छेड़छाड़, प्रताड़ना और पाबंदी... कैंपस हुआ ठप

<p>छत्तीसगढ़ के हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में हफ़्ते भर से ‘आज़ादी’ के नारे गूंज रहे हैं. </p><p>यूनिवर्सिटी में पढ़ाई-लिखाई और परीक्षा स्थगित है और ‘पिंजरा तोड़ो’ की मांग करते हुए सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय की सीढ़ियों पर जमे हुए हैं. </p><p>इनकी मांग है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले लड़के-लड़कियों को 24 घंटे कैंपस […]

<p>छत्तीसगढ़ के हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में हफ़्ते भर से ‘आज़ादी’ के नारे गूंज रहे हैं. </p><p>यूनिवर्सिटी में पढ़ाई-लिखाई और परीक्षा स्थगित है और ‘पिंजरा तोड़ो’ की मांग करते हुए सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय की सीढ़ियों पर जमे हुए हैं. </p><p>इनकी मांग है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले लड़के-लड़कियों को 24 घंटे कैंपस के भीतर कहीं भी आने-जाने की छूट मिले. इसके अलावा विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी भी 24 घंटे खुली रखी जाए. साथ ही विश्वविद्यालय के कार्य परिषद की बैठकों की कार्रवाई सार्वजनिक की जाए. </p><p>प्रदर्शनकारियों की मांग है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली लड़कियों की यौन प्रताड़ना के लिये जिम्मेवार शिक्षकों को जांच तक निलंबित रखा जाए.</p><p>मांगों की एक लंबी फ़ेहरिश्त है और आरोप हैं कि विश्वविद्यालय प्रबंधन इन मांगों को अनसुना कर रहा है. लेकिन विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति रविशंकर शर्मा इन आरोपों से इंकार कर रहे हैं.</p><p>शर्मा कहते हैं, &quot;प्रदर्शनकारी छात्र अपनी 17 मांगों को लेकर हमारे पास आए थे और हमने उसी समय 15 मांगों को पूरी तरह से मान लिया था. विश्वविद्यालय में लड़कियों या लड़कों के हॉस्टल और कैंपस को रात भर खुला रखने के मुद्दों पर भी मैंने यही कहा है कि यह नीतिगत मामला है और सुरक्षा समेत तमाम मुद्दों पर विचार करने के बाद ही फ़ैसला लिया जा सकता है.&quot;</p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india/2014/07/140712_chattisgargh_free_girls_education_sr">छत्तीसगढ़ः लड़कियों को स्नातक तक की शिक्षा मुफ़्त</a></p><p><strong>कुलपति पद की नियुक्ति </strong><strong>का मामला</strong></p><p>सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और भारत के उपराष्ट्रपति रहे मोहम्मद हिदायतुल्ला की स्मृति में साल 2003 में स्थापित इस आवासीय विश्वविद्यालय में एलएलबी ऑनर्स और एलएलएम की पढ़ाई होती है. </p><p>छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर इस विश्वविद्यालय के कैंपस में लड़के और लड़कियों के हॉस्टल भी हैं, जहां देश भर के चयनित छात्र रहते हैं.</p><p>शुरू से ही अलग-अलग विवादों में घिरे इस विश्वविद्यालय में ताज़ा विवाद की शुरुआत 27 अगस्त को हुई, जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर डॉक्टर सुखपाल सिंह की दोबारा नियुक्ति को अवैध मानते हुए उनकी नियुक्ति को निरस्त कर दिया. </p><p>डॉक्टर सुखपाल सिंह के दूसरे कार्यकाल की नियुक्ति को विश्वविद्यालय के ही एक प्रोफ़ेसर अविनाश सामल ने चुनौती दी थी.</p><p>जिस दिन हाईकोर्ट का फ़ैसला आया, उसी शाम विश्वविद्यालय कैंपस में स्थित लड़कियों के हॉस्टल के गेट पर रात साढ़े दस बजे के बाद ताला बंद करने पर प्रदर्शन शुरू हो गया. </p><p>रात भर प्रदर्शन चला और फिर अगले दिन प्रदर्शन के साथ कुछ और मांगें जुड़ती चली गईं.</p><p>दो दिन बाद राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में विधि विभाग के प्रमुख सचिव रविशंकर शर्मा को प्रभारी कुलपति बनाया. शर्मा की छात्रों से बातचीत भी हुई, लेकिन छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे.</p><h1>आंदोलन जारी रखने की चेतावनी</h1><p>इस पूरे विवाद पर विश्वविद्यालय में स्टूडेंट बार एसोसिएशन की उपाध्यक्ष स्वाति भार्गव कहती हैं, &quot;हमने पिछले साल भी छात्रों के हक़ में कुछ मुद्दे उठाए थे. उस समय हमारी मांगों पर विचार करने की बात कही गई थी. लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसलिए इस बार हमने तय किया कि जब तक हमारी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे.&quot;</p><p>स्टूडेंट बार एसोसिएशन के उप संयोजक आकांश जैन का दावा है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मांगों को गंभीरता से नहीं लिया और एक भी मामले में कोई कार्रवाई होती नज़र नहीं आई. प्रभारी कुलपति ने हमारी मांगों को सुना ज़रूर, लेकिन पिछले सात दिनों में कोई भी मांग पूरी नहीं हुई.</p><p>हालांकि विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति रविशंकर शर्मा इससे इंकार करते हैं. वे कहते हैं, &quot;हमने 17 में से 15 मांगें मान ली हैं, लेकिन उनके क्रियान्वयन के लिए थोड़ा समय तो चाहिए. कैंपस को 24 घंटे खुला रखने के मुद्दे पर भी हमने कार्य परिषद में बात रखने का आश्वासन दिया था. लेकिन जाने क्यों छात्र अड़े हुए हैं. &quot;</p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-44792204">जेएनयू छात्रों पर फ़ीस से ज़्यादा जुर्माने की मार</a></p><h1>यौन प्रताड़ना के गंभीर आरोप</h1><p>विश्वविद्यालय में स्टूडेंट बार एसोसिएशन के प्रचार-प्रसार प्रभारी अच्युत तिवारी का कहना है कि विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्राओं ने यौन प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं. पिछले दो दिनों में 76 लड़कियों ने लिखित में अपनी शिकायत दर्ज कराई है.</p><p>अच्युत तिवारी कहते हैं, &quot;जब शिक्षक लड़कियों को प्रताड़ित कर रहे हैं, तब आप लड़कियों से यह अपेक्षा कैसे रख सकते हैं कि वे उनकी कक्षा में बैठ कर पढ़ाई करें? हम चाहते हैं कि इस तरह के तमाम मामलों की जांच हो और जांच पूरी होने तक आरोपी शिक्षकों को निलंबित किया जाए.&quot;</p><p>एक छात्रा ने बीबीसी से बातचीत में कहा, &quot;मेरे शिक्षक मेरे कपड़ों को लेकर, परफ़्यूम को लेकर, शैंपू को लेकर क्लास रूम में टिप्पणी करते रहे हैं. मुझे बार-बार कहा गया कि मैं केवल उन पर भरोसा करूं, उनके कमरे में अकेले आऊं. मेरे सहपाठी के साथ बैठने पर कहा गया कि तुम दोनों के बीच क्या रिश्ता है, क्या शादी करने वाले हो?&quot;</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-45277171">देहरादून के मॉडल ब्लाइंड स्कूल में ‘यौन उत्पीड़न’ के आरोप</a></li> </ul><h1>छात्राओं के आरोप</h1><p>दक्षिण भारत की एक छात्रा ने बताया कि उन्हें शिक्षक ने अपने सामने नाच कर दिखाने पर पांच दिन की उपस्थिति यूं ही दर्ज करने का प्रलोभन दिया. एक अन्य छात्रा ने अपने शिक्षक पर परीक्षा में पास करने के बदले अपने कमरे में बुलाने का आरोप लगाया.</p><p>एक अन्य छात्रा ने कहा, &quot;एक शिक्षक की बात नहीं मानने पर मेरे घर आधी रात को फ़ोन कर कह दिया गया कि मैं रात को बाहर घूमती हूं, शराब पीती हूं, ड्रग्स की आदि हूं. मेरे पिता को कहा गया कि वो मुझे यहां से ले जाएं. ईश्वर का धन्यवाद है कि मेरे माता-पिता मुझ पर भरोसा करते हैं. लेकिन क्या यह मानसिक प्रताड़ना किसी को भी अवसाद में डालने के लिए काफ़ी नहीं है?&quot;</p><p>विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति रविशंकर शर्मा मानते हैं कि ऐसी शिकायतें उनके सामने आई थीं और प्रदर्शनकारी छात्र सार्वजनिक तौर पर ऐसी शिकायतों पर बात करना चाह रहे थे. </p><p>शर्मा के अनुसार, ”मैंने छात्रों को पीड़ित छात्राओं के नाम सार्वजनिक नहीं करने का अनुरोध किया और उनसे कहा कि जो भी मामले हैं, उसकी लिखित में जानकारी दी जाए जिससे कार्रवाई की जा सके. लेकिन मुझे अब तक एक भी शिकायत नहीं मिली है.&quot; </p><p>प्रदर्शन, आश्वासन और शिकायतों के बीच फ़िलहाल तो विश्वविद्यालय में मामला सुलझता नज़र नहीं आ रहा है. यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स बॉर एसोसिएशन के अध्यक्ष स्नेहल रंजन शुक्ला ने कहा है कि जब तक हमारी मांगों को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रदर्शन चलता रहेगा.</p><p>इस बीच जेएनयू के छात्रों से लेकर देश के कई राजनीतिक दल प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में सामने आ गए हैं. मतलब साफ़ है कि छात्रों का यह प्रदर्शन अभी और परवान चढ़ेगा.</p><p><strong>ये भी पढ़ें</strong><strong>:</strong></p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india/2016/02/160213_aakar_patel_jnu_protest_pk">’छात्रों को समझने में नाकाम मोदी सरकार'</a></li> </ul> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-41371240">BHU की छात्राओं का प्रदर्शन जारी, विरोध में मुंडवाए सिर</a></li> </ul><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >