मेहनत और लगन के दम पर महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनायी है. लेकिन, आज भी ज्यादातर क्षेत्रों में महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को ज्यादा तवज्जो व वेतन दिया जाता है. बीते वर्षों में कार्यक्षेत्र के बदलते माहौल के बीच कुछ ऐसे नये सेक्टर्स सामने आये हैं, जो महिलाओं को आगे बढ़ने के ज्यादा विकल्प के साथ अच्छा वेतन दे रहे हैं. आइये डालते हैं एक नजर ऐसे पांच क्षेत्रों पर…
प्राची खरे
वर्षों से किये जा रहे प्रयासों के बाद भी हम इस सच से मुंह नहीं मोड़ सकते कि आज भी कार्यक्षेत्र में महिलाओं एवं पुरुषों के अनुपात में बड़ा अंतर मौजूद है. इसके बावजूद ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच महिलाओं ने अपनी पहचान बनाने में सफलता हासिल की है. बैंकिंग, टीचिंग, डिजाइनिंग व नर्सिंग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के काम को हमेशा ही सराहा गया है. वक्त के साथ जैसे-जैसे महिलाओं के कदम आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे क्षेत्रों की लिस्ट भी लंबी होती जा रही हैं, जहां अच्छी परफॉर्मेंस के साथ महिलाएं अच्छा वेतन प्राप्त कर रही हैं.
सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट
कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी रखनेवाली महिलाओं के लिए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में अच्छा स्कोप देखा जा रहा है. आईबीएम, इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल जैसी आईटी कंपनियाें ने बीते वर्षों में महिलाओं को आगे आने के अच्छे अवसर प्रदान किये हैं. यही कारण है कि कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की तरफ युवतिओं का रुझान बढ़ा है. इंटरनेट, वेबसाइट्स और सॉफ्टवेयर एप्लीकेशंस के दिनों-दिन बढ़ते बाजार की वजह से इस क्षेत्र में प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ रही है. ऐसे में आप भी बतौर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ सकती हैं.
प्रवेश के लिए योग्यता : सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग या डेवलपमेंट के क्षेत्र में प्रवेश के लिए प्रोग्रामिंग, कंप्यूटर साइंस या सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का कोर्स करना होगा. इसके लिए साइंस स्ट्रीम के साथ ग्रेजुएट होना आवश्यक है. सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में मास्टर्स डिग्री भी की जा सकती है. इसी तरह आप बीई, बीटेक, एमई, एमएस या एमटेक डिग्री हासिल करके भी इस प्रोफेशन में प्रवेश की राह तलाश सकते हैं.
प्रमुख संस्थान : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली. आईआईटी रुड़की, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़. अन्ना यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु.
बनें ह्यूमन रिसोर्स मैनेजर
महिलाओं को हमेशा से ही एक अच्छा मैनेजर माना जाता रहा है. प्रतिस्पर्धा के माहौल में स्टाफ को मैनेज करना और उनसे बेहतर आउटपुट लेना आसान नहीं है. लेकिन, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजर के रूप में महिलाएं मैनेजमेंट के काम को बखूबी संभाल रही हैं. ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (एचआरएम), जिसे पहले पर्सनल मैनेजमेंट या लेबर एंड इंडस्ट्रियल रिलेशन मैनेजमेंट के तौर पर जाना जाता था, आज महिलाओं को तरक्की देनेवाला क्षेत्र बन चुका है.
प्रवेश के लिए योग्यता : इस क्षेत्र में प्रवेश के लिए ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट में मास्टर्स डिग्री या डिप्लोमा होना आवश्यक है. किसी भी संकाय से स्नातक के बाद एमबीए एचआर कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं. यह कोर्स दो वर्ष का होता है. इस कोर्स में प्रवेश के लिए एप्टीट्यूड टेस्ट, ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू के दौर से गुजरना होता है. ज्यादातर इंस्टीट्यूट छात्रों को कैट, मैट, जैट जैसे एंट्रेंस टेस्ट में आये स्कोर के आधार पर दाखिला देते हैं. कुछ संस्थान इन कोर्सेज के लिए खुद भी एंट्रेंस टेस्ट लेते हैं.
प्रमुख संस्थान : एक्सएलआरआई, जमशेदपुर. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पर्सनल मैनेजमेंट, मुंबई. देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, इंदौर. यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली. कलकत्ता यूनिवर्सिटी, कोलकाता.
इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में दिखाएं कौशल
अच्छा जनसंपर्क और व्यावहारिक कौशल महिला के गुणों में स्वत: ही शामिल होता है, जिसके चलते वे इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में बेहतर मुकाम हासिल कर सकती हैं. इवेंट मैनेजमेंट में बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं. इस प्रोफेशन में आपको मुख्य रूप से फैशन शो, संगीत समारोह, शादी समारोह, थीम पार्टी, प्रदर्शनी, कॉरपोरेट सेमिनार, प्रोडक्ट लाॅचिंग, प्रीमियर के प्रोग्राम आर्गनाइज करने होते हैं. एक अच्छा इवेंट मैनेजर क्लाइंट व कंपनी के बजट को ध्यान में रखकर प्रोग्राम का आयोजन करता है.
प्रवेश के लिए योग्यता : किसी खास तरह की शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं होती. आप चाहें तो इवेंट मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए डिप्लोमा इन इवेंट मैनेजमेंट या सर्टिफिकेट कोर्स कर सकती हैं.
प्रमुख संस्थान : एमिटी इंस्टीट्यूट, नयी दिल्ली. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इवेंट मैनेजमेंट, मुंबई.
ढेरों संभावनाएं हैं लॉ में
वह दौर बीत चुका है जब लॉ करने के बाद वकालत करने या जज बनने जैसे ही ऑप्शन हुआ करते थे. आज इस प्रोफेशन में नये ऑप्शंस के साथ महिलाओं के लिए इस क्षेत्र में भरपूर मौके बन रहे हैं. आज महिलाएं कॉरपोरेट लॉ, टैक्सेशन लॉ, आईपी लॉ में अच्छा परफॉर्म कर रही हैं. इन दिनों गवर्नमेंट से लेकर प्राइवेट सेक्टर की कंपनीज अपने यहां लीगल ऑफिसर, एडवाइजर, कंसल्टेंट को हायर कर रही हैं. उनके यहां बाकायदा लीगल सेल्स ऑपरेट हो रहे हैं, जिनमें एक्सपर्ट लॉ ग्रेजुएट्स की जरूरत होती है. यदि आप भी इस फील्ड में कदम बढ़ाना चाहते हैं, तो आपके सामने खुला आसमान है.
प्रवेश के लिए योग्यता : लॉ की पढ़ाई के लिए 12वीं के बाद पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड एलएलबी प्रोग्राम, जैसे बीए-एलएलबी (ऑनर्स), बीएससी-एलएलबी (ऑनर्स), बीबीए-एलएलबी (ऑनर्स) या बीकॉम-एलएलबी (ऑनर्स) कर सकते हैं. इसके अलावा ग्रेजुएशन के बाद तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स करने का विकल्प भी है.
प्रवेश परीक्षा : किसी अच्छे संस्थान में पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड एलएलबी कोर्स में प्रवेश के लिए कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट), ऑल इंडिया लॉ एंट्रेंस टेस्ट (एआईएलईटी), लॉ स्कूल एडमिशन टेस्ट (एलएसएटी) जैसी प्रवेश परीक्षाओं में से किसी एक में सफलता हासिल करना जरूरी है. तीन वर्षीय एलएलबी प्रोग्राम में एडमिशन के लिए डीयूएलएलबी, बीएचयू एलएलबी, एमएच सीईटी आदि प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं.
प्रमुख संस्थान : नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु. नलसार यूनिवर्सिटी आॅफ लॉ, हैदराबाद. नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नयी दिल्ली, जोधपुर.
फार्मासिस्ट
मेडिकल के क्षेत्र में गाइनेकोलॉजिस्ट एंड ऑब्स्ट्रेटिशियन, पीडिएट्रिशियन एवं फिजीशियन के रूप में महिलाओं ने पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर अपना योगदान दिया है. इन प्रोफेशंस के अतिरिक्त पिछले कुछ समय से मेडिकल के क्षेत्र में एक फार्मासिस्ट के रूप में महिलाओं की मौजूदगी को बढ़ते देखा जा रहा है.
प्रवेश के लिए योग्यता : विज्ञान विषय के साथ बारहवीं पास करनेवाले छात्र दो वर्षीय डीफार्मा या चार वर्षीय बीफार्मा कोर्स करके इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं. कुछ कॉलेजों में फार्मेसी में फुलटाइम कोर्स संचालित किये जाते हैं. फार्मा रिसर्च में स्पेशलाइजेशन के लिए एनआईपीईआर यानी नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फार्मा एजुकेशन एंड रिसर्च जैसे संस्थानों में प्रवेश ले सकते हैं. वहीं पीजी डिप्लोमा इन फार्मास्युटिकल एवं हेल्थ केयर मार्केटिंग, डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग, एडवांस डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग एवं पीजी डिप्लोमा इन फार्मा मार्केटिंग जैसे कोर्स भी संचालित किये जा रहे हैं. इन पाठयक्रमों की अवधि छह माह से एक वर्ष के बीच है. इनमें प्रवेश के लिए अभ्यर्थी की न्यूनतम योग्यता बीएससी, बीफार्मा या डीफार्मा निर्धारित की गयी है.
प्रमुख संस्थान : कॉलेज ऑफ फॉर्मेसी, दिल्ली विश्वविद्यालय. गुरु जंबेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा. बॉम्बे कॉलेज ऑफ फॉर्मेसी, मुंबई. बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, पिलानी. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी. राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेस, बेंगलुरु.
