ब्रिटेन ने अपनी रोबोटिक रणनीति का खुलासा किया है जिसके कारण देश में खरबों पाउंड के उद्योग के विकसित होने की संभावना है.
इस योजना के तहत अमीरों को रोबोट के रूप में ड्राइवर, पोस्टल डिलीवरी, डॉक्टर, इंजीनीयर, गार्ड की सेवा प्रदान की जाएगी.
लेकिन फिर उन लोगों का क्या होगा जो इन पेशों से जुड़े हुए हैं. क्या नई तकनीक इन पेशेवरों को अपने कामों की गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगी या उनकी नौकरी छीन लेगी.
विशेषज्ञों में इसे लेकर विवाद है. कुछ मानते हैं कि इससे बेरोज़गारी बढेगी जबकि कुछ का मानना है कि यह क़दम समृद्धि को बढ़ाने वाला है.
रोबोट सुरक्षा गार्ड के मसले पर यूनिवर्सिटी ऑफ़ बर्मिंघम के वैज्ञानिकों का मानना है कि यह इंसान की मदद करेगा और उनकी क्षमता बढ़ाएगा.
रोबोट सुरक्षा गार्ड
यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बॉब नाम के एक ऐसे ही रोबोट सुरक्षा गार्ड को तैयार किया है.
लीजिए आ गया एक ‘दिलवाला’ रोबोटः जापान
वहीं ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डॉक्टर कार्ल फ्रे ने कंप्यटरीकृत लेबर के ऊपर अध्ययन किया है.
वह अपने अध्ययन में इसकी संभावना जताते है कि अमरीका की 47 फ़ीसदी नौकरियां स्वचालित तकनीक की वजह से ख़तरे में है.
हालांकि अमरीका स्थित इनफॉरमेशन टेक्नॉलॉजी और इनोवेशन फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर रॉबर्ट एटकिंसन ने इसे "अधिक तूल" देना कहा है.
मशीन
इस मशीनी तकनीक को जर्मनी, जापान और अमरीका जैसे औद्योगिक देशों के साथ-साथ उन देशों में भी अपनाया जा रहा है जहां औद्योगिक क्षेत्र में कम मज़दूरी मिलती है.
पिछले साल चीन औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले रोबोटों का सबसे बड़ा ख़रीददार था और डॉक्टर फ्रे के मुताबिक़ ये मशीन भारत में भी अपनी जगह तलाश रही है.
इस बीच ख़बर है कि अमरीका बड़े पैमाने पर सैनिकों की जगह रिमोट से चलने वाली गाड़ियों को लेने की सोच रहा है.
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