पटना :लोकसभा के अंतिम चरण का मतदान अब शेष रह गया है. इस बार राज्य की 40 सीटों पर जीत के लिए 628 दावेदार मैदान में हैं. चुनाव में ऐसे दावेदार भी हैं जो एक बूथ के मतदाताओं को ध्यान में रखकर भी कभी सेवा का काम नहीं किया. चुनाव आया तो ये सीधे मैदान में कूद पड़े. राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों को छोड़ दिया जाये तो मेज, टेबल से लेकर पानी का टैंक के सिंबल पर प्रत्याशी मैदान में हैं.
23 मई को चुनाव परिणाम आना है. सातवें चरण में सर्वाधिक 157 प्रत्याशी मैदान में हैं. एक लोकसभा क्षेत्र में औसतन 1800-1900 बूथ होते हैं. राष्ट्रीय व क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधि इन सभी बूथों पर चुनाव के पहले और चुनाव के बाद भी जनता के बीच दिखते हैं. वह उनके लिए काम करते हैं. सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद करते हैं. पर ऐसे प्रत्याशी जो सिर्फ चुनाव के समय ही मैदान में आते हैं, उनके सामाजिक कार्यों का लाभ एक बूथ की जनता भी नहीं पाती है. न प्रत्याशी की अपनी पहचान है और नहीं पार्टी की कोई पहचान.
इन्हें चुनाव चिह्न भी अजब-गजब तरीके के मिले हैं. पेन ड्राइव, सेव, टीवी रिमोट, कंप्यूटर, लूडो, टायर, सोफा, कैमरा, बेल्ट, हेलीकॉप्टर, पेंसिल बॉक्स, नेल कटर, पेट्रोल पंप, ऑटो रिक्शा, बांसुरी आदि. इस तरह के प्रत्याशियों को मतदान के दिन तो सभी बूथों के लिए पोलिंग एजेंट ढूंढ़ना भी मुश्किल होता है. लोकसभा चुनाव 2014 में कुल 607 प्रत्याशी इसी तरह से मैदान जीतने के लिए कूद पड़े थे. लेिकन, ऐसे उम्मीदवारों की कोशिश नाकाम रही और 512 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गयी थी.
