Explained : नया मॉडल आते ही पुराना iPhone क्यों हो गया महंगा? कैसे तय होती है आईफोन की कीमत

iPhone 18 लॉन्च होने के बाद iPhone 17 सस्ता होने के बजाय ₹17,000 महंगा हो गया. जानिए AI, मेमोरी चिप की बढ़ती कीमत और भारत की टैक्स-कॉस्ट संरचना ने iPhone 17 की कीमत को कैसे प्रभावित किया.

आमतौर पर टेक्नोलॉजी की दुनिया में नया मॉडल आते ही पुराना सस्ता हो जाता है. लेकिन इस बार एप्पल ने इस नियम को ही पलट दिया. आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स की लॉन्चिंग (iPhone 18 Launch) के बाद भारत में iPhone 17 की शुरुआती कीमत करीब 21 फीसदी बढ़कर ₹99,900 हो गई है. यानी जो आईफोन 17, अब तक ₹82,900 से खरीदा जा सकता था, उसके लिए अब आपको ₹17,000 ज्यादा देने होंगे. नए मॉडल की लॉन्चिंग के बाढ़ एप्पल के ऑफिशियल वेबसाइट पर आईफोन 17 की शुरुआती कीमत ₹99,900 है.

ऐसे में सवाल ये है कि पुराना आईफोन (Old iPhone) महंगा क्यों हो गया? और कैसे आईफोन (iPhone Price) की कीमत तय होती है.

नया आईफोन मॉडल आया तो पुराना सस्ता क्यों नहीं हुआ?

  • आमतौर पर नया आईफोन आते ही पिछला मॉडल सस्ता हो जाता है. इसके कई कारण होते हैं, लेकिन कीमत कम होने के पीछे एक बात की चर्चा होती है कि पुराने मॉडल का स्टॉक अभी भी बचा हुआ है.
  • हालांकि, ऐसा जरूरी नहीं है. दरअसल, जब तक कोई मॉडल मार्केट में रहता है, उसकी नई यूनिट्स भी बनती रहती हैं. इसलिए उसकी कीमत में बदलाव होता रहता है.
  • चैटबॉट, एआई मॉडल और जनरेटिव एआई सेवाएं सिर्फ आपके फोन या कंप्यूटर में नहीं चलतीं. इनके पीछे विशाल डेटा सेंटर होते हैं, जहां हजारों-लाखों प्रोसेसर के साथ भारी मात्रा में तेज मेमोरी की जरूरत होती है.
  • एआई सर्वर में इस्तेमाल होने वाली हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (High-Bandwidth Memory) यानी HBM की मांग तेजी से बढ़ी है. इसका असर स्टैंडर्ड DRAM की सप्लाई पर भी पड़ रहा है.
  • काउंटरपॉइंट के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में वैश्विक डीआरएएम बाजार का राजस्व एक साल में 260 फीसदी बढ़कर करीब 97 अरब डॉलर पहुंच गया. एआई डेटा सेंटर( AI Data Center) की मांग इसका एक बड़ा कारण है.
  • मतलब आसान भाषा में कहें तो आईफोन 17 के मामले में असली खेल एआई और मेमोरी का है, जिसके कारण इसकी लागत बढ़ गई है.

भारत में कीमत और ज्यादा क्यों चुभ रही है?

  • भारत में इस कहानी का एक और हिस्सा है. रॉयटर्स के मुताबिक, 2026 में एप्पल ने भारत में कुछ आईफोन मॉडल्स की कीमतों में दुनिया के दूसरे बाजारों के मुकाबले ज्यादा बढ़ोतरी की.
  • आईफोन 17 का बेस मॉडल करीब 21 फीसदी महंगा हुआ, जबकि कुछ दूसरे मॉडल्स की कीमत में बढ़ोतरी 41 फीसदी तक पहुंची. भारत में 18 फीसदी जीएसटी और आयात से जुड़ी लागत भी फोन की कीमत को प्रभावित करती है.
  • इसलिए आईफोन 17 के महंगा होने के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है. मेमोरी की बढ़ती कीमत, एआई की बढ़ती मांग, सीमित चिप उत्पादन क्षमता (India Chip Production Capacity) और भारत की टैक्स-कॉस्ट संरचना(Tax-Cost Structure of India) इन सभी कारणों का असर इसकी कीमत पर पड़ा है.

कैसे तय होती है iPhone की कीमत?

  • आईफोन की कीमत सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि उसे बनाने में कितना खर्च आया. फोन के अंदर लगने वाले चिप, कैमरा, डिस्प्ले और मेमोरी जैसे पार्ट्स की कीमत भी इसमें जुड़ती है.
  • इसके अलावा फोन को बनाने और एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का खर्च, सप्लाई चेन, टैक्स और इंपोर्ट कॉस्ट भी कीमत पर असर डालते हैं. अगर इनमें से किसी चीज की लागत बढ़ती है, तो फोन की कुल कीमत भी बढ़ जाती है.
  • इसके साथ-साथ कंपनी यह भी देखती है कि किसी देश के बाजार में फोन की कितनी मांग है और वहां किस कीमत पर उसे बेचा जा सकता है.
  • यानी आसान भाषा में कहें तो आईफोन की कीमत सिर्फ उसके पार्ट्स की कीमत जोड़कर तय नहीं होती. फोन बनाने से लेकर ग्राहक तक पहुंचने के बीच आने वाले कई खर्च मिलकर इसकी अंतिम कीमत तय करते हैं.

तो क्या आगे फोन और महंगे होंगे?

काउंटरपॉइंट का अनुमान है कि मेमोरी सप्लाई की समस्या 2027 के दूसरे हिस्से तक बनी रह सकती है और दुनिया भर में एआई हर दिन काम का जरूरी हिस्सा बनता जा रहा है.

इसका मतलब हुआ कि आने वाले समय में स्मार्टफोन कंपनियों के सामने दो ही रास्ते होंगे, कीमत बढ़ाना या फिर हार्डवेयर और मुनाफे में कटौती करना. यानी आने वाले समय में पूरी संभावना है कि इस बढ़ती कीमत का असर आपके स्मार्टफोन के बिल में भी दिखाई दे.

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By गौतम कुमार

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