एएन 32 हेलिकॉप्टर हादसा: मेरा बेटा बहुत होशियार था, लेकिन किस्मत धोखा दे गई

BBC बीती 3 जून को एयरफ़ोर्स के लापता हुए जहाज़ एएन32 के 13 सदस्यों की मौत की पुष्टि एयरफ़ोर्स ने कर दी है. पंजाब के पटियाला ज़िले के छोटे से शहर समाणा के मोहित गर्ग भी उस जहाज़ में थे.मोहित समाणा के मध्यवर्गीय परिवार से सम्बंध […]

<figure> <img alt="एन32 मोहित गर्ग" src="https://c.files.bbci.co.uk/11A05/production/_107379127_20190614_105022.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p>बीती 3 जून को एयरफ़ोर्स के लापता हुए जहाज़ एएन32 के 13 सदस्यों की मौत की पुष्टि एयरफ़ोर्स ने कर दी है. पंजाब के पटियाला ज़िले के छोटे से शहर समाणा के मोहित गर्ग भी उस जहाज़ में थे.</p><p>मोहित समाणा के मध्यवर्गीय परिवार से सम्बंध रखते थे. उनका घर अग्रसेन मोहल्ले की मुख्य गली में है. जब हमारी टीम मोहित के घर पहुँची तो उसके घर पर अफ़सोस करने आये रिश्तेदारों और जान-पहचान के लोगों का ताँता लगा हुआ था.</p><p>घर के बाहर गली में शोक मनाने वाले लोगों के बीच मोहित के पिता सुरेंद्र पाल बैठे थे. </p><p>घटना का पता लगते ही मोहित के पिता चार जून को असम चले गए थे. वे शुक्रवार की सुबह ही असम से लौटे हैं. कई दिनों और रातों की थकान, तनाव और दुःख उनके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था.</p><figure> <img alt="एन32 मोहित गर्ग" src="https://c.files.bbci.co.uk/2FA5/production/_107379121_capture.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p>एएन32 के लापता होने की ख़बर परिवार को टीवी से मिली थी. मोहित के पिता बताते हैं, &quot;मेरे किसी दोस्त का फ़ोन आया कि असम में एक जहाज़ लापता हो गया. उसको पता था कि मेरा बेटा वहाँ तैनात है. वो कोई तीन बजे का वक़्त था. मैंने फ़ौरन अपनी बहू से फ़ोन पर बात की. उसे भी नहीं पता था कि मोहित उस जहाज़ में है.&quot;</p><p>&quot;उसने एयरफ़ोर्स के अधिकारियों से बात की तो उसे भी पता चला. मैं अपने भाई को साथ लेकर अगली सुबह वहाँ पहुँच गया. वहाँ पर अधिकारियों ने हमारा बहुत ध्यान रखा और जहाज़ की तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ी.&quot;</p><h1>किस्मत धोखा दे गई</h1><p>मोहित के पिता बताते हैं, &quot;मुझे एयरफ़ोर्स के अधिकारियों ने बताया कि एक ग़लती के कारण वे दूसरी घाटी में दाख़िल हो गए. उस वक़्त जहाज़ आठ हज़ार फ़ुट की ऊँचाई पर उड़ रहा था. वापस मुड़ने का मौक़ा नहीं था. उन्होंने जहाज़ को ऊँचा उड़ाने की कोशिश की और साढ़े 12 हज़ार फ़ुट की ऊँचाई पर ले गए. अगर 20 सेकेंड और मिल जाते तो पहाड़ी की ऊँचाई पार कर जाते. पर वो आख़िरी ढाई सौ फ़ुट पार नहीं कर पाए. मेरा बेटा बहुत होशियार था. जहाज़ निकाल सकता था, लेकिन क़िस्मत धोखा दे गई.&quot;</p><figure> <img alt="एन32 मोहित गर्ग" src="https://c.files.bbci.co.uk/7DC5/production/_107379123_mohitgarg-3.jpg" height="360" width="640" /> <footer>BBC</footer> </figure><p>सुरेंद्र पाल जब ये बयान करते हैं तो अपने जज़्बात को मुश्किल से क़ाबू कर पाते हैं. उनके साथ बैठे एक सज्जन उनको हौसला देते हैं. थोड़ा रुकने के बाद वे बात शुरू करते हैं. </p><p>&quot;मेरा बेटा हिम्मत वाला था. वो अपनी मेहनत से एयरफ़ोर्स में भर्ती हुआ था. वो मेरी क़िस्मत था. वो मेरा नहीं, पूरे देश का बच्चा था और उसने देश के लिए जान दी है&quot;</p><p>ये बात करते-करते उनका गला भर जाता है. ऐसे लगता है कि वो अपनी पूरी ताक़त जोड़ कर बोलने की कोशिश कर रहे हैं.</p><p>मोहित की माँ दिल की मरीज़ हैं. मोहित के साथ हुए हादसे के बारे में उनको बीती शाम को ही बताया गया था. </p><figure> <img alt="एन32 मोहित गर्ग" src="https://c.files.bbci.co.uk/CBE5/production/_107379125_mohitgarg-1.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><p>मोहित के पिता बताते हैं, &quot;मैंने अपने बड़े बेटे को कल फ़ोन करके कहा था कि वो दो नज़दीकी रिश्तेदारों और डॉक्टर को साथ बैठा कर उनको बता दें कि मोहित का ऐक्सिडेंट हो गया है. आज ही उन्हें पूरी सच्चाई बताई गई है. वो बिस्तर पर लेटी हैं, पता नहीं इस बात को किस तरह बर्दाश्त करेंगी.&quot; </p><p>मोहित पीपीएस, नाभा स्कूल का विद्यार्थी था. इस स्कूल के बहुत सारे विद्यार्थी फ़ौज और पुलिस में भर्ती होते हैं. वहाँ से बारहवीं क्लास पास करने के बाद मोहित ने एनडीए का टेस्ट पास किया था. मोहित एयरफोर्स में फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात था. पिछले तीन सालों से असम के जोहराट में ड्यूटी निभा रहे थे. </p><p>मोहित के भाई अश्विनी गर्ग कई बार कोशिश करने के बाद भी अपना दुःख बयान नहीं कर पाए. वो हमारी टीम से बस इतना कहते हैं, &quot;मुझे क्या बोलना है! मेरे पापा ने सब बता तो दिया है. आठ तारीख़ को मोहित घर आने वाला था, लेकिन इससे पहले हादसे की ख़बर आ गयी.&quot;</p><p>मोहित के घर अफ़सोस करने वालों में डॉक्टर जितेन्द्र देव भी हैं. जितेन्द्र देव स्थानीय कॉलेज में प्रिंसिपल हैं. वे कहते हैं, &quot;मैं निजी तौर पर मोहित को नहीं जानता था, मैं सिर्फ़ इसलिए आया हूँ कि मोहित हमारे शहर समाणा का रहने वाला था. उसने देश के लिए अपनी जान क़ुर्बान की है. तो उन्हें श्रद्धांजलि देना तो बनता है.&quot;</p><p>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां <a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">क्लिक</a> कर सकते हैं. आप हमें <a href="https://www.facebook.com/BBCnewsHindi">फ़ेसबुक</a>, <a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a>, <a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a> और <a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</p>

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By Prabhat khabar digital desk

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