‘कश्मीरी पंडितों की घर वापसी होनी चाहिए’

नई पार्टी ‘जम्मू कश्मीर पीपल्स मूवमेंट’ बनाने के बाद 2010 बैच के आईएएस अधिकारी रहे शाह फ़ैसल का कहना है कि कश्मीरी पंडितों के साथ ‘ज़्यादतियाँ’ हुईं हैं और उन्हें इंसाफ़ मिलना ही चाहिए. बीबीसी से बात करते हुए शाह फ़ैसल कहते हैं कि हालात ऐसे बन गए थे जिसकी वजह से कश्मीरी पंडितों को […]

<p>नई पार्टी ‘जम्मू कश्मीर पीपल्स मूवमेंट’ बनाने के बाद 2010 बैच के आईएएस अधिकारी रहे शाह फ़ैसल का कहना है कि कश्मीरी पंडितों के साथ ‘ज़्यादतियाँ’ हुईं हैं और उन्हें इंसाफ़ मिलना ही चाहिए. </p><p>बीबीसी से बात करते हुए शाह फ़ैसल कहते हैं कि हालात ऐसे बन गए थे जिसकी वजह से कश्मीरी पंडितों को अपना घर छोड़कर जाना पड़ा. </p><p>वो कहते हैं, &quot;कश्मीरी पंडितों की घर वापसी हमारे लिए बहुत बड़ा मुद्दा है और हम उस दिशा में काम करेंगे. उनका घर आना बहुत ज़रूरी है. हमारी पार्टी उनको इज़्ज़त के साथ वापस कश्मीर लाने के लिए काम करेगी.&quot;</p><p>रविवार को शाह फ़ैसल ने श्रीनगर के गिंदुन पार्क में आयोजित कार्यक्रम में औपचारिक रूप से अपनी नयी पार्टी की घोषणा की. वो कहते हैं कि मौजूदा राजनीतिक हालात में उनकी पार्टी – जम्मू कश्मीर पीपल्स मूवमेंट – के गठन के दिन ही लोगों से मिला समर्थन उनके लिए काफ़ी उत्साहवर्धक है. </p><p>फ़ैसल कहते हैं कि लेह और लद्दाख़ से भी लोग श्रीनगर पहुंचे और उन्हें समर्थन देने की घोषणा की. </p><p>ये पूछे जाने पर कि क्या वो एक प्रशासनिक अधिकारी रहते हुए लोगों के लिए काम नहीं कर पाते? फ़ैसल कहते हैं कि पिछले कई सालों से कश्मीर प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनितिक संकट से गुज़र रहा है. </p><p>उनका कहना था, &quot;कश्मीर में नौकरशाही का कोई संकट नहीं है. ये राज्य राजनीतिक संकट झेलता आया है. राजनीतिक दलों के अवशासन की वजह से आज कश्मीर के ऐसे हालात बन गए हैं जिसमें आम लोगों को और ख़ास तौर पर युवाओं को परेशानी के दौर से गुज़रना पड़ रहा है.&quot;</p><p>लोक सेवा के टॉपर रहे शाह फ़ैसल का कहना है कि पिछले 70 सालों में राजनीतिक दलों ने कश्मीर के लोगों के साथ ग़ुलामों जैसा सुलूक किया है. वो उदाहरण देते हुए कहते हैं कि कुछ राजनीतिक दल बारी-बारी से जम्मू-कश्मीर पर शासन करते रहे हैं.</p><p>&quot;जो वोटर होता है उसको मज़हबी किताबों पर हाथ रखकर वादे लिए जाते हैं कि आप हमारा साथ देंगे चाहे हम आपके काम करें या नहीं. मज़हब का हवाला देकर उन्हें जकड़ा जाता है. इन राजनीतिक दलों ने एक तिलिस्म बना रखा है लोगों के आसपास. उस तिलिस्म को हम तोड़ना चाहते हैं.&quot;</p><p>वो कहते हैं कि लोग राजनीतिक दलों के ग़ुलाम इसलिए हैं क्योंकि उनके मसले हल नहीं हो पाते हैं मगर वो अपने नेता बदल भी नहीं पाते क्योंकि उनके पास विकल्प नहीं हैं. शाह फ़ैसल कहते हैं कि उन्होंने सोचा था कि उनके लिए सबसे पहला काम था कि वो संसद तक जाएँ और लोगों की समस्याओं को लेकर दिल्ली का ध्यान आकर्षित करें. </p><p>मगर, उनका कहना था कि किस तरह संसद तक का सफ़र तय करना है इसको लेकर वो सोच में पड़ गए. &quot;मेरे लिए रास्ता था कि किसी मौजूदा राजनीतिक दाल में शामिल हो जाऊं और चुनाव लड़कर संसद चला जाऊं. मगर फिर जब मैं नौकरी छोड़कर लोगों के बीच गया तो मैंने सोचा कि संसद जाने का रास्ता ख़ुद ही बनाऊंगा. यानी नया दल बनाकर.&quot; </p><p>नया राजनीतिक दल बनाने की पेशकश के बाद फ़ैसल पर राजनीतिक दलों ने निशाना साधना शुरू कर दिया. नेशनल कांफ्रेंस के नेता तनवीर सादिक़ ने ट्वीट कर कहा कि राज्य के लोगों को शाह फ़ैसल से ‘होशियार रहना’ चाहिए. </p><p>ऐसे लोगों पर पलटवार करते हुए शाह फ़ैसल कहते हैं कि चूँकि वो जम्मू-कश्मीर के किसी भी राजनीतिक दल के एजेंट नहीं हैं इसलिए लोग उन्हें दिल्ली का या फिर आरएसएस का एजेंट बता रहे हैं. &quot;मैं अल्लाह ने मौक़ा दिया है कि मैं उसका एजेंट बनकर यहां के हालात ठीक कर पाऊँ.&quot; </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong><strong> </strong></p>

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