STAR तकनीक ने बदली तस्वीर: जहां मिलना नामुमकिन था, वहां अब छिपे स्पर्म्स ढूंढ़कर दे रही पितृत्व का मौका

एआई आधारित STAR तकनीक अब उन पुरुषों को भी पिता बनने का मौका दे रही है, जिनमें शुक्राणु नहीं मिलते थे. यह नई खोज इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट में बड़ा बदलाव ला सकती है.

रीप्रोडक्टिव डिसऑर्डर्स से जूझ रहे पुरुषों के लिए मेडिकल साइंस ने एक बड़ा मोड़ लिया है. अब ऐसी स्थिति में भी पिता बनने की संभावना बन रही है, जहां पहले उम्मीद लगभग खत्म मानी जाती थी. अमेरिका के शोधकर्ताओं ने एक नई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक ‘STAR’ विकसित की है, जो बेहद कम या छिपे हुए स्पर्म्स यानी शुक्राणुओं को पहचानकर उन्हें सुरक्षित निकालने की ताकत रखती है. यह तकनीक उन मामलों में भी काम कर रही है, जहां पारंपरिक जांच पूरी तरह असफल साबित होती थी.

क्या है STAR तकनीक और कैसे करती है काम?

STAR यानी स्पर्म ट्रैक एंड रिकवरी, एक अत्याधुनिक एआई-आधारित सिस्टम है, जो हाई-रिजोल्यूशन इमेज स्कैनिंग के जरिए काम करती है. यह तकनीक प्रति सेकंड सैकड़ों माइक्रोस्कोपिक इमेज को स्कैन कर उनमें छिपे शुक्राणुओं की पहचान कर सकती है.

जहां सामान्य लैब टेस्ट में शुक्राणु दिखाई नहीं देते, वहां यह तकनीक तरल पदार्थ और अन्य कोशिकाओं के बीच छिपे बेहद दुर्लभ शुक्राणुओं को भी खोज निकालती है. एआई द्वारा पहचान होते ही एक रोबोटिक सिस्टम तुरंत उस शुक्राणु को अलग कर सुरक्षित कर लेता है, जिससे फर्टिलाइजेशन की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.

एजोस्पर्मिया मरीजों के लिए गेमचेंजर

एजोस्पर्मिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें पुरुष के वीर्य में शुक्राणु लगभग न के बराबर होते हैं. अब तक इसे पुरुष बांझपन की सबसे कठिन स्थितियों में गिना जाता था.

लेकिन STAR तकनीक ने इस सोच को चुनौती दी है. यह उन दुर्लभ मामलों में भी शुक्राणु ढूंढ निकालती है, जहां बार-बार की जांच में कुछ नहीं मिलता. इससे उन दंपतियों के लिए नयी उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से संतान के लिए संघर्ष कर रहे थे.

जेनेटिक बीमारी में भी दिखाया कमाल

इस तकनीक की सबसे बड़ी सफलता तब सामने आई जब इसे क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम से पीड़ित एक व्यक्ति पर आजमाया गया. इस बीमारी में पुरुष के शरीर में अतिरिक्त X क्रोमोसोम होने के कारण शुक्राणु बनना बेहद मुश्किल हो जाता है.

डॉक्टरों ने पहले इस व्यक्ति के पिता बनने की संभावना सिर्फ 20% बताई थी. लेकिन STAR तकनीक ने उसके सैंपल में से 8 शुक्राणु खोज निकाले. इन्हीं की मदद से उसकी पत्नी गर्भवती हो पाईं और अब बच्चे के जन्म की उम्मीद जताई जा रही है.

रीप्रोडक्टिव मेडिसिन में नयी क्रांति की शुरुआत

एआई और रोबोटिक्स के इस संयोजन ने रीप्रोडक्टिव ट्रीटमेंट यानी प्रजनन उपचार के क्षेत्र में एक नई दिशा खोल दी है. STAR तकनीक न केवल सटीक और तेज है, बल्कि उन मामलों में भी उम्मीद पैदा करती है, जहां पहले कोई विकल्प नहीं बचता था.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस तकनीक को और बेहतर बनाया जाएगा, जिससे सफलता दर में और वृद्धि हो सकती है. यह खोज लाखों परिवारों के जीवन में नई खुशियां ला सकती है.

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Published by: Rajeev Kumar

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