इग्नाज सेमेल्विस: इस डॉक्टर ने दुनिया को पहली बार बताया था हाथ धोने की अहमियत

Getty Images सुनने में यह भले अजीब लगे लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना अच्छा नहीं माना जाता था. 19वीं शताब्दी के अस्पताल संक्रमण फैलाने के केंद्र हुआ करते थे. इन अस्पतालों में बीमार और मर रहे लोगों को […]

<figure> <img alt="इग्नाज सेमेल्विस" src="https://c.files.bbci.co.uk/ACCA/production/_108843244_gettyimages-486775835.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>सुनने में यह भले अजीब लगे लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना अच्छा नहीं माना जाता था. </p><p>19वीं शताब्दी के अस्पताल संक्रमण फैलाने के केंद्र हुआ करते थे. इन अस्पतालों में बीमार और मर रहे लोगों को महज साधारण सुविधाएं मिलती थीं. </p><p>उस दौर में घरों में इलाज कराना बेहतर विकल्प हुआ करता था. अस्पतालों में घरों में इलाज कराने की तुलना में तीन से पांच गुना ज्यादा मौतें हुआ करती थीं.</p><h1>मौत का घर</h1><p>अस्पताल पेशाब, उल्टियों और अन्य अपशिष्टों के दुर्गंध से भरे होते थे. यह दुर्गंध इतनी ज्यादा हुआ करती थी कि अस्पताल के स्टॉफ नाक पर रूमाल दबा कर चला करते थे. </p><p>डॉक्टर भी ना तो अपने हाथ धोते थे और ना ही अपने उपकरणों की सफाई किया करते थे. ऑपरेशन वाले कमरे और उसमें काम करने वाले सर्जन, एक समान गंदे हुआ करते थे. </p><p>इन सबकी वजह से, अस्पतालों को मौत का घर कहा जाने लगा था. उस जमाने में लोग रोगाणु के बारे में कुछ नहीं जानते थे, बावजूद इसके एक शख्स ने संक्रमण को रोकने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया था.</p><p>इग्नाज सेमेल्विस नामक हंगरी के एक डॉक्टर ने 1840 में वियना में हाथ धोने की व्यवस्था को लागू किया था, इसके चलते मैटरनिटी वार्ड में होने वाली मौतें कम हो गई थीं. </p><p>यह एक अहम कोशिश थी लेकिन कामयाब नहीं हो पाई थी, क्योंकि डॉक्टर के सहयोगियों ने ही उनका साथ नहीं दिया था. लेकिन तब तक इग्नाज की पहचान नवजात बच्चों को जन्म देने वाली मांओं को बचाने वाले डॉक्टर की बन चुकी थी. </p><figure> <img alt="पुराने जमाने के अस्पतालों को मौत का घर कहा जाता था" src="https://c.files.bbci.co.uk/5EAA/production/_108843242_cuadro-1.jpg" height="1207" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>रोगाणुओं की पहचान नहीं थी</h1><p>सेमेल्विस तब वियना जनरल हॉस्पीटल में काम करते थे. उस हॉस्पीटल में भी दूसरे हॉस्पीटलों की तरह नियमित रूप से मरीजों की मौत होती थी. </p><p>दुनिया को 19वीं शताब्दी में रोगाणुओं के बारे में पता नहीं था, तब डॉक्टर यह मानने को तैयार नहीं होते थे कि अस्पतालों की गंदगी की वजह से संक्रमण फैलता है. </p><p>न्यूयार्क यूनिवर्सिटी में हिस्ट्री ऑफ मेडिसीन के एक्सपर्ट बैरन एच. लर्नर ने बीबीसी को बताया, &quot;ऐसी दुनिया की कल्पना बेहद मुश्किल है जब हमलोग रोगाणु और बैक्टिरिया के अस्तित्व के बारे में कुछ भी नहीं जानते थे.&quot;</p><p>&quot;19वीं शताब्दी के मध्य में, माना जाता था कि बीमारियां जहरीले वाष्प से फैलती हैं, जिसमें हानिकारक कण मौजूद होते हैं.&quot;</p><figure> <img alt="संत जॉर्ज हॉस्पिटल लंदन" src="https://c.files.bbci.co.uk/379A/production/_108843241_hospital.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>सबसे बड़ा असंतुलन</h1><p>उस वक्त में नवजात बच्चों को जन्म देने वाली मांओं के संक्रमित होने का खतरा सबसे ज्यादा होता था, खासकर उन मांओं में जिनमें प्रसव के लिए चीरफाड़ करने की जरूरत होती थी. इसके चलते होने वाले जख्म, उन बैक्टिरियों के पसंदीदा ठिकाना हुआ करते थे जिन्हें डॉक्टर और सर्जन अपने साथ लेकर चलते थे. </p><p>सेमेल्विस ने सबसे पहले वियना जनरल हॉस्पीटल के समान सुविधाओं वाले दो प्रसूति केंद्रों में होने वाली मौतों के अंतर को नोटिस किया था.</p><p>एक केंद्र में देखभाल की जिम्मेदारी पुरुष मेडिकल छात्रों के हवाले थी जबकि दूसरे केंद्र की जिम्मेदारी दाईयों के हवाले थी. जिस केंद्र की जिम्मेदारी पुरुष मेडिकल छात्रों के पास थी वहां 1847 में प्रति 1000 जन्म में 98.4 मौतें हुआ करती थीं जबकि दूसरे प्रसूति केंद्र में यह 1000 जन्म में केवल 36.2 था. </p><p>इस अंसतुलन की वजह में यह कहा जाता था कि अपने मरीजों के साथ पुरुष मेडिकल छात्र कहीं ज्यादा रुखे ढंग से पेश आते थे.</p><figure> <img alt="इग्नाज सेमेल्विस" src="https://c.files.bbci.co.uk/D3DA/production/_108843245_cuadro-2.jpg" height="670" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>मौतों की वजह</h1><p>पुरुष मेडिकल छात्रों के रुखे ढंग से देखभाल करने के चलते माना जाता था कि महिलाओं में बुखार आ जाता है, यूटेरस में इंफेक्शन हो जाता है, इस वजह से ही अस्पताल में नवजात बच्चों को जन्म देने वाली मांओं में होने वाली मौतों के लगभग सभी मामले सामने आ रहे थे. </p><p>सेमेल्विस आधिकारिक स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुए थे. इसी साल, उनके एक सहयोगी की मौत भी हुई थी. एक पोस्टमार्टम करने के दौरान सहयोगी के हाथ में कट लग गया था, जिसके चलते उनकी मौत हो गई थी. इस हादसे से सेमेल्विस को कुछ समझने का संकेत मिला. </p><p>उस जमाने में शरीर के किसी हिस्से में कट लगाना, शारीरिक जोखिम के साथ जानलेवा भी होता था. </p><p>शरीर के किसी हिस्से को चाकू से काटना, चाहे कितना ही बारीक क्यों ना हो, हमेशा के लिए खतरनाक हो सकता था, चाहे वो शरीर विज्ञान का अनुभवी चिकित्सक ही क्यों ना हो. </p><p>उदाहरण के लिए चार्ल्स डार्विन के चाचा, जिनका नाम भी चार्ल्स डार्विन ही था, उनकी मौत 1778 में एक बच्चे के शरीर को चीर फाड़ करने के दौरान लगे जख्म के चलते हुई थी. </p><p>वियना में अपने सहकर्मी की मौत के बाद, सेमेल्विस ने यह नोटिस किया कि उनके सहकर्मी में भी वही लक्षण पाए गए, थे जो प्रसव के दौरान महिलाओं में आने वाले बुखार में देखा गया था. </p><p>इसके बाद उनके मन में यही सवाल उठा कि क्या शवों के साथ चीरफाड़ करने के दौरान संपर्क में आए शव के कणों को डॉक्टर प्रसूति कक्षों तक लेकर आते हैं? </p><p>सेमेल्विस ने देखा कि मेडिकल छात्र पोस्टमार्टम वाले कमरे से निकलकर सीधे प्रसूति केंद्रों में जाते रहते हैं. </p><p>उस वक्त में कोई भी डॉक्टर या कर्मचारी गलव्स नहीं पहनते थे, कोई दूसरा सुरक्षात्मक उपकरण नहीं था, ऐसे में शवों के साथ चीड़फाड़ करने के दौरान मेडिकल छात्रों के कपड़ों पर मांस के टुकड़े या फिर टिश्यू का चिपकना आम बात थी.</p><figure> <img alt="रोगाणु" src="https://c.files.bbci.co.uk/121FA/production/_108843247_germen.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>मौतों पर अंकुश </h1><p>दाईयों को शव के साथ परीक्षण के नहीं करना होता था. क्या यही वो रहस्य की कुंजी थी जो सेमेल्विस को सता रही थी? </p><p>तब रोगाणुओं के बारे में कोई समझ नहीं थी, ऐसे में अस्पतालों की गंदगी को दूर करने का रास्ता निकालना बेहद मुश्किल था. </p><p>प्रसूति चिकित्सिक जेम्स वाई सिम्पसन (1811-1870) पहले ऐसे फीजिशियन थे जिन्होंने मनुष्यों पर क्लोरोफॉर्म के बेहोश करने वाले गुणों का प्रयोग किया था. </p><p>उनका मानना था कि गंदगी के चलते फैलने वाले संक्रमण को अगर नियंत्रित नहीं किया जा सकता तो समय समय पर अस्पतालों को पूरी तरह से नष्ट करके नए सिरे से तैयार करना चाहिए. </p><p>19वीं सदी के सबसे मशहूर सर्जन और द साइंस एंड आर्ट ऑफ सर्जरी (1853) के लेखक जॉन इरिक इरिक्सन ने इससे सहमति जताते हुए लिखा था, &quot;एक बार जब अस्पताल पूरी तरह से दूषित रक्त वाले बैक्टिरियों से संक्रमित हो जाए तो उसे किसी तरह से भी स्वच्छ नहीं किया जा सकता. यह ठीक वैसी स्थिति होगी जैसी चींटियों के कब्जे वाली ढहती हुई दीवार को चींटियो से मुक्त कराना हो या फिर पुराने पनीर के टुकड़े में उत्पन्न कीड़ों से पनीर को स्वच्छ करना.&quot;</p><p>सेमेल्विस, ऐसे कठोर उपायों को आवश्यक नहीं मानते थे. हालांकि वे इस नतीजे तक पहुंच चुके थे कि शवों के संक्रमित कण ही प्रसूति वाली महिलाओं में बुखार की वजह हैं. उन्होंने अस्पताल में एक बेसिन लगवाया जहां क्लोरीन युक्त चूने का घोल रखा हुआ था. </p><p>शवों के चीरफाड़ वाले कमरे से प्रसूति कक्ष में जाने वाले डॉक्टरों के लिए यह ज़रूरी था कि वे इस घोल से खुद को साफ कर लें, हाथों को धो ले.</p><p>1848 में मेडिकल छात्रों की देखभाल वाले वॉर्ड में 1000 प्रसूति में मौतों की संख्या घटकर 12.7 रह गई थी. </p><figure> <img alt="इग्नाज सेमेल्विस" src="https://c.files.bbci.co.uk/9230/production/_109042473_examen.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>कोई सम्मान नहीं मिला</h1><p>बावजूद इसके सेमेल्विस अपने सहकर्मियों को यह नहीं समझा पाए कि प्रसूति के दौरान महिलाओं के बुखार का नाता शवों के चीरफाड़ के दौरान होने वाले दूषित संक्रमण से है. </p><p>अपने ही तरीकों की जांच करने वाले लोग कई बार चीज़ों को ठीक ढंग से पेश नहीं करते थे, जिसके चलते परिणाम उत्साहवर्धक नहीं होते. </p><p>बैरन एच लर्नर बताते हैं, &quot;ध्यान दीजिए कि वे क्या कह रहे थे- भले वे इन्हीं शब्दों में नहीं कह रहे हों लेकिन वे वे यही कह रहे थे कि मेडकिल छात्र प्रसूति के लिए आ रही महिलाओं की हत्या कर रहे हैं, इसे स्वीकार करना बेहद मुश्किल था.&quot;</p><p>वास्तव में प्रसूति केंद्रों में संक्रमण रोकने के लिए प्रतिरोधी साबुनों का इस्तेमाल 1880 के दशक में शुरू हो पाया था.</p><p>इस विषय पर सेमेल्विस ने एक किताब लिखी, जिसकी कई नकारात्मक समीक्षाओं के बाद वे अपने आलोचकों पर भड़क गए. उन्होंने हाथ नहीं धोने वाले डॉक्टरों को हत्यारे के रूप में रेखांकित करना शुरू किया.</p><p>इसके बाद वियना हॉस्पीटल में सेमेल्विस का अनुबंध नहीं बढ़ाया गया और उन्हें अपने देश हंगरी लौटना पड़ा. </p><p>हंगरी लौटने के बाद सेमेल्विस बुडापेस्ट के एक छोटे से अस्पताल में सेजेंट रोक्स हॉस्पीटल के प्रसूति वार्ड में अवैतिनक काम करने लगे. </p><p>इस अस्पताल और बुडापेस्ट यूनिवर्सिटी के मैटरनिटी क्लिनिक (जहां वे बाद में पढ़ाने लगे थे) में प्रसूति के दौरान महिलाओं के बुखार से ग्रसित होने की संख्या बहुत ज्यादा थी, लेकिन सेमेल्विस ने इसे अपने दम पर खत्म कर दिया. </p><figure> <img alt="इग्नाज सेमेल्विस" src="https://c.files.bbci.co.uk/1701A/production/_108843249_lavandose.jpg" height="507" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>लेकिन उनके सिद्धांत की आलोचना थमी नहीं और दूसरी ओर सहयोगी उनके तरीके को अपनाने को अनिच्छुक थे, इस बात को लेकर सेमेल्विस का गुस्सा भी बढ़ता जा रहा था. </p><p>1861 आते आते उनका व्यवहार बहुत अनिश्चित हो गया और चार साल बाद उन्हें पागलखाने में भर्ती कराने की नौबत आ गई. उनका एक सहयोगी उन्हें नए मेडिकल इंस्टीट्यूट दिखाने के बहाने वियना के पागलखाने ले गया.</p><p>जब सेमेल्विस को महसूस हुआ कि वे पागलखाने में हैं तो उन्होंने वहां से निकलने की कोशिश की. इस कोशिश में वहां के सुरक्षागार्डों ने उन्होंने बुरी तरीके से पीटा और इसके बाद उन्हें जंजीरों में जकड़कर अंधेरी कोठरी में डाल दिया गया.</p><figure> <img alt="इग्नाज सेमेल्विस" src="https://c.files.bbci.co.uk/523E/production/_108845012_el-placa.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>दो सप्ताह बाद, सेमेल्विस की मौत दाएं हाथ के जख्म में फैले संक्रमण से हो गई थी. वे महज 47 साल के थे. चिकित्सा विज्ञान में लुई पाश्चर, जोसेफ़ लिस्टर और रॉर्बट कोच जिस तरह का बदलाव लेकर आए उसमें सेमेल्विस कोई भूमिका नहीं निभा पाए. </p><p>हालांकि सेमेल्विस के योगदान की चर्चा अब होती है- हाल के दिनों में हाथों की सफाई को मान्यता मिली है और अस्पतालों में संक्रमण रोकने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका बन गया है हाथों को धोना, साफ सुथरा रखना.</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar digital desk

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >