अतीक अहमद बेखौफ तो बहन को यूपी में दाखिल होते ही एनकाउंटर का डर, अशरफ-असद और शाइस्ता परवीन को लेकर कही ये बात

अतीक अहमद को झांसी पुलिस लाइन ले जाने के दौरान परिवार के सदस्य भी काफिले के पीछे पहुंचे. इस दौरान अतीक की बहन ने भाई के एनकाउंटर की आशंका जताते हुए कहा कि सड़क मार्ग से लाए जाने की जरूरत नहीं थी. उन्होंने कहा कि भाई की त​बीयत ठीक नहीं है. उन्होंने पुलिस लाइन में काफिला रोके जाने को भी गलत ठहराया.

Prayagraj: उमेश पाल अपहरण कांड मामले में आरोपी अतीक अहमद को गुजरात के साबरमती जेल से प्रयागराज लाया जा रहा है. रविवार शाम यूपी एसटीएफ की टीम अतीक को कड़ी सुरक्षा के घेरे में लेकर प्रयागराज के लिए रवाना हुई. राजस्थान और मध्य प्रदेश से होता हुआ अतीक का काफिला सोमवार सुबह झांसी से यूपी की सीमा में दाखिल हुआ. जहां रिजर्व पुलिस लाइन में उसे रोका गया. करीब डेढ़ घंटे के बाद काफिला प्रयागराज के लिए रवाना हुआ.

अतीक अहमद ने साबरमती जेल से निकलते वक्त कहा कि योगी सरकार कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर उसे मारना चाहती है. पूरी रात मीडिया की टीम इस काफिले के पीछे चलती रही. वहीं सोमवार को मध्य प्रदेश में टायॅलेट के लिए रोकने के दौरान अतीक के पीछे चल रहे मीडियाकर्मियों ने जब उससे डर को लेकर सवाल किया तो अतीक ने बेखौफ अंदाज में कहा ‘काहे का डर.’ हालांकि झांसी में अतीक की बहन ने कहा कि उन्हें भी भाई के एनकाउंटर का डर है, इसलिए वह भी काफिले के पीछे चल रही हैं.

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अतीक अहमद को झांसी रिजर्व पुलिस लाइन ले जाने के दौरान परिवार के सदस्य भी काफिले के पीछे पहुंचे. इस दौरान अतीक की बहन ने भाई के एनकाउंटर की आशंका जताते हुए कहा कि सड़क मार्ग से लाए जाने की जरूरत नहीं थी. उन्होंने कहा कि भाई की त​बीयत ठीक नहीं है. उन्होंने पुलिस लाइन में काफिला रोके जाने को भी गलत ठहराया. अतीक की बहन ने कहा कि भाई अशरफ को भी बरेली जेल से प्रयागराज लाया जा रहा है. उसके भी एनकाउंटर का डर है. बहन ने कहा कि उन्हें भतीजे असद अहमद के बारे में कोई जानकारी नहीं है और भाभी शाइस्ता परवीन का भी कुछ पता नहीं है. इस दौरान अतीक के वकील भी मौजद रहे.

अतीक अहमद के वकील ने दावा किया पिछली सरकार के समय उमेश पाल के अपहरण के फर्जी केस में उन्हें फंसाया गया था. इसी पर 28 मार्च को कोर्ट का फैसला आना है. परिवार को लगातार अतीक की चिंता है, एनकांउटर का डर है, इसलिए परिवार के सदस्य काफिले के पीछे चल रहे हैं.

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लेखक के बारे में

By Sanjay Singh

working in media since 2003. specialization in political stories, documentary script, feature writing.

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