बीएचयू में धरने पर बैठी छात्राएं, क्या है मामला

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में यौन उत्पीड़न के एक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर छात्राएं धरने पर बैठी हैं. छात्राओं ने बीएचयू में जंतुविज्ञान के प्रोफे़सर के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. छात्राओं की मांग है कि प्रोफे़सर को विश्वविद्यालय से निकाला जाए. इसके लिए छात्राएं शनिवार शाम 7 बजे से […]

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में यौन उत्पीड़न के एक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर छात्राएं धरने पर बैठी हैं.

छात्राओं ने बीएचयू में जंतुविज्ञान के प्रोफे़सर के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

छात्राओं की मांग है कि प्रोफे़सर को विश्वविद्यालय से निकाला जाए. इसके लिए छात्राएं शनिवार शाम 7 बजे से बीएचयू के गेट के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं.

ख़बर लिखे जाने तक ना तो बीएचयू प्रशासन और ना ही संबंधित प्रोफे़सर की कोई प्रतिक्रिया सामने आई है.

ये मामला अक्टूबर 2018 का है जब जंतुविभाग से एक शैक्षणिक टूर गया था और उसमें छात्राएं भी शामिल थीं. उस टूर के दौरान छात्राओं ने प्रोफेसर पर छेड़खानी करने और अश्लील टिप्पणी करने का आरोप लगाया था.

2011-12 में बीएचयू की छात्र परिषद के महासचिव रह चुके छात्र नेता विकास सिंह ने बीबीसी से कहा, ‘तब करीब 36 छात्राओं ने प्रोफे़सर पर टूर के दौरान यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था. उन्होंने कुलपति को पत्र लिखकर शिकायत की थी. तब ये मामला बीएचयू की 11 सदस्यीय आंतरिक शिकायत समिति के पास गया और प्रोफेसर को दोषी पाया गया. फिर मामला बीएचयू की एक्ज़िक्यूटिव काउंसिल के पास पहुंचा लेकिन वहां उन्हें सिर्फ़ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया. इस साल जून में काउंसिल ने प्रोफे़सर को बहाल करने का निर्णय लिया है.’

‘शिकायत के समय निलंबित किए गए प्रोफे़सर को अब वापस बहाल कर लिया गया है. जब छात्राओं ने साफ़ तौर पर अपनी शिकायत दर्ज कराई है और आईसीसी में प्रोफेसर को दोषी पाया गया है तो उन्हें सिर्फ़ चेतावनी देना तो काफ़ी नहीं है. छात्राओं की मांग है कि प्रोफेसर को विश्वविद्यालय से निकाला जाना चाहिए.’

विकास सिंह का ये भी कहना है कि शिकायतकर्ता छात्राओं के जाने के बाद ये फैसला लिया गया है. वो छात्राएं उस वक़्त आखिरी वर्ष में थीं और अब तक वो पढ़ाई पूरी करके विश्वविद्यालय से जा चुकी हैं.

छात्राएं रातभर धरने पर बैठी हैं और इसे आगे भी जारी रखने वाली हैं.

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