कोलकाताः पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2021 के बाद हुई हिंसा के मुद्दे पर प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को लगातार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) घेर रही है. उसके खिलाफ लगातार बयानबाजी हो रही है. शुक्रवार (2 जुलाई) को चुनाव बाद हिंसा पर जब कलकत्ता हाइकोर्ट की पांच जजों की वृहत्तर बेंच ने सरकार की आलोचना की, तो स्मृति ईरानी ने भी ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.
भाजपा की तेज-तर्रार महिला नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने ममता बनर्जी को आड़े हाथ लिया. अमेठी की सांसद स्मृति ने कलकत्ता हाइकोर्ट के पांच जजों की बेंच की टिप्पणी को ट्विटर पर जारी करते हुए ममता बनर्जी से सवाल पूछा.
स्मृति ईरानी ने हाइकोर्ट की टिप्पणी के उस अंश को ट्विटर पर शेयर किया है, जिसमें कहा गया है कि बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा हुई, लेकिन राज्य सरकार ने उसका संज्ञान नहीं लिया. यहां तक कि नाबालिक लड़कियों को भी नहीं बख्शा गया. पुलिस ने उनमें से अधिकांश की शिकायत तक दर्ज नहीं की.
स्मृति ईरानी ने कहा है कि बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के बाद की स्थिति पर कलकत्ता हाइकोर्ट की यह सख्त टिप्पणी गंभीर है. बावजूद इसके, इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने अब तक एक शब्द नहीं बोला! उल्लेखनीय है कि बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी भाजपा चुनाव के बाद से ही इस मुद्दे पर तृणमूल पर हमलावर है.
बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का दावा है कि चुनाव के बाद हुई हिंसा में पार्टी के कम से कम 31 नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौत हो चुकी है. भाजपा ने इनकी मौत के लिए सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है. उनका आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों और उनके गुंडों ने भाजपा समर्थकों को डराने के लिए हिंसा का तांडव किया है. और यह अभी भी जारी है.
हालांकि, ममता बनर्जी भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज करती रही हैं. तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी विपक्षी पार्टी पर बंगाल को बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप लगाती हैं. हालांकि, वह मानती हैं कि चुनावी हिंसा में 16 लोगों की मौत हुई. लेकिन, उनका कहना है कि इसमें तृणमूल के कार्यकर्ता भी मारे गये.
चुनाव आयोग के शासन में हुई थी हिंसा- ममता बनर्जी
ममता बनर्जी यह भी दावा करती हैं कि प्रदेश में जब से तृणमूल की सरकार बनी है, तब से पूरी तरह से बंगाल में शांति है. हिंसा की जो भी घटनाएं हुईं, शासन की बागडोर उनके संभालने के पहले हुई. उस वक्त पुलिस और प्रशासन चुनाव आयोग के अधीन काम कर रहा था. तृणमूल की सरकार बनने के बाद हुई कुछ आपराधिक घटनाओं को चुनावी हिंसा करार दिया जा रहा है.
Posted By: Mithilesh Jha
