घर के अंदर फुल नेटवर्क क्यों नहीं मिलता? ट्राई चेयरमैन ने बताई असली वजह, अब बदलेंगे बिल्डिंग के नियम

TRAI के मुताबिक इमारतों के अंदर नेटवर्क समस्या तेजी से बढ़ रही है. अब बिल्डिंग डिजाइन में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जोड़ना जरूरी होगा, साथ ही नई रेटिंग और स्पेक्ट्रम से नेटवर्क सुधरने की उम्मीद है.

आपने अक्सर नोटिस किया होगा कि बाहर सड़क पर मोबाइल इंटरनेट तेज चलता है, लेकिन जैसे ही घर या ऑफिस के अंदर जाते हैं, सिग्नल कमजोर हो जाता है. अब यह सिर्फ आपकी समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश में तेजी से बढ़ती एक बड़ी चुनौती बन चुकी है. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के चेयरमैन एके लाहोटी ने साफ कहा है कि बढ़ते डेटा इस्तेमाल के बावजूद इमारतों के अंदर नेटवर्क की समस्या गंभीर होती जा रही है, और अब इसका समाधान बिल्डिंग डिजाइन से ही शुरू करना होगा.

घर के अंदर नेटवर्क क्यों हो रहा कमजोर?

आज मोबाइल डेटा की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है. 5G और हाई-स्पीड इंटरनेट के बावजूद यूजर्स को घर के अंदर कॉल ड्रॉप और स्लो इंटरनेट जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है इमारतों का स्ट्रक्चर.

कंक्रीट, ग्लास और मेटल से बनी आधुनिक इमारतें मोबाइल सिग्नल को अंदर आने से रोक देती हैं. यही कारण है कि बाहर तेज नेटवर्क होने के बावजूद अंदर आते ही स्पीड गिर जाती है.

अब बिल्डिंग बनाते वक्त जोड़ना होगा ‘डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर’

इस समस्या को देखते हुए ट्राई ने सरकार को सुझाव दिए हैं, जिन्हें मंजूरी भी मिल चुकी है. अब नए घरों और कमर्शियल बिल्डिंग्स के डिजाइन में डिजिटल कनेक्टिविटी का ढांचा शामिल करना जरूरी होगा.

इसका मतलब है कि आने वाले समय में बिल्डिंग्स को इस तरह डिजाइन किया जाएगा, जिससे मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सिग्नल आसानी से अंदर पहुंच सकें. इससे यूजर्स को बेहतर कॉलिंग और इंटरनेट एक्सपीरियंस मिलेगा.

इमारतों को मिलेगा ‘नेटवर्क रेटिंग’ सिस्टम

यूजर्स को बेहतर सुविधा देने के लिए ट्राई ने एक नया सिस्टम भी तैयार किया है. इसके तहत अब इमारतों को उनकी डिजिटल कनेक्टिविटी के आधार पर रेटिंग दी जाएगी.

यानी जिस बिल्डिंग में नेटवर्क अच्छा होगा, उसकी रेटिंग ज्यादा होगी. यह रेटिंग अधिकृत एजेंसियों द्वारा दी जाएगी और इससे बिल्डर्स पर भी दबाव बनेगा कि वे बेहतर नेटवर्क सुविधाएं दें.

नया स्पेक्ट्रम देगा अंदर बेहतर नेटवर्क

ट्राई ने सरकार को अतिरिक्त स्पेक्ट्रम देने की सिफारिश भी की है, खासकर 600 मेगाहर्ट्ज बैंड और 37-40 गीगाहर्ट्ज बैंड में.

600 MHz बैंड की खास बात यह है कि इसके सिग्नल दीवारों और इमारतों के अंदर बेहतर तरीके से पहुंचते हैं. इससे घर के अंदर नेटवर्क क्वालिटी में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है.

AI और डेटा की बढ़ती मांग ने बढ़ाई चुनौती

कृत्रिम मेधा यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल के कारण डेटा की मांग तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में सिर्फ मोबाइल नेटवर्क से काम नहीं चलेगा.

अब फिक्स्ड ब्रॉडबैंड और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत और ज्यादा बढ़ गई है, ताकि यूजर्स को हर जगह स्मूद इंटरनेट मिल सके.

आने वाला समय ‘स्मार्ट बिल्डिंग्स’ का

स्पष्ट है कि भविष्य में सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं, बल्कि स्मार्ट बिल्डिंग्स भी जरूरी होंगी. जहां बेहतर नेटवर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी पहले से प्लान की जाएगी.

अगर ये बदलाव सही तरीके से लागू होते हैं, तो आने वाले समय में घर के अंदर नेटवर्क की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है.

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लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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