मुंबई में प्लेन उड़ाना इतना मुश्किल क्यों है?

मुंबई के घाटकोपर में रहने वाली तरुणा और उनके परिवार के लिए 28 जून की दोपहर रोज जैसी ही थी. वो लोग घर पर बैठे बातें कर रहे थे. तरुणा बताती हैं, "हम अपने बेटे के स्कूल से वापस आने का इंतज़ार कर रहे थे. हमने सोचा था कि उसने आने पर साथ लंच करेंगे. […]

<p>मुंबई के घाटकोपर में रहने वाली तरुणा और उनके परिवार के लिए 28 जून की दोपहर रोज जैसी ही थी. वो लोग घर पर बैठे बातें कर रहे थे. </p><p>तरुणा बताती हैं, &quot;हम अपने बेटे के स्कूल से वापस आने का इंतज़ार कर रहे थे. हमने सोचा था कि उसने आने पर साथ लंच करेंगे. तभी हमने एक ज़ोर की आवाज़ सुनी, जैसे कि कोई ब्लास्ट हुआ हो. हमने घबराकर खिड़कियां खोलीं और बाहर आग का एक बड़ा गोला देखा. ऐसा लगा जैसे सड़क पर भी आग लगी हो.&quot;</p><p>तरुणा के परिवार को ये समझने में थोड़ा वक़्त लगा कि गली में एक प्लेन गिर गया है. </p><p>घाटकोपर में जो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ वो यूवी ऐविएशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी का था. ख़राब मौसम में हादसे का शिकार हुआ यह विमान एक निर्माणस्थल पर गिरा था. </p><p>हादसे में विमान से बैठे चारों क्रू मेंबर्स की मौत हो गई थी. इसके अलावा इसकी चपेट में आने वाले एक शख्स़ की भी मौत हो गई थी जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए थे.</p><p>मामले की जांच चल रही है और दुर्घटना के वजहों का पता लगाने की कोशिश हो रही है.</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-44642913">मुंबई में गिरा चार्टर्ड विमान यूपी सरकार का नहीं था </a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-44138429">ये होता… तो शायद बनारस हादसा न हुआ होता..</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-42781425">बवाना हादसा: ‘दो सौ रुपये के लिए जान का सौदा’ </a></li> </ul><p>दुर्घटना के एक दिन बाद घाटकोपर में ज़िंदगी सामान्य हो चली है लेकिन यहां रहने वाले लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें अभी भी उभर आ रही हैं.</p><p>तरुणा की भाभी कुसुम कहती हैं, &quot;मैं सोच भी नहीं सकती कि प्लेन अगर कुछ मीटर की दूरी पर गिरा होता तो क्या होता. मैं इसी इलाके में पली-बढ़ी हूं. हमने अपने आस-पास हमेशा प्लेन उड़ते देखे हैं लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं देखा. हम डरे हुए तो नहीं हैं लेकिन हमें चिंता ज़रूर हो रही है.&quot;</p><p>तरुणा ने कहा, &quot;अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यहां ऐसा कुछ दोबारा न हो. ये इतनी भीड़भाड़ वाला इलाका है.&quot; </p><p>घाटकोपर और छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच तमाम इमारतों और झोपड़-पट्टियों में हज़ारों लोग रहते हैं. प्रथमेश लोखंडे उनमें से एक हैं. </p><p>प्रथमेश असल्फ़ा मेट्रो स्टेशन के पास रहते हैं जो दुर्घटनास्थल से काफी करीब है. वो पीड़ितों की मदद के लिए भी वहां गए थे.</p><p>प्रथमेश कहते हैं, &quot;मेरे घर के ठीक ऊपर से होकर प्लेन एयरपोर्ट की तरफ़ जाते हैं. अगर ऐसा कुछ हमारे इलाके में हुआ तो ज़्यादा बड़ी त्रासदी होगी. गलियां इतनी संकरी हैं कि वहां फ़ायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी नहीं पहुंच पाएंगी. अब हम निश्चित तौर पर चिंतित हैं.&quot; </p><h1>विशेषज्ञ क्या कहते हैं? </h1><p>गो-एयर में काम करने वाले कैप्टन नीलेश बापत कहते हैं, &quot;घनी आबादी वाले इलाके में प्लेन क्रैश होने पर लोगों का घबराना स्वाभाविक है लेकिन घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है. मुंबई में विमान उड़ाना बहुत मुश्किल नहीं है. यहां ऐसी दुर्घटनाएं आम तौर पर नहीं होती हैं. &quot;</p><p>हालांकि कैप्टन नीलेश ये मानते हैं कि मुंबई का मौसम पायलटों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, ख़ासकर बारिश का मौसम. उन्होंने कहा, &quot;आसमान में घुमड़ते बादल और चमकती बिजलियां प्लेन के लिए ख़तरनाक होती हैं. मुंबई एयरपोर्ट बहुत घनी आबादी वाले इलाके में है और एयरस्पेस भी बहुत व्यस्त है. आपके आस-पास बहुत से विमान उड़ते रहते हैं इसलिए पायलट को बहुत सतर्क रहना पड़ता है. &quot;</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-44126291">प्लेन का शीशा टूटा, पायलट आधा बाहर निकला</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/vert-fut-44635004">अगर पता चल जाए कि आप कब-कैसे मरने वाले हैं तो…</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-38052786">क्या भारत में रेल हादसा कभी रुकेगा? </a></li> </ul><p>मुंबई को हाल ही में दुनिया का सबसे व्यस्त सिंगल-रनवे एयरपोर्ट घोषित किया गया था. यहां हर रोज औसत 874 प्लेन उड़ान भरते हैं और 4 करोड़ 80 लाख से ज़्यादा यात्रियों की आवाजाही होती है. </p><p>पांच-छह जून को यहां 1,003 विमानों ने लैंडिंग और टेकऑफ़ किया था जोकि अपने आप में एक रिकॉर्ड है.</p><p>एयर ट्रैफ़िक में लगार बढ़त के मद्देनज़र विशेषज्ञ सुरक्षा प्रबन्धों को लेकर लगातार चिंता जताते आए हैं.</p><p>सिविल ऐविएशन सेफ़्टी एडवाइज़री काउसिंल के पूर्व सदस्य कैप्टन मोहन रंगनाथन का मानना है कि अधिकारियों को एयरपोर्ट के पास धड़ल्ले से बढ़ रहे निर्माण कार्य के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए.</p><p>उन्होंने कहा, &quot;मुंबई एयरपोर्ट के पास 100 से ज़्यादा ऐसी इमारतें हैं जिन्हें नियमों का उल्लंघन करके बनाया गया और इनकी पहचान ‘बाधा’ के तौर पर हुई है. इसलिए मुंबई में प्लेन उड़ाते हुए ख़तरा हमेशा मौजूद रहता है.&quot;</p><p>रंगनाथन कहते हैं, &quot;अगर एयरपोर्ट के बाहर कोई प्लेन क्रैश होता है बहुत ज़्यादा नुक़सान होने की आशंका होती है. ऐसी जगहों पर फ़ायर ब्रिगेड की गाड़ियों और बचाव दल का पहुंचना भी बहुत मुश्किल होगा क्योंकि गलियां बहुत तंग है. हम ख़ुशकिस्मत हैं ये कि प्लेन छोटा था और हादसा अपेक्षाकृत खुली जगह पर हुआ.&quot;</p><p><strong>ये भी पढ़ें</strong><strong>: </strong><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-44648109">’अगर आज कबीर होते तो वो भी देशद्रोही कहलाते'</a></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-44632335">नौरा की कहानी: बलात्कार, पति की हत्या और माफ़ी</a></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/entertainment-44653973">कौन हैं वो जिनके साथ प्रियंका चोपड़ा दिख रही हैं…</a></p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi/">फ़ेसबुक</a><strong> और </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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