लाइलाज नहीं ब्रेन ट्यूमर

ब्रेन ट्यूमर दिमाग में होनेवाली गांठ है, जो कैंसरस भी हो सकती है और नॉन कैंसरस भी. आज चिकित्सा के क्षेत्र में हुई तकनीकी विकास के कारण विभिन्न जांचों की सहायता से इसकी सही स्थिति का अनुमान सहज लगाना संभव है, साथ ही सजर्री की आधुनिक विधियों से इसका पूरा उपचार भी संभव है. माइग्रेन […]

ब्रेन ट्यूमर दिमाग में होनेवाली गांठ है, जो कैंसरस भी हो सकती है और नॉन कैंसरस भी. आज चिकित्सा के क्षेत्र में हुई तकनीकी विकास के कारण विभिन्न जांचों की सहायता से इसकी सही स्थिति का अनुमान सहज लगाना संभव है, साथ ही सजर्री की आधुनिक विधियों से इसका पूरा उपचार भी संभव है.

माइग्रेन भी है लक्षण
माइग्रेन भी ब्रेन ट्यूमर के प्रारंभिक लक्षणों में से एक हो सकता है. हालांकि यह पुरुषों से अधिक महिलाओं में होता है. माइग्रेन अटैक यदि महीने में चार या पांच बार आता है और अटैक के पैटर्न में कोई बदलाव नजर आता है, तो यह ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है. अत: तुरंत डॉक्टर की सलाह पर सीटी स्कैन व एमआरआइ आदि जांच कराएं ताकि सही कारणों का पता लग सके और समय रहते इलाज शुरू हो सके.

जेनेटिक भी संभव
यदि परिवार में किसी को पहले से ब्रेन ट्यूमर है, तो परिवार के अन्य सदस्यों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. गर्भावस्था में भी कुछ टेस्टों की मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि गर्भ में पल रहे बच्चे को कौन-सी बीमारी है. गर्भ में ही इन बीमारियों का इलाज भी संभव है. अत: आप पहले से ही सावधानी बरतें.

सजर्री की प्रक्रिया व लाभ
यह सर्जरी अत्यंत सुरक्षित और कारगर है. इस सर्जरी में अन्य सर्जरी के मुकाबले मस्तिष्क में छोटा छिद्र किया जाता है, जिससे इंडोस्कोप को मस्तिष्क के अंदर भेजा जा सके. इस सर्जरी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इस तकनीक का इस्तेमाल करके दिमाग के रिट्रैक्शन से बचा जा सकता है, क्योंकि अन्य तकनीक के मुकाबले इस प्रक्रिया में कम रिट्रैक्शन होता है.

इस सर्जरी में टिशू भी आसानी से दिखाई देते हैं, जिससे इलाज करने में काफी आसानी होती है. इस सर्जरी में 6 एमएम का एक अति महीन छिद्र किया जाता है. मस्तिष्क के अंदर पाये जानेवाले कोलॉयड सिस्ट ही ट्यूमर को जन्म देते हैं. ये दिमाग के संवेदनशील क्षेत्र में स्थित होते हैं और इनके आकार में वृद्धि होने पर ये खतरनाक होते जाते हैं. इंडोस्कोप को छिद्र के माध्यम से मस्तिष्क में पहुंचा कर कोलॉयड सिस्ट को पूरी तरह से हटाया जाता है. सर्जरी की प्रक्रिया बेहद छोटी और कष्टरहित होती है.

बरतें सावधानी
इस रोग में अपने खान-पान का ध्यान रखना भी जरूरी है. वजन को नियंत्रित रखें. इसके अलावा अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है. इसके कारण शरीर के अन्य हिस्सों पर भी प्रभाव पड़ता है. इसके दौरान दिमाग पर सूजन होना भी आम बात है. अत: ट्रीटमेंट के दौरान भी सावधानी बरतें.

आलेख : कुलदीप तोमर, दिल्ली

इंडोस्कोपिक सर्जरी है कारगर
अब ब्रेन ट्यूमर जानलेवा बीमारी नहीं रह गयी है, क्योंकि वर्तमान में ब्रेन ट्यूमर का संपूर्ण इलाज संभव है बशर्ते समय पर उपचार शुरू किया जाये. चिकित्सक बताते हैं कि ब्रेन ट्यूमर के इलाज के लिए कई तकनीकें ईजाद हो चुकी हैं, जिनमें रेडियो सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, रोबोटिक सर्जरी प्रमुख हैं. इन तकनीकों से ब्रेन ट्यूमर का इलाज काफी सुरक्षित और कारगर माना गया है. ब्रेन ट्यूमर के इलाज के लिए वर्तमान में सबसे ज्यादा प्रचलित इंडोस्कोपिक सर्जरी है. यह सर्जरी कष्टरहित तो है ही, साथ ही इसके परिणाम भी अन्य सर्जरी से काफी बेहतर आते हैं.

डॉ दिनेश सिंह

वरिष्ठ कैंसर स्पेशलिस्ट

एक्शन कैंसर अस्पताल नयी दिल्ली

सीटी स्कैन के प्रभाव
ब्रेन कैंसर कितना बढ़ गया है या उसकी क्या स्थिति है, यह जानने के लिए सीटी स्कैन, एमआरआइ, एक्स-रे और एंजियोग्राम की मदद ली जाती है. ट्यूमर की शंका होने पर सबसे पहले सीटी स्कैन की जाती है. सीटी स्कैन के नाम पर लोगों के जेहन में यह बात उठने लगती है कि सीटी स्कैन तो शरीर पर काफी नकारात्मक प्रभाव डालता है. इससे निकलनेवाली घातक किरणों से कैंसर होने तक का खतरा हो सकता है. हाल ही में हुए शोधों में भी यह साबित हो चुका है. इसके प्रभाव को जानने के लिए यह जानना जरूरी है कि इसके लिए किस प्रक्रिया को अपनाया जाता है.

सीटी स्कैन एक कंप्यूटराइज एक्सीयल टोमोग्राफी स्कैन है, जो एक्स-रे की सीरीज है, जिसके जरिये ब्रेन के हिस्सों को देखा जा सकता है. इतना ही नहीं, ब्रेन के ढांचे को अच्छी तरह से जांचने के लिए 3डी तसवीरों के रूप में देखा जा सकता है. हालांकि ब्रेन कैंसर के दौरान सीटी स्कैन करने के नुकसान बहुत कम हैं, फिर भी इसके कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे – शरीर का तापमान बढ़ जाना, शरीर के विभिन्न हिस्सों में खुजली होना, लाल रैशेज पड़ना आदि. ये सभी साइड इफेक्ट अचानक से दिखाई देने लगते हैं. सीटी स्कैन के दौरान निकलनेवाली तरंगें बहुत हल्की होती हैं, फिर भी गर्भवती महिलाओं का सीटी स्कैन नहीं किया जाना चाहिए.

सजर्री से उपचार संभव
ब्रेन ट्यूमर का स्थायी इलाज सिर्फ ऑपरेशन है. वर्तमान में ऑपरेशन के दौरान जान जाने का खतरा एक फीसदी से भी कम माना जाता है. चिकित्सा जगत में होते परिवर्तन और नयी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के कारण ब्रेन ट्यूमर का इलाज अब काफी हद तक संभव हो गया है, साथ ही इसकी सफलता दर भी बढ़ गयी है. अगर रोगी को ट्यूमर कैंसरस नहीं है, तो ऑपरेशन द्वारा उसे निकाला जा सकता है. इसके बाद विशेषज्ञों की देख-रेख में रोगी ठीक होकर सामान्य जीवन जी सकता है.

इनपुट : प्राची खरे, दिल्ली ब्यूरो

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >