मणिपुरः ”बीजेपी सरकार की आलोचना की तो मेरे पति पर लगा दिया NSA”

मणिपुर के एक स्थानीय पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार करने का एक मामला सामने आया है. ये घटना बीते मंगलवार की है. पत्रकार किशोरचंद्र पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली सरकार के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के ख़िलाफ़ कथित तौर पर अपमानजनक […]

मणिपुर के एक स्थानीय पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार करने का एक मामला सामने आया है. ये घटना बीते मंगलवार की है.

पत्रकार किशोरचंद्र पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली सरकार के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के ख़िलाफ़ कथित तौर पर अपमानजनक शब्दों में आलोचना करने के आरोप हैं.

मणिपुर के साजीवा सेंट्रल जेल में बंद पत्रकार किशोरचंद की पत्नी रंजीता किशोर ने बीबीसी से कहा,"मेरे पति ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के मणिपुर में योगदान का विषय उठाया था और अब उनपर कई तरह के आरोप लगाए जा रहें है. ये सबकुछ मुद्दे वाली बात से ध्यान हटाने के लिए किया जा रहा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर कोई अपमानजनक पोस्ट नहीं डाली. लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ़्तार कर ले गई. जब यहां की अदालत ने उन्हें ज़मानत देते हुए अपने आदेश में कह दिया है कि मेरे पति के बयान से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट वाला मामला राजद्रोह के तहत नहीं आता तो सरकार ने उनपर एनएसए लगाकर अंदर डाल दिया."

दरअसल 19 नवंबर को मणिपुर में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर मणिपुर बीजेपी महिला मोर्चा द्वारा एक बाइक रैली का आयोजन किया गया था. इस बाइक रैली कार्यक्रम में शिरकत करते हुए मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने कहा था कि हमें झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के योगदान को याद रखना चाहिए. देश के लिए रानी लक्ष्मी बाई द्वारा किए गए योगदान के बारे में युवा पीढ़ी को जागरूक करने के लिए बाइक रैली का आयोजन किया गया था.

रानी लक्ष्मी बाई पर सवाल

लेकिन 39 साल के पत्रकार किशोरचंद ने अपने फ़ेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट कर मणिपुर के इतिहास में रानी लक्ष्मी बाई के महत्व पर सवाल खड़े कर दिए थे. पत्रकार ने अपनी फ़ेसबुक पोस्ट पर मुख्यमंत्री की कड़ी आलोचना करते हुए उनसे पूछा था कि रानी लक्ष्मीबाई का मणिपुर में क्या योगदान रहा है? पत्रकार ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ऐसी बात कर यहां के लोगों के साथ विश्वासघात न करें. मणिपुर के स्वतंत्रता सेनानी का अपमान न करें.

लेकिन इस दौरान पत्रकार पर इन वीडियो पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के ख़िलाफ़ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए जा रहें हैं.

ऐसे आरोप हैं कि पत्रकार ने अपने वीडियों में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए मुख्यमंत्री को केंद्र सरकार के हाथ की ‘कठपुतली’ बताया था. फेसबुक पर पोस्ट करने के बाद पत्रकार का ये वीडियो समूचे प्रदेश में वायरल हो गया.

इस बीच पुलिस ने 20 नवंबर को भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए / 294/500 के तहत मुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह के विवादित पोस्ट सोशल मीडिया पर डालने के आरोप में पत्रकार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. हालांकि दूसरे ही दिन पत्रकार को स्थानीय अदालत से ज़मानत मिल गई थी.

राजद्रोह का मामला बनता है या नहीं

पश्चिम इंफाल की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने इस मामले में पत्रकार को ज़मानत देते हुए अपने आदेश में कहा था कि "भारत के प्रधानमंत्री और मणिपुर के मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ राय की अभिव्यक्ति" को राजद्रोह नहीं कहा जा सकता.

लेकिन इसके छह दिन बाद बीते मंगलवार को पत्रकार किशोरचंद को एनएसए के तहत फिर गिरफ़्तार कर लिया गया. किशोरचंद की पत्नी रंजीता कहती है," इंफाल पुलिस स्टेशन से सुबह 9 बजे एक फ़ोन कॉल आया था, जिसमें मेरे पति को पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा गया था.

"जब मेरे पति हमारे एक रिस्तेदार के साथ दिन के करीब 12 बजे पुलिस स्टेशन जाने की तैयारी कर रहे थे, उसी समय सादी वर्दी में एक पुलिस टीम आई और मेरे पति को हमारे घर से ले गई. पुलिस ने कई बार पूछने पर भी नहीं बताया आखिर उन्हें फिर क्यों गिरफ्तार किया गया है."

वो आगे कहती है, "अब कुछ लोग आरोप लगा रहे है कि मेरे पति इस तरह की पोस्ट नशा करने के बाद सोशल मीडिया में डालते है. दरअसल कुछ लोग इस बात को ग़लत तरीके से प्रचार कर मेरे पति की विश्वसनीयता को ख़त्म करना चाहते है ताकि इस तरह के गंभीर मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाया जा सके. मेरा भी यही सवाल है आख़िर मणिपुर के इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई का क्या योगदान रहा है?"

चैनल ने नौकरी से हटाया

अपने पति की रिहाई पर रंजीता कहती है, "मुझे नहीं मालूम सरकार मेरे पति को कब छोड़ेगी लेकिन स्थानीय लोग हमारा साथ दे रहें है. लोग जानते है कि मेरे पति ने एक सही सवाल उठाया है. मैं अपने पति पर लगे सारे आरोपों को हटाने के लिए अंत तक लडूंगी."

ख़ास बात ये है कि आईएस टीवी नामक एक स्थानीय चैनल में काम करने वाले किशोरचंद को नौकरी से हटा दिया गया है. मणिपुर में पत्रकारों के अधिकारों के लिए काम करने वाली ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन भी इस मामले में फ़िलहाल कोई क़दम नहीं उठाया हैं.

ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के महासचिव सुखम नंदा ने बीबीसी से कहा,"किशोरचंद्र की गिरफ़्तारी पहली बार नहीं हुई है. बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर अपने इस तरह के विवादित बयान पोस्ट करने के चलते बीते अगस्त में भी उन्हें गिरफ़्तार किया गया था. उस समय यूनियन ने उनकी गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ विरोध जताते हुए इंफाल में रैली निकाली थी. हमने सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार से बात की और पत्रकार को रिहा करवा था. एकबार फिर से किशोरचंद ने काफ़ी अपमानजनक भाषा में देश के प्रधानमंत्री और मणिपुर के मुख्यमंत्री पर बयान दिया है."

मीडिया पर बढ़ता दबाव

एक सवाल का जवाब देते हुए नंदा ने कहा,"राज्य सरकार के निर्देश पर पत्रकार किशोरचंद को एनएसए के तहत गिरफ़्तार किया गया है.हमारी यूनियन पत्रकार के समर्थन में है लेकिन वो लगातार इस तरह के विवादित पोस्ट डालते आ रहे हैं."

यूनियन के महासचिव नंदा ने आगे कहा,"दरअसल किशोरचंद शराब के नशे के प्रभाव में आकर सरकार के ख़िलाफ़ इस तरह के विवादित बयान सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहे है. हमने उन्हें कई बार समझाया है. हमने पहले मामले में उनका पूरा साथ दिया था. जबकि वो हमारी यूनियन के सदस्य भी नहीं है. लेकिन वो फिर इस तरह के बयान लगातार देते आ रहें है."

हालांकि ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. दरअसल जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष ब्रोजेंद्र निओंग्बा उसी स्थानीय टीवी चैनल के मुख्य संपादक है जिसमें किशोरचंद बतौर एंकर काम किया करते थे.

मणिपुर से प्रकाशित होने वाले दैनिकअंग्रेजी अख़बार इंफाल फ्री प्रेस के संपादक प्रदीप फंजोबम कहते है,"ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष ब्रोजेंद्र निओंग्बा को मुख्यमंत्री का काफ़ी करीबी माना जाता है. इसलिए पत्रकार किशोरचंद वाले मामले में यूनियन के समर्थन को लेकर थोड़ा विवाद है.

इस मामले में सरकार ने पत्रकार को अंदर करने के लिए एनएसए लगाया है. जबकि किसी की आलोचना करना कोई अपराध नहीं है.ऐसे में सरकार एनएसए नहीं लगा सकती. क्योंकि स्थानीय अदालत ने भी कहा है कि ये राजद्रोह का मामला भी नहीं है."

वरिष्ठ पत्रकार ने मौजूदा स्थिति पर कहा,"मणिपुर में मीडिया पर काफ़ी दबाव बनाया जा रहा है. यहां स्थिति काफ़ी संवेदनशील होती जा रही है. आप सरकार के खिलाफ कुछ नहीं लिख सकते. आलोचना करने पर यहां की सरकार नाराज हो जाती है. हमारे अख़बार पर हाल ही में प्रदेश की बीजेपी सरकार ने एक आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करवाया है. क्योंकि हमने सरकार के कामकाज को लेकर रिपोर्ट की थी. इस तरह सरकार मीडिया को परेशान कर रही है."

मणिपुर के एक अखबार में काम करने वाले स्थानीय पत्रकार धनबंता का यह मानना है," सरकार की आलोचना करना कोई अपराध नहीं है. लेकिन आलोचना करने का एक मर्यादित तरीका होता है. आपको हमेशा अपनी बात रखते समय भाषा का ध्यान रखना होता है."

वैसे इस मामले में पुलिस अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, साथ साथ प्रदेश के बीजेपी नेता भी ज़्यादा कुछ नहीं कहना चाहते लेकिन पत्रकार किशोरचंद की गिरफ़्तारी के बाद से सोशल मीडिया पर राज्य सरकार की आलोचना की जा रही है.

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