<p>क्या होता है जब एक शख़्स राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की वेश-भूषा में लोगों के बीच निकलता है.</p><p>दीपक अंतानी थिएटर और फ़िल्मों में काम करने वाले अभिनेता हैं. दीपक ने हाल ही में गुजरात के गांव से केंद्रीय मंत्री मंडाविया की ओर से शुरू की गई ‘पद यात्रा जो बनी जीवन यात्रा’ में महात्मा गांधी की पोशाक में निकले.</p><p>बीजेपी नेता मनसुख मंडाविया ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के वर्ष में 16 से 22 जनवरी के बीच ये पद यात्रा निकाली थी. </p><p>दीपक ने अपने इस अनुभव को <strong>बीबीसी</strong> से साझा किया.</p><p>उन्होंने बताया, ”पिछले आठ सालों से मैं कई नाटक और डॉक्यूमेंट्री में गांधी जी का किरदार निभा चुका हूं. लेकिन मैं कुछ घंटे तक ही गांधी की वेश भूषा में रहा करता था. ये पहली बार है कि मैं सुबह से लेकर रात तक गांधी की भेष में रहा." </p><p>खास बात ये थी कि मैं इस बार किसी मंच पर नहीं बल्कि लोगों के बीच था. लोग मेरे माथे पर तिलक लगा रहे थे और मुझे मालाएं पहना रहे थे. मेरे लिए ये नज़ारा बेहद भावुक करने वाला था. </p><p><strong>कहां से शुरू हुई ये पद यात्रा</strong></p><p>महात्मा गांधी के सम्मान में ये पद यात्रा भगवान नगर ज़िले के मनार गांव से निकाली गई और सनोसारा गांव के लोक भारती संस्थान में ख़त्म हुई.</p><p>150 किलोमीटर लंबी इस यात्रा का नेतृत्व खुद सड़क और परिवहन राज्य मंत्री मंडाविया ने किया. इस पद यात्रा में 150 गाँवों की यात्रा की गई. </p><p><strong>पढ़ें-</strong><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-38738275">क्या भारतीय गणतंत्र के पिता थे सरदार पटेल?</a></p><p>दीपक अनंती ने कहा, ” जब लोगों ने मेरे पैर छुए और मेरे लिए सम्मान प्रकट किया तो मुझे ये समझ में आया कि गांधी जी की भूमिका निभाने के क्या मायने हैं.” </p><p>आपके कपड़े, आपकी वेशभूषा बड़ा अंतर पैदा करती है. ऐसे ही अंतर का ज़िक्र करते हुए दीपक कहते हैं, ”आपकी वेशभूषा काफ़ी मायने रखती है. अगर मैं लोगों के बीच साधारण कपड़े पहनकर जाऊं तो कोई मुझे ये सम्मान नहीं देगा.”</p><p>” गांधी जी के उसूल और उनके विचार अमूल्य हैं. वो आज भी लोगों के दिलों-दिमाग में ज़िंदा हैं. लोगों से मिलते हुए मुझे इस बात का बार-बार अनुभव हुआ.” </p><p>गांधी की वेशभूषा के साथ ही उनके जैसी गंभीरता भी साथ आनी चाहिए. दीपक का कहना है कि वे ऐसा पहले भी महसूस कर चुके हैं. </p><p>दीपक का कहना है उन्होंने ऐसा पहले भी महसूस किया है जब उन्होंने ‘युग पुरूष’ नामक नाटक में गांधी की भूमिका निभाई थी.</p><p><strong>पढ़ें-</strong><a href="http://www.bbc.com/hindi/multimedia/2016/01/160129_mahatma_gandhi_vivechana_sdp">सुनेंः महात्मा गांधी की वो अंतिम यात्रा</a></p><p>वह कहते हैं, ”मैं नाटक के दौरान गांधी जी की भूमिका में मंच पर था. मुझे अचानक हथौड़े की आवाज़ आई. मुझे गुस्सा आ गया और मैंने अपने डायलॉग बीच में ही रोक दिए, मैं चिल्लाया कि काम रोको और मेरा ध्यान मत भटकाओ. ” </p><p>”नाटक ख़त्म होने के बाद जब लोग मेरे पास आए तो बताया कि मैंने काम अच्छा किया लेकिन मुझे ऐसे चिल्लाना नहीं चाहिए था. तब से मैं हमेशा इसका ख़्याल रखता हूं कि जब भी मैं गांधी जी की भूमिका निभाऊं तो गंभीरता बनाए रखूं. ” </p><p><strong>गांधी जी की भूमिका निभाना मुश्किल</strong></p><p>गांधी जी की भूमिका निभाने का अपने व्यक्तित्व पर असर का ज़िक्र करते हुए दीपक अंतानी कहते हैं, ”कई लोगों का कहना है कि मुझमें बदलाव है.” </p><p>” आप लोगों पर चिल्ला नहीं सकते. आप लोगों के बीच हैं, हंगामा हो रहा हो लेकिन आपको संयम रखना होगा, आप लोगों पर गुस्सा नहीं कर सकते. ” </p><p>” अपने शब्दों के चुनाव के साथ भी सजग रहना होता है . लोगों ने गांधी जी के कई वीडियो और भाषण सुने हैं, उन्हें पता है कि गांधी जी कैसे बोलते हैं, कैसे चलते हैं.” </p><p>” गांधी जी की भूमिका निभाना बेहद मुश्किल है वो भी तब जब आप जनता के बीच हों. ” </p><p><strong> भूमिका निभाने के बाद मैने नशा छोड़ा </strong></p><p>दीपक 0अनंती गांधी जी की भूमिका निभाने पर कहते हैं, ”मुझ पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा है. पिछले 6 साल में मैंने कई आदतें छोड़ दी हैं. गांधी जी की भूमिका निभाने के बाद मैंने नशा करना छोड़ दिया.”</p><p>” गांधी जी छरहरी काया के थे ऐसे में उनकी भूमिका निभाने के लिए मुझे अपने शरीर का ख्याल रखना पड़ता है. ” </p><p><strong>पढ़ें- </strong><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-38706238">सात दशक बाद भी गांधी से इतना ख़ौफ़ क्यों?</a></p><p>गांधी जी की तरह ही पद यात्रा करने के बाद दीपक कहते हैं, ”हमने सोचा था कि हम हर गांवों में गाड़ी से घुमेंगे. लेकिन गांव-दर-गांव धूम कर हमें लोगों से बेहतरीन प्रतिक्रिया मिली और वे लोग हमारे साथ आए. इसके बाद हमने तय किया कि हम पैदल गांवों की यात्रा करेंगे.” </p><p><strong>नेता-अभिनेता सभी हुए शामिल</strong></p><p>इस यात्रा पर डॉक्यूमेंट्री बनाई गई है जिसके लिए दीपक अंतानी ने ने अपनी कलम भी आज़माई है. उन्होंने अपने किरदार के लिए कुछ डायलॉग भी लिखे हैं. </p><p>अपने डायलॉग का नमूना पेश करते हुए कहा, ” मैंन लोगों से कहा आपकी जेब में जो नोट है, उस पर मेरी मुस्कुराती हुई तस्वीर है. बताइए हम लोगों के चेहरों पर मुस्कान कैसे ला सकते हैं. आप उस पैसे को अच्छे काम के लिए खर्च करें किसी प्रकार का नशा ना करें ताकि नोट पर छपी मेरी तस्वीर हमेशा मुस्कुराती रहेगी.” </p><p>”अंग्रेजो के पास गोलियां थी लेकिन मेरे पास सच का हथियार था. ”</p><p>देश भर में जो भी लोग गांधी जी के विचारों से प्रेरित हैं, वे हमारी यात्रा से जुड़े. लेखक, कलाकार, फ़िल्म निर्माता सभी ने इस पद यात्रा में हिस्सा लिया. इतना ही नहीं केंद्र और राज्य के कई मंत्री भी हमारे साथ जुड़े.</p><p>वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हमसे बात की और गुजरात के सीएम विजय रूपाणी भी इस यात्रा के ख़त्म होने के मौक़े पर हमारे साथ थे. </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> करें. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक </a><strong>और </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</strong></p>
'गांधी बनकर जब मैं लोगों के बीच निकला'
<p>क्या होता है जब एक शख़्स राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की वेश-भूषा में लोगों के बीच निकलता है.</p><p>दीपक अंतानी थिएटर और फ़िल्मों में काम करने वाले अभिनेता हैं. दीपक ने हाल ही में गुजरात के गांव से केंद्रीय मंत्री मंडाविया की ओर से शुरू की गई ‘पद यात्रा जो बनी जीवन यात्रा’ में महात्मा गांधी की […]
