शिवसेना दस रुपये में सबको पौष्टिक खाना कैसे दे पाएगी?

<p>&quot;हम 10 रुपये में पौष्टिक आहार देने वाली सुविधाएं शुरू करेंगे और उसके लिए यही सही वक़्त है.&quot; ऐसे होर्डिंग्स शिवसेना ने पूरी मुंबई में लगाए हैं. </p><p>इससे पहले महाराष्ट्र राज्य में झुणका भाकर (महाराष्ट्र में खाया जाने वाला एक पौष्टिक आहार) वितरित किए जाने का प्रयोग किया जा चुका है. इसी तरह तमिलनाडु में […]

<p>&quot;हम 10 रुपये में पौष्टिक आहार देने वाली सुविधाएं शुरू करेंगे और उसके लिए यही सही वक़्त है.&quot; ऐसे होर्डिंग्स शिवसेना ने पूरी मुंबई में लगाए हैं. </p><p>इससे पहले महाराष्ट्र राज्य में झुणका भाकर (महाराष्ट्र में खाया जाने वाला एक पौष्टिक आहार) वितरित किए जाने का प्रयोग किया जा चुका है. इसी तरह तमिलनाडु में भी अम्मा कैंटीन का भी प्रयोग हो चुका है. </p><p>महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में क्या इस तरह की योजनाएं वोट दिलाने में मददगार साबित होती हैं? </p><p>पौष्टिक आहार देने वाली योजना किस तरह काम करेगी? यही जानने की कोशिश की बीबीसी मराठी की टीम ने.</p><p>इस विषय पर शिवसेना के प्रवक्ता अरविंद सावंत कहते हैं &quot;जिस तरह ‘झुणका भाकर केंद्र योजना’ थी उसी तरह दस रुपये में पौष्टिक आहार भी मिलेगा. लेकिन फ़िलहाल अभी यह सिर्फ़ एक प्रस्ताव भर है.&quot; </p><figure> <img alt="पौष्टिक थाली" src="https://c.files.bbci.co.uk/10656/production/_109185176_324afd58-d2a5-4cc4-9c9b-d98a916328d9.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>प्रतीकात्मक तस्वीर</figcaption> </figure><p>इस सुविधा के लिए मुंबई में जगह कैसे उपलब्ध होगी? इस सवाल के जवाब में वह कहते हैं ,&quot;जिस समय झुणका भाकर योजना लाई गई थी उस समय भी तो यही सवाल था. हम यह योजना भी ज़रूर लाएंगे.&quot;</p><p>इस योजना के लिए लागत की बात पूछने पर वो कहते हैं ,&quot;अभी इस सम्बन्ध में कुछ भी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता. एक बार सत्ता में आने के बाद ही इन सारी बातों को तय किया जाएगा.&quot;</p> <ul> <li><strong>ये भी पढ़ें</strong><strong>: </strong><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49945817?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">भारतीय नेताओं को क्यों रुलाता रहता है प्याज़?</a></li> </ul><figure> <img alt="शिव सेना" src="https://c.files.bbci.co.uk/26DE/production/_109205990_9b3c950e-2d88-43e9-86e7-9c66c21bf0ad.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p><strong>योजना </strong><strong>व्यावहारिक </strong><strong>है या नहीं</strong><strong>?</strong></p><p>अम्मा कैंटीन के विषय पर तमिलनाडु की पत्रकार संध्या रविशंकर कहती हैं &quot;अम्मा कैंटीन जैसी योजनाएं वोट पाने के लिए फ़ायदेमंद साबित होती हैं लेकिन सच्चाई तो यही है कि फ़िलहाल तमिलनाडु में 99 फ़ीसदी अम्मा कैंटीन बंद हो चुकी हैं.&quot;</p><p>वो कहती हैं &quot;एक रुपये में एक इडली और पांच रुपये में सांभर-चावल दिया जाता था. इसका आर्थिक बोझ सरकार पर आता है. यह स्थायी मॉडल होगा ऐसा सरकार का दावा था लेकिन ऐसा हुआ नहीं.&quot;</p><p>वरिष्ठ पत्रकार हेमंत देसाई कहते हैं &quot;वड़ा पाव के लिए भी 12 रुपये लगते हैं. फिर 10 रुपये में पौष्टिक आहार कहां से आएगा?&quot;</p> <ul> <li><strong>ये भी पढ़ें</strong><strong>: </strong><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49559771?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">यूपी में किस हाल में है मिड डे मील योजना?</a></li> </ul><h1>लोगों को खाना देना क्या सरकार का काम है? </h1><p>हेमंत देसाई कहते हैं &quot;ग़रीबों को भी अच्छा खाना मिलने का अधिकार है. बीजेपी हो या शिवसेना कोई भी ऐसी योजना लाता है तो उसका स्वागत होना चाहिए. पर उसके लिए जगह, पैसा कहां से आएगा?&quot;</p><p>मगर संध्या रविशंकर इससे एकदम अलग राय रखती हैं.</p><p>वह कहती हैं &quot;लोगों को खाना देना सरकार का काम नहीं है. पर खाना ख़रीदने के लिए अवसर देना मतलब रोज़गार देना और मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराना तो सरकार का ही काम है. सरकार कम पैसे में गेहूं-चावल तो दे ही रही है. तमिलनाडु में चावल मुफ़्त में दिया जा रहा है. लेकिन पौष्टिक आहार का ये वादा किया जाना पूरी तरह व्यावहारिक नहीं है.&quot;</p> <ul> <li><strong>ये भी पढ़ें</strong><strong>: </strong><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49609387?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">मिड डे मील योजना भारत के लिए क्यों ज़रूरी है </a></li> </ul><h1>लोकलुभावन राजनीति </h1><p>इस प्रकार की योजनाएं लोगों को आकर्षित करने के लिए हैं, ऐसा लोकमत समूह के संपादक दिनकर रायकर मानते हैं. </p><p>वो कहते हैं &quot;इस चुनाव में बीजेपी को ज़्यादा सीटें मिलेंगी, यह शिवसेना अच्छी तरह जानती है. पर सवाल यह उठता है कि ऐसे होर्डिंग्स लगाने से पहले शिवसेना ने बीजेपी से राय-मशविरा किया है या नहीं? क्योंकि सत्ता में आने के बाद बीजेपी और शिवसेना दोनों इसमें भागीदार होंगी.&quot;</p><figure> <img alt="पौष्टिक थाली" src="https://c.files.bbci.co.uk/E84C/production/_109186495_b339d8ae-85ec-44a4-9aa4-98126cc7e130.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p><strong>'</strong><strong>झुणका भाकर केंद्र</strong><strong>'</strong><strong> का क्या हुआ? </strong></p><p>साल 1995 में जब शिवसेना और बीजेपी संयुक्त रूप से सत्ता में आयी थीं तब ग़रीबों को पौष्टिक आहार और बेरोज़गारों को रोज़गार दिलाने के उद्देश्य से ‘झुणका भाकर केंद्र’ शुरू किया गया था. </p><p>इसके बाद जब कांग्रेस और राकांपा सत्ता में आई तो उन्होंने इस योजना को बंद कर दिया.</p><p>हेमंत देसाई इस योजना के बारे में कहते हैं &quot;झुणका भाकर केंद्र मनोहर जोशी सरकार के समय में शुरू हुए थे फिर वो बंद हो गए. जिस उद्देश्य के साथ इस योजना को शुरू किया गया था वो पूरी तरह पूरा नहीं हो सका.&quot;</p><p><strong>ये भी पढ़ें </strong><strong>:</strong></p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49738685?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">बीजेपी और शिव सेना, किसको किसकी कितनी ज़रूरत?</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49963349?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">महाराष्ट्र चुनावः शरद पवार की मांद में कैसे घुसी बीजेपी </a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49962629?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">बीजेपी के साथ शिवसेना का समझौता सत्ता के लिए: उद्धव ठाकरे</a></li> </ul><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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