क्रोध और अहंकार जुड़वां भाई हैं, दोनों का चरित्र एक ही है और दोनों एक-दूसरे के साथ ही कहीं भी जाते हैं और ये जिस व्यक्ति के साथ रहते हैं, उसकी सत्य और असत्य, सही और गलत या न्याय और अन्याय देखने की समझ समाप्त हो जाती है और वह आनेवाले अवसरों को भांप नहीं पाता. यदि हम इस कथन से कुछ सीख सकें, तो समय रहते हर अवसर को पहचान सकेंगे.
एक बार एक पत्रकार महानायक अमिताभ बच्चन से फिल्म पा में उनके अभिनय को ऐतिहासिक बताते हुए उनके अभिनय के तारीफ के पुल बांधने लगा, तो महानायक बोले, ‘न मैं यह अभिनय कर पाता, न पा इतनी बेहतरीन फिल्म बनती और न ही आप आज मुङो अपने सर-आंखों पर बिठाते, यदि इस फिल्म के निर्देशक, मेक-अप एक्सपर्ट व कहानीकार ने कठोर मेहनत कर इस चरित्र को पैदा नहीं किया होता. मैंने तो केवल वही किया, जो मुझसे करने को कहा गया’. याद रखें, आपकी सफलता में कई वैसे लोगों का भी बड़ा हाथ है, जिन्होंने आपके संघर्ष के दिनों में आपको असफल कह कर आपसे पल्ला नहीं झाड़ लिया. लाखों उदहारण बताते हैं कि जिन सफल लोगों ने इसे याद रखा, उनके अंदर कभी भी ‘ऐरोगेन्स’ जैसा शब्द नहीं आया और उन्होंने सफलता की नयी कहानी लिखी. मुङो एक कहानी याद आ रही है.
ब्रिटेन के किसी शहर में डेविड नाम का एक साधारण संगीत शिक्षक रहता था. उसके बेटे हेनरी को प्यानो बजाने का बड़ा शौक था. डेविड ने जब उसकी ललक देखी तो निश्चय किया कि वह अपने बेटे को किसी बड़े शिक्षक या संगीत विद्यालय में दाखिला दिलायेगा, ताकि बड़ा होकर वह अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्यानिस्ट (प्यानो बजानेवाला) बने. तभी उसे पता चला कि उसके शहर में एक बेहद लोकप्रिय व विश्व प्रसिद्ध प्यानिस्ट आनेवाले हैं. इस प्रोग्राम की टिकटें धड़ाधड़ बिक गयी, लेकिन किसी तरह पिछली बेंच की दो टिकटों का इंतजाम डेविड ने कर लिया.
प्रोग्राम वाले दिन डेविड और हेनरी दोनों हॉल में गये. पूरा हॉल खचाखच भरा हुआ था और प्रोग्राम थोड़ी देर में शुरू होनेवाला था. किसी तरह हेनरी को दो सीट मिल गयी और दोनों बैठ गये. थोड़ी देर बाद जब कार्यक्रम प्रारंभ होने के समय हॉल की लाइट धीमी होने लगी तो डेविड ने बगल की सीट पर बैठे हेनरी को देखना चाहा, पर हेनरी गायब था. डेविड उसे खोजने के लिए और चारों तरफ देखने लगा. तभी उसनी नजर स्टेज पर पड़ी. हेनरी धीरे से किनारे से जाकर प्यानो वाली कुर्सी पर बैठ गया और प्यानो बजाने लगा. लाइटमैन को लगा कि कार्यक्रम शुरू हो गया, तो उसने भी कलाकार की ओर फोकस लाइट मोड़ दी. अब पूरे हॉल को हेनरी प्यानो बजाते हुए नजर आ रहा था. जो प्यानिस्ट कार्यक्रम प्रस्तुत करने आया था, उसके कानों में भी प्यानो की आवाज पड़ी, वह स्टेज की ओर आया, हेनरी को देख उसने मुस्कराया और उसे प्यानो बजाते रहने का इशारा किया. थोड़ी देर में वह प्यानिस्ट हेनरी के बगल में आकर बैठ गया और जिस-जिस जगह पर हेनरी से गलती हो रही थी, वहां-वहां वह प्यानिस्ट प्यानो में कोई लय छेड़ देता, जिससे पूरा संगीत बेहद कर्णप्रिय बन जाता. जब कार्यक्रम खत्म हुआ, तो पूरे हॉल ने खड़े होकर देर तक ताली बजा कर कलाकारों का अभिवादन किया. थोड़ी देर के बाद एक पत्रकार ने हेनरी से पूछा, ‘आप इतना बढ़िया प्यानो कैसे बजा लेते हैं.’ हेनरी ने कहा, ‘अभी तो मैंने एक साल से ही बजाना शुरू किया है, तब मैं ऐसा बजता हूं, कुछ साल बाद मिलना, सबकी छुट्टी कर दूंगा.’ तभी डेविड ने कहा, ‘बेटे, इस छोटी सी सफलता ने तुम्हारे अंदर अहंकार को जन्म दे दिया है, दरअसल तुम्हारा प्रदर्शन अच्छा हो ही नहीं पाता, यदि इस महान प्यानिस्ट ने तुम्हारी कमियों को ढका नहीं होता. याद रहे, तुम्हें मिली इन तालियों का अधिकार तुमसे ज्यादा इन प्यानिस्ट महोदय का है.’ यह सुनकर हेनरी को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने पत्रकार व प्यानिस्ट महोदय से अपनी बात के लिए तत्काल माफी मांगी.
किसी महापुरुष ने कहा था, ‘क्रोध और अहंकार जुड़वां भाई हैं, दोनों का चरित्र एक ही है और दोनों एक-दूसरे के साथ ही कहीं भी जाते हैं और ये जिस व्यक्ति के साथ रहते हैं, उसकी सत्य और असत्य, सही और गलत या न्याय और अन्याय देखने की समझ समाप्त हो जाती है और वह आनेवाले अवसरों को भांप नहीं पाता. यदि हम इस कथन से कुछ सीख सकें, तो समय रहते हर अवसर को पहचान सकेंगे, जो हमारी सफलता का रास्ता प्रशस्त करेगी.
आशीष आदर्श
कैरियर काउंसेलर
