जॉर्ज वाशिंगटन बचपन से प्रतिभावान थे. इनके पिता एक किसान थे. लोगों का यही सोचना था कि बड़ा होकर जॉर्ज भी एक किसान ही बनेगा, लेकिन उन्होंने सबकी सोच बदल दी. वे अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में लोगों के बीच प्रसिद्ध हुए.
पिता का नाम ऑगस्टिन वाशिंगटन और माता का नाम मेरी बॉल था. उनमें कुछ कर गुजरने का जज्बा था जिसके कारण वे सेना में भरती हो गये. कुछ समय बाद अमेरिका के लोगों ने अपने देश को आजाद कराने के लिए विद्रोह करने का फैसला किया. सर्वसम्मति से जॉर्ज को नेता चुना.
इतिहासकारों का कहना है कि जिस बैठक में क्रांति का नेता चुनने का सवाल उठा. उसमें कई प्रमुख व्यक्ति मौजूद थे. वे जॉर्ज वाशिंगटन से ज्यादा योग्य, विद्वान और युद्ध- कौशल जाननेवाले थे. युद्ध संचालन की योग्यता भी कम थी, फिर भी सबने उनको अपना नेता चुना. बात यह थी कि जॉर्ज में बिल्कुल भी घमंड नहीं था. वह हर हाल में शांत भाव से काम करना जानते थे. वे इतने सच्चे और ईमानदार थे कि उन पर कोई भी सहज ही भरोसा करके उनके पीछे चलने को तैयार हो जाता.
जिन दिनों अमेरिका के लोग अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे उन्हीं दिनों की बात है. कुछ सैनिक लकड़ी के बड़े लट्ठे को उठाने की कोशिश कर रहे थे. उनका अधिकारी खड़ा-खड़ा हुक्म दे रहा था. संयोग से जॉर्ज उधर से गुजरे. जब उन्होंने यह सब देखा, तो वह स्वयं सबके साथ मिल कर लट्ठा उठाने चले गये. उन्हें ऐसा करते देख सेना का हौसला बढ़ गया. काम खत्म करने के बाद जॉर्ज अफसर के पास गये और उन्हें अपना परिचय दिया. वह अफसर वहीं शर्म से पानी-पानी हो गया. उनके इसी अपनेपन की वजह से संविधान लागू होने के बाद वे देश के प्रथम राष्ट्रपति बने. उन्होंने हमेशा ही देशवासियों के साथ पुत्रवत व्यवहार किया. अमेरिका की जनता ने इनके नाम पर देश की राजधानी, एक राज्य, सात पहाड़ों, आठ नदियों, दस झीलों का नामकरण किया. 33 काउंटियों, नौ कॉलेजों, 120 नगरों और कस्बों के नाम भी उनके नाम पर हैं. पहाड़ की चोटी को तराश कर जॉर्ज वाशिंगटन की आकृति भी बनायी गयी है.
जॉर्ज वाशिंगटन
जीवनकाल : 1732 से1799
