अमृतसर रेल हादसा: अस्पताल से नहीं जाना चाहते घायल

दशहरे की उस काली शाम के बाद से ही जग्गु नंदन की ज़िंदगी जैसे ठहर सी गई है. उस शाम जग्गू अपने परिवार के साथ दशहरा मनाने अमृतसर के उसी मैदान पर मौजूद थे जहां भीषण रेल हादसा हुआ.जग्गू उस रेल हादसे में घायल हो गए थे और उन्हें इलाज के लिए गुरु नानक देव […]

<p>दशहरे की उस काली शाम के बाद से ही जग्गु नंदन की ज़िंदगी जैसे ठहर सी गई है. उस शाम जग्गू अपने परिवार के साथ दशहरा मनाने अमृतसर के उसी मैदान पर मौजूद थे जहां भीषण रेल हादसा हुआ.</p><p>जग्गू उस रेल हादसे में घायल हो गए थे और उन्हें इलाज के लिए गुरु नानक देव अस्पताल ले जाया गया. इलाज के बाद डॉक्टरों ने जग्गू को तीन महीने घर पर ही आराम करने की सलाह दी है.</p><p>मज़दूरी कर परिवार चलाने वाले जग्गू के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उनकी मां, पत्नी और तीन बच्चों के लिए आने वाले तीन महीनों तक पैसा कौन कमाएगा. साथ ही साथ उनके लिए दवाइयां कैसे आएंगी.</p><p>राज्य सरकार ने हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा कर दी, लेकिन घायलों के लिए कोई मुआवजा नहीं दिया गया है.</p><p>हां, इतना ज़रूर है कि पंजाब सरकार ने घायलों का इलाज सरकारी खर्चे से उठाने की बात कही है. यही वजह है कि जग्गू समेत बहुत से घायल लोग अस्पताल से छुट्टी नहीं चाहते.</p><p><strong>मुआवजा कब तक </strong><strong>मिलेगा, नहीं </strong><strong>पता</strong></p><p>केंद्र सरकार ने वैसे तो घायलों के लिए 50 हज़ार रुपए की घोषणा की है, लेकिन वह कब तक मिलेगा इसका किसी को कुछ नहीं पता.</p><p>बहुत से घायल अपना इलाज हो जाने के बाद भी अस्पताल ही रहना चाहते हैं. उन्हें डर है कि कहीं अस्पताल से चले जाने के बाद उन्हें मुआवजा मिलेगा या नहीं इसके अलावा इन लोगों को आगे होने वाले मेडिकल खर्च खुद उठाने की चिंता भी सता रही है.</p><p>अमनदीन अस्पताल में भर्ती किए गए 19 घायलों में चार को अस्पताल की तरफ से छुट्टी दे दी गई है.</p><p>घायलों में शामिल तीन बच्चों के पिता परशुराम सब्जी बेचने का काम करते हैं. उन्होंने बीबीसी से कहा, ”डॉक्टरों ने मुझे घर जाने के लिए बोल दिया है, लेकिन आगे के उपचार के लिए मुझे अस्पताल आना होगा. शायद मुझे आगे का खर्च अपनी ही जेब से चुकाना पड़े. अगर मैं अस्पताल से चला गया तो शायद मुझे मुफ़्त इलाज भी ना मिले.”</p><p>परशुराम को यह चिंता भी है कि शायद घर लौट जाने पर उन्हें घायलों को मिलने वाला मुआवजा भी ना दिया जाए.</p><p>इसी तरह पेंटर का काम करने वाले कृष्णा भी छुट्टी मिलने के बावजूद घर नहीं लौटना चाहते. वे कहते हैं, ”मेरी उम्र काफी हो गई है. मुझे नहीं लगता कि अब मैं दोबारा ठीक तरीके से काम कर पाउंगा. इसलिए घर जाने से बेहतर है कि मैं कुछ और दिन अस्पताल में ही रहूं कम से कम यहां लोग मेरी देखभाल तो कर रहे हैं.”</p><p>इन तमाम लोगों के अलावा और भी कुछ घायल हैं जिन्हें डॉक्टरों ने घर जाने के लिए कह दिया है लेकिन वे वापस लौटना नहीं चाहते. </p><p>इस संबंध में सिविल अस्पताल के डॉक्टर भूपिंदर सिंह ने बीबीसी से कहा, ”इन मरीजों को डर लग रहा है कि यहां से जाने के बाद शायद इन्हें केंद्र सरकार का मुआवजा नहीं मिल पाएगा.”</p><p>वहीं, असिस्टेंट कमिश्नर जनरल डॉक्टर शिवराज बल ने बताया है कि अभी अमृतसर के अलग-अलग अस्पतालों में कुल 46 मरीज़ भर्ती हैं.</p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-45949681">अमृतसर हादसाः आयोजन की इजाज़त किसने दी?</a></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-45937338">अमृतसर हादसा: अपनी सफाई में नवजोत कौर ने क्या कहा</a></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-45959993">अमृतसर हादसा: सिर कटी लाश का हुआ डीएनए टेस्ट तो नहीं आए दावेदार</a></p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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By Prabhat khabar digital desk

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