आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स के तेजी से बढ़ते दौर में युद्ध के मैदानों पर इंसानी नियंत्रण खोने का खतरा गहराता जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और रेड क्रॉस की प्रमुख मिर्जाना स्पोलजारिक एगर ने मिलकर एक अपील की है. उन्होंने कहा है कि घातक स्वायत्त हथियारों पर कड़े नियम बनने चाहिए, जो सब पर लागू हों. बड़ी संस्थाओं का साफ कहना है कि ये ऐसी मशीनें हैं जो खुद तय करती हैं कि किसे मारना है, बिना किसी इंसान के बताए. ये न केवल नैतिकता की हदें पार कर रही हैं, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अस्तित्व पर भी सीधा प्रहार है.
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इंसानी कंट्रोल खत्म होने और नैतिक सीमाओं के टूटने का डर
संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस ने चेतावनी दी है कि इंसानियत उस नैतिक खतरे के लाल निशान को पार करने के बेहद करीब पहुंच चुकी है, जहां मशीनें खुद इंसानों को निशाना बनाएंगी. युद्ध के दौरान एक सैनिक का आत्मसमर्पण करना, घायल होना या किसी नागरिक का अचानक हमलावर क्षेत्र में आ जाना जैसी जटिल परिस्थितियां सामने आती हैं. कल्पना कीजिए कि कोई सैनिक जो युद्ध में घायल हो गया है, और ये मशीनें उसे दुश्मन समझकर हमला कर दें, या कोई निर्दोष नागरिक गलती से युद्ध क्षेत्र में आ जाए और मशीन उसे पहचान न पाए. एल्गोरिदम और सेंसर्स पर चलने वाले ये हथियार ऐसी अप्रत्याशित स्थितियों में अंतर करने में पूरी तरह असमर्थ होते हैं. रेड क्रॉस के प्रतिनिधियों के अनुसार, किसी इंसान के जीवन को सिर्फ डेटा और मशीन ऑपरेशन्स तक सीमित कर देना नैतिक रूप से पूरी तरह अस्वीकार्य है.
सिस्टम विकसित करने वाले कई वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स ने खुद इसके खतरों को लेकर आवाज उठाई है और वैश्विक नेताओं से समय रहते तकनीक पर कड़े नियम लागू करने की मांग की है.
प्रतिबंधित किए जाने वाले दो मुख्य प्रकार के स्वायत्त हथियार
वैश्विक नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दो मुख्य श्रेणियों के हथियारों पर तुरंत रोक लगाने की अपील की है:
- अप्रत्याशित स्वायत्त हथियार (Unpredictable Autonomous Weapons): ऐसे हथियार जिनका इस्तेमाल करते समय ऑपरेटर या सेना उनके सटीक परिणाम का अनुमान न लगा सके. यदि किसी हथियार के हमले का दायरा तय ही नहीं किया जा सकता, तो उसे नियंत्रित करना असंभव है.
- इंसानों को निशाना बनाने वाले हथियार (Anti-Personnel Autonomous Weapons): वे सिस्टम जो सीधे तौर पर इंसानों को टारगेट करते हैं. ये प्रणाली मानव जीवन को केवल कोड्स और आंकड़ों में बदल देती हैं, जिससे जीवन के अधिकार का हनन होता है.
वार्ता से आगे बढ़कर सख्त वैश्विक संधि बनाने की तात्कालिक जरूरत
यूएन और रेड क्रॉस ने वर्ष 2023 में ही सरकारों से 2026 तक एक कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर करने का आह्वान किया था. जिनेवा में नवंबर में होने वाले 'कन्वेंशन ऑन सर्टेन कन्वेंशन वेपन्स' (CCW) के सातवें समीक्षा सम्मेलन को इसके लिए सबसे उपयुक्त अवसर माना जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि अब केवल विचार-विमर्श का समय खत्म हो चुका है और वैश्विक देशों को राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए कड़े फैसले लेने होंगे, ताकि भविष्य की पीढ़ियों को जवाबदेही से मुक्त विनाशकारी युद्ध से बचाया जा सके.
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1. घातक स्वायत्त हथियार (Lethal Autonomous Weapons) क्या होते हैं? ▼
ये ऐसे सैन्य उपकरण, ड्रोन या रोबोटिक सिस्टम होते हैं जो किसी भी मानवीय आदेश, पर्यवेक्षण या हस्तक्षेप के बिना खुद ही लक्ष्य चुनते हैं और हमला करते हैं.
2. संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस किस सम्मेलन में इस संधि को पारित कराना चाहते हैं? ▼
दोनों वैश्विक निकायों का ध्यान जिनेवा में नवंबर में आयोजित होने वाले 'कन्वेंशन ऑन सर्टेन कन्वेंशन वेपन्स' (CCW) के समीक्षा सम्मेलन पर है, जिसे वे संधि वार्ता शुरू करने का सबसे सही मंच मानते हैं.
3. वैज्ञानिकों और टेक इंजीनियर्स का इन स्वायत्त हथियारों पर क्या रुख है? ▼
सिस्टम विकसित करने वाले कई वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स ने खुद इसके खतरों को लेकर आवाज उठाई है और वैश्विक नेताओं से समय रहते तकनीक पर कड़े नियम लागू करने की मांग की है.
