कश्मीर पर पाकिस्तान ने लिया था यह फ़ैसला पर मजबूरी में बदलना पड़ा

Getty Images जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी होने के बाद पाकिस्तान ने ग़ुस्से में भारत से सारे व्यापारिक रिश्ते तोड़ लिए थे लेकिन अब उसे एक मामले में अपने ही फ़ैसले को पलटना पड़ा. पाकिस्तान जीवन रक्षक दवाओं के लिए भारत का मुंह देख रहा है लेकिन […]

<figure> <img alt="इमरान ख़ान" src="https://c.files.bbci.co.uk/A674/production/_108621624_gettyimages-1077013004.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>जम्मू-कश्मीर से अन���च्छेद 370 निष्प्रभावी होने के बाद पाकिस्तान ने ग़ुस्से में भारत से सारे व्यापारिक रिश्ते तोड़ लिए थे लेकिन अब उसे एक मामले में अपने ही फ़ैसले को पलटना पड़ा. </p><p>पाकिस्तान जीवन रक्षक दवाओं के लिए भारत का मुंह देख रहा है लेकिन भारत इस पर क्या प्रतिक्रिया देगा, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है.</p><p>पाकिस्तान सरकार ने मंगलवार को भारत से आने वाली जीवन रक्षक दवाओं पर से प्रतिबंध ख़त्म कर दिया है. </p><p>कैंसर और दिल की बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों, एंटी-रेबीज़ और एंटीवेनिन ड्रग्स, हेपेटाइटिस और लिवर से जुड़ी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कमी को देखते हुए पाकिस्तान की सरकार ने यह फ़ैसला लिया है. </p><p>इसमें कई दूसरी महत्वपूर्ण दवाइयां भी शामिल हैं. </p><figure> <img alt="पाकिस्तान" src="https://c.files.bbci.co.uk/960C/production/_108621483_4fe7974a-7e7e-4a5b-a521-86e8298223b1.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>इसके अलावा पाकिस्तान अन्य दूसरी दवाइयों को बनाने के लिए आवश्यक रसायनिक तत्वों और पदार्थों की कमी से भी जूझ रहा है. </p><p>दरअसल, दवाओं के लिहाज़ से पाकिस्तान भारत पर बहुत हद तक निर्भर है. मूल दवाओं के अलावा पाकिस्तान दवा बनाने के लिए ज़रूरी चीज़ों का आयात भी भारत से ही करता है. </p><p>पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यात-आयात आदेश 2016 में बदलाव के लिए एक आदेश जारी किया है. मंत्रालय ने सरकार के अनुमोदन के बाद ही यह आदेश जारी किया है. </p><p>डॉक्टर, फ़ार्मासिस्ट और मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों ने सरकार के इस फ़ैसले की सराहना की है.</p><p>जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष राज्य के दर्जे के निरस्त होने के बाद से ही भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंध निलंबित हैं.</p><p>भारतीय उत्पादों पर व्यापारिक प्रतिबंध की वजह पाकिस्तान के बाज़ारों पर भी असर पड़ा है. ख़ासतौर पर दवा बाज़ार पर. </p><p>इसका अंदाज़ा ऐसे लगाया जा सकता है कि कि पिछले 16 महीनों में पाकिस्तान ने क़रीब 3.6 करोड़ डॉलर की एंटी-रेबीज़ और एंटी-वेनीन वैक्सीन भारत से आयात किया है. </p><figure> <img alt="पाकिस्तान" src="https://c.files.bbci.co.uk/E42C/production/_108621485_78251cd2-01bb-4a04-af9b-6ba2cedd5b2e.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>पाकिस्तान दवाइयां बनाने के लिए ज़रूरी कच्चे माल के लिए मुख्य रूप से भारत और चीन पर निर्भर है. </p><p>पाकिस्तान चैम्बर्स एंड कॉमर्स इंडस्ट्रीज के फ़ेडरेशन से जुड़े एक शख़्स बताते हैं कि दवाओं को बनाने के लिए ज़रूरी कच्चे माल का एक बड़ा हिस्सा भारत से आता है और यह आयात उस वक़्त से हो रहा है जबसे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दवाइयां बनाने की मान्यता मिली है. </p><p>पाकिस्तान की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित एक अधिकारी के मुताबिक़ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पाद, भारत से आयातित होने वाले उत्पादों की तुलना में दस गुना तक महंगे होते हैं. ऐसे में भारत पर निर्भरता बढ़ जाती है.</p><p>पाकिस्तान फ़ार्मास्यूटिकल मेन्युफैक्चरर एसोसिएशन के मुताबिक़ पाकिस्तान में बनाई जाने वाली दवाओं के लिए ज़रूरी चीज़ें और रसायनों का पचास फ़ीसदी भारत से आता है. </p><p>पाकिस्तान, भारत से 820 अलग-अलग रसायन मंगाता है. इनमें से 62 केमिकल ऐसे हैं जिनके लिए पाकिस्तान पूरी तरह से भारत पर निर्भर है. इसके अलावा 23 रसायन ऐसे हैं जो कि ज़िंदगी बचाने के लिए बनाई जाने वाली दवाओं में काम आते हैं.</p><p>एक ओर जहां पाकिस्तान ने इन दवाओं के व्यापार पर से प्रतिबंध हटा दिया है वहीं पाकिस्तान फ़ार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के चेयरमैन अमजद अली जावा का कहना है कि इस मसले के हल होने के लिए ज़रूरी है कि भारत भी इसके लिए तैयार हो. </p><p>उनका कहना है कि इसे मुकम्मल होने में वक़्त लग सकता है.</p><figure> <img alt="अमजद अली जावा" src="https://c.files.bbci.co.uk/1592/production/_108622550_2.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> <figcaption>अमजद अली जावा</figcaption> </figure><p>अमजद अली जावा कहते हैं, ”यह भी हो सकता है कि भारत दवाइयां देने से या फिर कच्चा माल देने से इनक़ार कर दे. यह भी हो सकता है कि इसकी प्रक्रिया में देर हो जाए. हो सकता है कि इसमें एक महीने तक का वक़्त लगे.” </p><p>हालांकि सरकार अपनी तरफ़ से हर संभव कोशिश कर रही है ताकि इस मुश्किल से निपटा जा सके.</p><figure> <img alt="अनीता मेंहदी" src="https://c.files.bbci.co.uk/63B2/production/_108622552_3.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> <figcaption>अनीता मेंहदी</figcaption> </figure><p>इसके अलावा पाकिस्तान फ़ार्मास्युटिकल कंपनी वेल्शायर से जुड़ी अनीता मेंहदी कहती है कि अगर यह समस्या जल्द से जल्द हल नहीं हुई तो दवाइयां बनाने वाली कई कंपनियां बंद हो सकती हैं. इसके अलावा मरीज़ों के लिहाज़ से भी इस मसले को जल्दी से जल्दी हल करना ज़रूरी है. </p><p>पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन के सेक्रेटरी जनरल डॉ. एसएम कैसर सज्जाद के मुताबिक़, दवाइयों के इस्तेमाल का एक बड़ा हिस्सा डॉक्टर की रिकमेंडशन पर निर्भर करता है. </p><figure> <img alt="डॉ. सज्जाद" src="https://c.files.bbci.co.uk/B1D2/production/_108622554_4.jpg" height="600" width="637" /> <footer>BBC</footer> <figcaption>डॉ. सज्जाद</figcaption> </figure><p>डॉ. सज्जाद कहते हैं कि कुछ दवाइयां सिर्फ़ भारत से आती हैं और उनकी उपलब्धता को लेकर सबसे अधिक चिंता है. उन्हीं में से एक दवा है ईथम विटॉल जो कि टीबी के मरीज़ों को दी जाती है. </p><p>पाकिस्तान इसका आयात सिर्फ़ भारत करता है और पाकिस्तान में इस समय टीबी के मरीज़ों की संख्या बहुत अधिक है और यह लगातार बढ़ भी रही है.</p><p>अगर भारत ने दवाओं के निर्यात से इनक़ार कर दिया तो?</p><p>इस सवाल के जवाब में डॉ. सज्जाद कहते हैं कि अगर ऐसा होता है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा. उनका मानना है कि हर चीज़ पर लगी पाबंदी को माना जा सकता है लेकिन दवा पर नहीं क्योंकि यह किसी की ज़िंदगी का सवाल है.</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर 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By Prabhat khabar digital desk

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