यूपीआई और वॉलेट में क्या अंतर है?

फोनपे की नई पॉलिसी के बाद यूपीआई और डिजिटल वॉलेट पर चर्चा तेज है. जानिए दोनों में क्या अंतर है, पैसा कहां रहता है और कौन-सा विकल्प आपके लिए बेहतर है…

फोनपे ने हाल ही में कुछ इनएक्टिव वॉलेट यूजर्स के लिए अपनी वॉलेट-संबंधी नीतियों को अपडेट किया है. इस घोषणा से ग्राहकों के मन में अनेक सवाल उठने लगे हैं और उनका ध्यान इस ओर गया कि डिजिटल वॉलेट क्या है और यह कैसे काम करता है.

ग्राहकों के बीच हो रही इस बातचीत में एक दिलचस्प बात यह देखने को मिली कि कई ग्राहक वॉलेट और यूपीआई शब्दों का इस्तेमाल एक ही अर्थ में करते हैं, जबकि ये दोनों बुनियादी रूप से अलग-अलग पेमेंट प्रोडक्ट हैं. इस बातचीत से कई सवाल उठते हैं, जैसे ‘‘क्या यूपीआई और वॉलेट एक हैं?”, ‘‘पैसा वास्तव में कहां रखा रहता है?” और ‘‘प्रत्येक मामले में पेमेंट की प्रोसेसिंग कैसे होती है?”

ये सवाल इस बारे में जागरूकता बढ़ाए जाने की जरूरत पर जोर देते हैं कि ये पेमेंट प्रोडक्ट कैसे काम करते हैं. डिजिटल पेमेंट दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं. चाहे ग्रोसरी का पेमेंट देना हो, फूड ऑर्डर करना हो, कैब बुक करना हो या फिर बिल को दोस्तों में बांटना हो, यूपीआई और डिजिटल वॉलेट का उपयोग हर कोई कभी न कभी करता है. इन दोनों के बीच का अंतर जानकर ग्राहक ज्यादा विश्वास से पेमेंट विकल्प चुन सकते हैं. वो बेहतर तरीके से समझ सकते हैं कि उनके द्वारा किस प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है. आइए जानें कि यूपीआई और वॉलेट कैसे काम करते हैं, पैसा कहां जमा रहता है और इन दोनों को किन-किन जरूरतों के लिए बनाया गया है.

यूपीआई क्या है?

यूपीआई (यूनिफाईड पेमेंट इंटरफेस) एक पेमेंट सिस्टम है, जो सीधे आपके बैंक खाते से जुड़ा होता है. आप जब भी यूपीआई से कोई पेमेंट करते हैं, तो पैसा सीधे आपके बैंक खाते से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में हाथों-हाथ पहुंच जाता है. आपको पेमेंट करने के लिए अलग से पैसे को वॉलेट में डालने की जरूरत नहीं पड़ती है. इस तरह के पेमेंट यूपीआई आईडी, क्यूआर कोड या यूपीआई से लिंक्ड मोबाईल नंबर से होते हैं.

आसान भाषा में इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि यूपीआई एक ऐसा डिजिटल पुल है, जो आपके बैंक खाते को दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते से जोड़ता है. जब तक आप पेमेंट नहीं कर देते हैं, तब तक पैसा आपके बैंक खाते में ही बना रहता है.

वॉलेट क्या है?

डिजिटल वॉलेट पैसे रखने के लिए एक खाता है, जिसमें आप पहले पैसे डालते हैं और फिर उस पैसे से धीरे-धीरे पेमेंट करते रहते हैं. पेमेंट करने से पहले आपको वॉलेट को टॉप-अप करना होता है, यानी आपको पहले उसमें पैसे डालने पड़ते हैं. वॉलेट में बैंक खाते, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या किसी अन्य पेमेंट विधि से पैसा डाला जा सकता है. जब वॉलेट से पेमेंट किया जाता है, तो पैसा बैंक खाते की बजाय वॉलेट बैलेंस से कटता है. वॉलेट एक पर्स की तरह होता है, जिसमें आपका पैसा डिजिटल रूप में रखा होता है. पैसा तब तक वॉलेट में रखा रहता है, जब तक आप इसे खर्च नहीं करते हैं.

इन दोनों मामलों में पैसा कहां रखा रहता है?

यूपीआई

बैंक खाता → यूपीआई → मर्चेंट/दोस्त

पैसा तब तक आपके बैंक खाते में रहता है, जब तक पेमेंट नहीं कर दिया जाता.

वॉलेट

बैंक खाता/कार्ड → वॉलेट → मर्चेंट/दोस्त

पैसा पहले वॉलेट में जाता है और उसके बाद उससे पेमेंट किया जाता है.

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By Rajeev Kumar

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