाल जादवपुर विश्वविद्यालय पहुंच गए. </p><h1>लक्ष्मण रेखा का हवाला</h1><p>चटर्जी ने उस समय भी राज्यपाल पर पक्षपात का आरोप लगाया था. लेकिन अगले दिन राजभवन की ओर से जारी एक बयान में पार्थ चटर्जी के आरोप का खंडन करते हुए कहा गया कि राज्यपाल ने जो भी किया, वह चांसलर के नाते संस्थान की गरिमा को बचाने के लिए किया.</p><p>इसके बाद हुगली जिले में दुर्गापूजा के दौरान एक पंडाल के उद्घाटन के मौके पर राज्यपाल ने किसी का नाम लिए बिना कहा, &quot;लोगों को लक्ष्मण रेखा पार किए बिना अपनी ड्यूटी करनी चाहिए. मैं कभी लक्ष्मणरेखा पार नहीं करूंगा. लेकिन आप सबको भी इसका ख्याल रखना चाहिए.&quot; </p><p>तृणमूल के स्थानीय सांसद कल्याण बनर्जी कहते हैं, &quot;राज्यपाल बीजेपी में रहे हैं. इसलिए उनको पहले बीजेपी के लोगों को इस मंत्र का पालन करने की सीख देनी चाहिए. वे हाल ही में बंगाल आए हैं और उन्हें राज्य के बारे में बहुत कम जानकारी है.&quot;</p><p>वैसे इससे पहले भी खासकर हिंसा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर पूर्व राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी के साथ सरकार का टकराव होता रहा था. त्रिपाठी के कार्यकाल के आखिरी दौर में तो यह चरम पर पहुंच गया था. </p><p>तत्कालीन राज्यपाल ने सरकार पर अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण का आरोप लगाते हुए कहा था कि इससे राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव का माहौल खराब हो रहा है. शायद यही वजह थी कि उनको विदा करने मुख्यमंत्री ममता नहीं पहुंची. केसरी नाथ ने ममता के नहीं आने पर दुख भी जताया था.</p><p>बीजेपी ने राज्यपाल की बयानों का समर्थन किया है. प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं, &quot;संवैधानिक प्रमुख के नाते राज्यपाल अपनी जिम्मेदारी का पालन कर रहे हैं, राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह ध्वस्त हो गई है. रोजाना बीजेपी के लोग मारे जा रहे हैं. ऐसे में राज्यपाल चुप नही रह सकते.&quot;</p><p>कांग्रेस व सीपीएम ने भी कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर राज्यपाल की टिप्पणियों को सही ठहराया है. सीपीएम नेता सुजन चक्रवर्ती कहते हैं, &quot;बंगाल की हालत किसी से छिपी नहीं है.&quot; </p><p>कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सोमेन मित्र आरोप लगाते हैं, &quot;तृणमूल कांग्रेस हिंसा के सहारे अपनी गद्दी बचाने का प्रयास कर रही है.&quot;</p><p>राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि कार्यकाल की शुरुआत से ही राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव ठीक नहीं है. लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी शायद धनकड़ के शुरुआती बयानों की वजह से पक्षपात का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ पूर्वाग्रहों से ग्रस्त हो चुकी है.</p><p>राजनीतिक विश्लेषक मईदुल इस्लाम कहते हैं, &quot;राज्य में अगले साल नगर निगम चुनाव और उसके बाद साल 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में राजभवन और राज्य सचिवालय के बीच होने वाले टकराव को रोकना जरूरी है. वरना माहौल और खराब होगा.&quot;</p><h3>यही भी पढ़ेंः</h3> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49947310?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">पश्चिम बंगाल: दुर्गा पूजा के सहारे अपनी राजनीति चमका रही हैं पार्टियां</a></li> </ul> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49888973?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">’सबके लिए एनआरसी’ ने बढ़ाई पश्चिम बंगाल की चिंता</a></li> </ul> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49843492?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">NRC : असम के बाद सियासी अखाड़ा बना पश्चिम बंगाल </a></li> </ul><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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