हौसले से हासिल किया मुकाम

शम्स ने बाढ़ में तैराकी सीखी है. वे कराटे में देश को पदक दिलाना चाहते थे, लेकिन पैर से नीचे के अंगों में हुआ लकवा, उनसे यह सपना छीन गया. लेकिन इस हादसे के बाद वे पूरे दमखम से आगे बढ़े और तैराकी को अपनी चाहत बना ली. विशेष सक्षम लोगों की तैराकी प्रतियोगिता में […]

शम्स ने बाढ़ में तैराकी सीखी है. वे कराटे में देश को पदक दिलाना चाहते थे, लेकिन पैर से नीचे के अंगों में हुआ लकवा, उनसे यह सपना छीन गया. लेकिन इस हादसे के बाद वे पूरे दमखम से आगे बढ़े और तैराकी को अपनी चाहत बना ली. विशेष सक्षम लोगों की तैराकी प्रतियोगिता में उनके नाम विश्व रिकॉर्ड दर्ज है.

बाढ़ में सीखी तैराकी : नेपाल की सीमा से लगते बिहार के मधुबनी जिले के राठोस गांव में जन्मे शम्स के गांव में अक्सर बाढ़ आती है. बिना किसी प्रशिक्षण के शम्स ने तैराकी सीख ली. मात्र छह वर्ष की उम्र में उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए मुंबई भेज दिया गया. यहीं से उन्होंने स्कूली शिक्षा और उसके बाद मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री पूरी की और एक कॉरपोरेट कंपनी में नौकरी करने लगे.
मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट : शम्स अपने दादाजी की पहलवानी की कहानी सुनकर बड़े हुए थे. मुंबई में रहते हुए उन्हें पहलवानी के लिए कोई ऐसी जगह दिखी नहीं, जहां वे प्रशिक्षण लेते. वे मार्शल आर्ट सीखने लगे. नौकरी के साथ 10 वर्षों के गहन प्रशिक्षण के बाद उन्होंने ब्लैक बेल्ट के साथ ही राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के चैंपियनशिप में 50 से अधिक पदक प्राप्त किये. वर्ष 2010 में भारत में एशियन गेम्स का ट्रायल हुआ, जिसमें शम्स ने रजत पदक जीता.
एशियन गेम्स में अभी कुछ महीने बचे थे. इस बीच उन्हें अपने बाएं पैर में सिहरन सी महसूस होने लगी. धीरे-धीरे यह असहनीय दर्द और जकड़न में बदल गया. न्यूरोलॉजिस्ट से दिखाने पर पता चला कि स्पाइन में ट्यूमर है. अॉपरेशन हुअा तो कमर के नीचे के अंगों को लकवा मार गया.
पुनर्वास केंद्र ने बदली जिंदगी : ऑपरेशन के बाद शम्स पुनर्वास केंद्र भेज दिये गये, जहां धीरे-धीरे उन्होंने शारीरिक और भावनात्मक मजबूती हासिल की. जिस तैराकी को शम्स वर्षों पूर्व पीछे छोड़ आये थे, पुनर्वास केंद्र में लोगों ने उसे फिर से शुरू करने की हिम्मत दी. डॉक्टरों ने भी कहा कि इससे नर्वस सिस्टम के पुनर्जीवित होने में मदद मिल सकती है. शम्स ने एक बार फिर तैराकी शुरू की. इससे उनका न सिर्फ आत्मविश्वास लौटा, बल्कि जिंदगी भी बदल गयी.
सितंबर, 2012 में उन्होंने राज्य तैराकी चैंपियनशिप में रजत और कांस्य पदक जीता. दिसंबर, 2012 में राष्ट्रीय स्तर की तैराकी प्रतियोगिता के 50 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में कांस्य पदक जीता. इसके बाद शम्स ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. वर्ष 2013 में उन्होंने अरब सागर में तैराकी की. इसके एक वर्ष बाद नेवी डे ओपन सी स्वीमिंग चैंपियनशिप के विशेष सक्षम लोगों की श्रेणी में भाग लिया और विश्व रिकॉर्ड के साथ यह प्रतियोगिता जीती.
इसके लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में उनका नाम भी दर्ज हुआ. वर्ष 2017 में गोवा के समुद्र में तैरते हुए उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा. वर्ष 2017 में ही वर्ल्ड पैरा-स्वीमिंग वर्ल्ड सीरीज में पहली बार भाग लिया और कांस्य पदक जीता. वर्ष 2018 में एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने क्वालिफाई किया और शीर्ष आठ में जगह बनाने में सफल रहे. इन दिनों शम्स 2020 में जापान में होनेवाले समर पैरालिंपिक्स और 2022 में एशियन पैरा गेम्स की तैयारी में जुटे हैं.
प्रस्तुति-आरती श्रीवास्तव

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