झारखंड: क्यों अशांत है रांची का माहौल?

झारखंड में मॉब लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ रांची में हुई एक सभा के बाद हिंसक झड़पें हुई हैं. इन झड़पों में कम से कम पांच लोग घायल हुए हैं. झारखंड पुलिस ने इसे लेकर शहर के अलग-अलग थानों में तीन रिपोर्ट दर्ज की है. इनमें से एक रिपोर्ट में शहर काजी कारी जान मोहम्मद […]

झारखंड में मॉब लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ रांची में हुई एक सभा के बाद हिंसक झड़पें हुई हैं. इन झड़पों में कम से कम पांच लोग घायल हुए हैं.

झारखंड पुलिस ने इसे लेकर शहर के अलग-अलग थानों में तीन रिपोर्ट दर्ज की है. इनमें से एक रिपोर्ट में शहर काजी कारी जान मोहम्मद मुस्तफी को भी नामजद किया गया है.

इनके अलावा 200 से भी अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ भी रिपोर्ट करायी गई है. हिंसा के फिर से भड़कने की आंशका के मद्देनजर संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस जवानों की तैनाती की गई है. पुलिस का दावा है कि स्थिति अब काबू में हैं.

पुलिस ने क्या बताया?

रांची के सिटी एसपी हरिलाल चौहान ने बीबीसी को बताया, "उपद्रवियों की पहचान के लिए उपलब्ध वीडियो फुटेज और तस्वीरों को देखा जा रहा है. हम लोग सारे तथ्यों की पड़ताल कर रहे हैं."

उन्होंने कहा, "मुत्ताहिदा मुस्लिम महाज की तरफ से आयोजित आक्रोश सभा में शामिल कुछ लोगों ने एक बस पर पथराव कर दिया. इसके बाद माहौल थोड़ा अशांत हुआ लेकिन पुलिस ने मौके पर पहुंच कर स्थिति को बिगड़ने बचा लिया. इसके बाद देर शाम 9.30 बजे एकरा मस्जिद के पास मुसलमानों के एक समूह ने ट्रैफिक जाम कर दिया. इस दौरान दो लोगों के साथ मारपीट की गई. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उनके बयान पर एक रिपोर्ट दर्ज की गई है."

क्यों आक्रोशित थे मुस्लिम?

दूसरी तरफ झारखंड तंजीम के अध्यक्ष शमशेर आलम ने मीडिया को बताया कि आक्रोश सभा के बाद घर लौट रहे मुसलमानों को देखकर बस में बैठे लोगों ने धार्मिक नारेबाजी शुरू कर दी.

इसके बाद आक्रोशित लोगों ने बस में तोड़फोड़ की. ‘इसकी सूचना मिलते ही हमलोग वहां पहुंचे और उन्हें शांत कराया.’

इससे पहले रांची एयरपोर्ट के पास फोटो खिंचाने गए तीन मुस्लिम युवकों ने अपने साथ गाली-गलौज मारपीट का आरोप लगाया था. इस संबंध में डोरंडा थाने में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक वहां हिंदुओं के एक समूह ने इन्हें ‘गालियां दीं और जय श्री राम के नारे भी लगवाए’. इस कथित मारपीट में सेंट्रल मोहर्रम कमेटी के महासचिव अकीर्लुर रहमान के पुत्र अरीब अहमद समेत तीन युवक घायल हो गए.

घायल युवकों ने बताया कि वहां 25-30 लोगों का समूह हिंसा पर उतारु था. उन लोगों ने लाठी-डंडे और पत्थरों से जानलेवा हमला किया.

आरोपों पर पुलिस ने उठाए सवाल

उन्होंने बताया, ‘हमें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा लेकिन एयरपोर्ट पर तैनात सीआइएसएफ जवानों के कारण हमारी जान बच सकी.’

हालांकि, सिटी एसपी हरिलाल चौहान ने इस घटना को संदेहास्पद बताया है. उन्होंने बताया कि दो हिंदू और एक मुस्लिम युवक वहां साथ गए थे. किसी बात पर तीनों के बीच मारपीट हुई और फिर सोशल मीडिया पर वायरल अफवाहों के कारण माहौल अशांत हो गया. उन्होंने बताया कि पुलिस ने वहां घायल युवकों के बयान पर भी एक रिपोर्ट दर्ज की है. उन आरोपों की जांच की जा रही है.

इधर, सेंट्रल मोहर्रम कमेटी के महासचिव अकीर्लुर रहमान ने बीबीसी को बताया कि इस घटना की सूचना मिलते ही वे डोरंडा थाना गए. वहां काफी लोगों की भीड़ जमा थी. फिर उनके बेटे और दूसरे घायल युवकों को अस्पताल ले जाया गया. वहां उनके बेटे ने बताया कि एयरपोर्ट के पास उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई थी.

बकौल अकीर्लुरहमान, "इसके बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगीं और इसके विरोध में एकरा मस्जिद के पास लोगों ने ट्रैफिक जाम कर दुकानें बंद करानी शुरू कर दी. इस दौरान हुई झड़पों में दो युवक घायल हो गए. हालांकि, पुलिस की मौजूदगी और उसी वक्त हुई बारिश के कारण माहौल और ज्यादा बिगड़ने से बचाया जा सका."

अफवाहों का दौर

उधर, एकरा मस्जिद के पास कथित तौर पर लोगों की भीड़ से पिटे विवेक कुमार ने पुलिस को बताया, "हमलोग अपनी दुकान बंद कर घर जा रहे थे. तभी मेरे साथी दीपक के फोन पर किसी का काल आया. तब वहां सड़क जाम कर रहे लोगों को लगा कि हमलोग उनकी वीडियो रिकार्डिंग कर रहे हैं. फिर वे लोग हमें बेरहमी से पीटने लगे. इस बीच मुझपर किसी ने चाकू से हमला कर दिया और दीपक का फोन छीन लिया. इस दौरान पुलिस वहा पहुंची और हमें भीड़ से बचाकर अस्पताल ले आयी."

पुलिस ने इस मामले की भी रिपोर्ट दर्ज की है.

झारखंड की भाजपा सरकार के मंत्री सी पी सिंह ने शनिवार को अस्पताल जाकर चाकूबाजी में घायल विवेक से मुलाकात की और कहा कि ऐसी बातें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी.

इसके बाद विभिन्न हिंदू संगठनों से जुड़े सैकडों लोगों ने कोतवाली थाना जाकर धरना भी दिया. इस बीच सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें सामने आ रही हैं. पुलिस ने लोगों से इन अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है.

उल्लेखनीय है कि झारखंड में पिछले तीन साल के दौरान मॉब लिंचिंग और भीड़ की हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं.

इनमें 18 लोग मारे जा चुके हैं. इसे लेकर सरकार और प्रशासन को लगातार कठघरे में खड़ा किया जाता है.

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