हैदराबाद : आने वाले दिनों में होने वाले लोकसभा चुनाव राजनीतिक दलों की भूमिका कितनी होगी, यह तो जगजाहिर है, लेकिन इस बार के चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका भी अहम मानी जा रही है. सूचना प्रौद्योगिकी के एक विशेषज्ञ का कहना है कि देश के आम चुनाव में प्रौद्योगिकी पहली बार केंद्रीय भूमिका में है. उनका मानना है कि आगामी लोकसभा चुनाव में कई निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावी नतीजे में सोशल मीडिया निर्णायक भूमिका निभा सकती है.
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पूर्व दूरसंचार सचिव और नैसकॉम के पूर्व अध्यक्ष आर चंद्रशेखर ने कहा है कि पहले के चुनावों में इसकी भूमिका सीमित थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि इस लोकसभा चुनाव में पूरी प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी केंद्रीय भूमिका में होगी. चाहे सोशल मीडिया हो, विश्लेषण हो, रणनीति हो, सभी क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी केंद्रीय भूमिका में आ चुकी है.
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव चंद्रशेखर ने कहा कि इसने समूची चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह बदल डाला है. उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी सोशल मीडिया पर अच्छा खासा वक्त बिताती है और पहली बार मतदान करने वालों का बड़ा हिस्सा इस बार चुनाव में भागीदारी करेगा. चंद्रशेखर ने कहा कि यह कहना कठिन है कि सोशल मीडिया से कितने प्रतिशत प्रभावित होंगे, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि कुछ प्रतिशत जरूर महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे. कुछ प्रतिशत वोट के इधर से उधर होने के संदर्भ में भी यह महत्वपूर्ण होगा.
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया दो से तीन फीसदी वोट को इधर से उधर करने पर असर डाल सकता है और भारतीय संदर्भ में जहां कई क्षेत्र में जीत का अंतर बहुत कम रहता है, वहां यह निर्णायक हो सकता है. चंद्रशेखर ने कहा कि फेक न्यूज और इसकी बढ़ती प्रवृत्ति के कारण मतदाताओं के लिए सही सूचनाओं से लैस होना भी कठिन बन गया है.
